अमरदीप एवं रविता कश्यप (ऊपर), साहिल शुक्ला एवं मुस्कान रस्तोगी (नीचे)
नीला ड्रम मामले में मुस्कान रस्तोगी–साहिल शुक्ला और सांप कांड में रविता कश्यप–अमरदीप को सजा; हाईकोर्ट की पुष्टि और अपीलों के बाद ही दया याचिका का चरण आएगा
मेरठ । मेरठ में दो अलग-अलग हत्याकांडों में अदालतों ने चार दोषियों को मृत्युदंड सुनाया है। 14 अक्टूबर को सौरभ राजपूत हत्याकांड में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सजा सुनाई गई। इसके दो दिन बाद, 16 अक्टूबर को अमित कश्यप हत्याकांड में उनकी पत्नी रविता कश्यप और अमरदीप को मृत्युदंड दिया गया। दोनों मामले अलग हैं और दोनों में मृत्युदंड का फैसला सत्र अदालतों ने सुनाया है।
हालांकि, सत्र अदालत का मृत्युदंड का फैसला आते ही फांसी की तारीख तय नहीं हो जाती। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा अनिवार्य रूप से हाईकोर्ट के पास पुष्टि के लिए भेजी जाती है। हाईकोर्ट की पुष्टि के बिना सजा पर अमल नहीं किया जा सकता। दोषियों को फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील का भी अधिकार है।

चारों दोषियों और मामलों का संक्षिप्त प्रोफाइल
दोषी मामला और संबंध अदालत का फैसला
मुस्कान रस्तोगी सौरभ राजपूत की पत्नी; मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र का चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड 30 सितंबर को दोषी करार, 14 अक्टूबर को मृत्युदंड
साहिल शुक्ला मुस्कान का स्कूल का सहपाठी और इस मामले में सह-दोषी 30 सितंबर को दोषी करार, 14 अक्टूबर को मृत्युदंड
रविता कश्यप अमित कश्यप की पत्नी; बहसूमा क्षेत्र का कथित सर्पदंश दिखाकर हत्या करने का मामला 7 अक्टूबर को दोषी करार, 16 अक्टूबर को मृत्युदंड
अमरदीप अमित के साथ काम करने वाला परिचित और रविता के साथ इस मामले में सह-दोषी; प्रकाशित रिपोर्टों में उपनाम नहीं दिया गया 7 अक्टूबर को दोषी करार, 16 अक्टूबर को मृत्युदंड
नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला
अदालत में पेश मामले के अनुसार, ब्रह्मपुरी के इंद्रानगर निवासी सौरभ राजपूत ने 2016 में मुस्कान रस्तोगी से प्रेम विवाह किया था। सौरभ की हत्या 3 मार्च 2025 की रात हुई। अभियोजन के मुताबिक, हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाया गया। मामले का खुलासा होने के बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया गया। जिला जज की अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों को दोषी करार दिया और 14 अक्टूबर को मृत्युदंड सुनाया।
मुस्कान रस्तोगी इस मामले में सौरभ की पत्नी और मुख्य दोषियों में से एक है। साहिल शुक्ला उसका स्कूल का सहपाठी था। अदालत में अभियोजन ने दोनों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कठोर सजा की मांग की थी। फिलहाल दोनों को सुनाई गई सजा हाईकोर्ट की अनिवार्य पुष्टि और अपील की प्रक्रिया से गुजरनी होगी।

अमित कश्यप हत्याकांड: रविता कश्यप और अमरदीप
बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव में अमित कश्यप की मौत को पहले सर्पदंश का मामला बताया गया था। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई। अभियोजन की कहानी के मुताबिक, हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के लिए शव के पास सांप छोड़ा गया था। अदालत ने 7 अक्टूबर को रविता और अमरदीप को दोषी ठहराया और 16 अक्टूबर को मृत्युदंड सुनाया।
रविता कश्यप अमित की पत्नी थीं। प्रकाशित रिपोर्ट में उनकी उम्र 30 वर्ष बताई गई है और दंपती के तीन बच्चों का उल्लेख है। अमरदीप, जिसकी उम्र रिपोर्ट के अनुसार 23 वर्ष थी, अमित के साथ काम करता था और पड़ोस में रहता था। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी थी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों को हत्या और साजिश के मामले में दोषी ठहराया।

मृत्युदंड के बाद आगे क्या होगा?
- हाईकोर्ट में अनिवार्य पुष्टि और अपील
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 407 के अनुसार, सत्र अदालत को मृत्युदंड का मामला हाईकोर्ट में पुष्टि के लिए भेजना होता है। सजा की पुष्टि होने तक उसे लागू नहीं किया जा सकता। दोषी इस बीच हाईकोर्ट में अपनी अपील भी दाखिल कर सकते हैं। हाईकोर्ट मामले के रिकॉर्ड, साक्ष्य और दलीलों की समीक्षा करके सजा को कायम रख सकता है, बदल सकता है या दोषसिद्धि को निरस्त कर सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट का रास्ता
यदि हाईकोर्ट मृत्युदंड की पुष्टि करता है, तो दोषी संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं—जिसमें विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) का रास्ता शामिल है। सुप्रीम कोर्ट में उपलब्ध उपायों में अपील, समीक्षा याचिका और सीमित आधारों पर क्यूरेटिव याचिका शामिल हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट की जानकारी के अनुसार, समीक्षा याचिका के बाद ही सीमित आधारों पर क्यूरेटिव याचिका दायर की जा सकती है।
- राज्यपाल और राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका
न्यायिक उपायों के बाद दोषी या उनके कानूनी वारिस/रिश्तेदार संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल और अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका का रास्ता अपना सकते हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 472 में दया याचिका के लिए प्रक्रिया और समय-सीमा दी गई है। जेल अधीक्षक द्वारा संबंधित सूचना दिए जाने के बाद याचिका दाखिल करने की अवधि शुरू होती है; राज्यपाल द्वारा याचिका खारिज या निस्तारित होने पर राष्ट्रपति के समक्ष याचिका दाखिल करने के लिए अलग समय-सीमा का प्रावधान है। राष्ट्रपति के पास मृत्युदंड को माफ करने, कम करने या बदलने की संवैधानिक शक्ति है।
- फांसी से पहले अंतिम वारंट और सूचना
दया याचिका सहित उपलब्ध कानूनी उपायों पर निर्णय होने के बाद भी फांसी की प्रक्रिया के लिए अदालत का वारंट और निर्धारित कानूनी कदम जरूरी होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निष्पादन वारंट जारी करने से पहले दोषी को पर्याप्त सूचना और वकील से परामर्श का अवसर मिलना चाहिए। वारंट में फांसी की स्पष्ट तारीख और समय होना चाहिए।
इसलिए मेरठ के इन दोनों मामलों में मृत्युदंड का फैसला महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव है, लेकिन इसे अंतिम निष्पादन आदेश नहीं माना जा सकता। चारों दोषियों के मामलों में पहले हाईकोर्ट की पुष्टि और अपील की प्रक्रिया पूरी होगी; उसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट और दया याचिका से जुड़े अगले चरणों की स्थिति स्पष्ट होगी।