राज्यसभा सांसद डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेई
मेरठ। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राज्यसभा सांसद एवं मुख्य सचेतक डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने उत्तर प्रदेश में ई-फाइलिंग सेंटर की व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किए जाने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल न्याय व्यवस्था का लाभ प्रदेश के अधिवक्ताओं और वादकारियों को समान रूप से मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की चार बेंच—मेरठ, आगरा, वाराणसी और गोरखपुर—स्थापित किए जाने की अपनी मांग को दोहराया।
डॉ. बाजपेयी ने 13 अगस्त 2026 को जारी अपने बयान में बताया कि माननीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को 9 अगस्त 2026 को ई-फाइलिंग सेंटर व्यवस्था लागू करने के संबंध में पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि यह विषय उत्तर प्रदेश में न्याय तक आसान और त्वरित पहुंच से सीधे जुड़ा हुआ है।
देशभर में ई-फाइलिंग व्यवस्था, उत्तर प्रदेश में स्थिति अलग
डॉ. बाजपेयी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के निर्णय, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ के स्तर से न्यायालयों के डिजिटलीकरण की दिशा में लिए गए निर्णय तथा भारत सरकार की मंत्रिपरिषद के निर्णय के तहत देश के प्रत्येक जिले में ई-फाइलिंग सेंटर स्थापित करने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 744 करोड़ रुपये की व्यवस्था किए जाने का भी उल्लेख उन्होंने किया।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को छोड़कर देश के अन्य राज्यों में ई-फाइलिंग सेंटर संचालित हो चुके हैं। इनके माध्यम से अधिवक्ता और पक्षकार हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों की फाइलिंग कर रहे हैं और डिजिटल माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
डॉ. बाजपेयी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्थिति अलग है। उनके अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से ई-फाइलिंग सेंटर की स्थापना को लेकर आदेश जारी किया गया था, लेकिन लगभग एक सप्ताह बाद उस आदेश को “Kept in Abeyance” कर दिया गया। इसके बाद हाईकोर्ट रूल 3-ए के आधार पर ऐसी व्यवस्था लागू की गई, जिसके तहत ई-फाइलिंग सेंटर के माध्यम से होने वाली फाइलिंग इलाहाबाद हाईकोर्ट में पंजीकृत अधिवक्ता के माध्यम से ही किए जाने की व्यवस्था बताई गई।
ई-फाइलिंग व्यवस्था पर उठाया सवाल
डॉ. बाजपेयी ने सवाल उठाया कि जब देश के अन्य हिस्सों में ई-फाइलिंग व्यवस्था के माध्यम से न्यायिक कार्यवाही आगे बढ़ रही है, तो उत्तर प्रदेश में इस व्यवस्था का प्रभावी लाभ आम वादकारियों और अधिवक्ताओं को क्यों नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट से संबंधित आदेश एवं वर्तमान व्यवस्था के कारण प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी की डिजिटल न्याय व्यवस्था तथा भारत सरकार की ई-फाइलिंग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री के समक्ष उठाया मामला
राज्यसभा सांसद ने बताया कि उन्होंने इस विषय को केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री तथा मंत्रालय के अधिकारियों के समक्ष भी रखा है। उन्होंने कहा कि विषय की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा गया है।
डॉ. बाजपेयी ने कहा कि उक्त पत्र को जनता की जानकारी के लिए सार्वजनिक किया जा रहा है, ताकि उत्तर प्रदेश की जनता को ई-फाइलिंग सेंटर व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
“अंततोगत्वा हमें हाईकोर्ट बेंच ही चाहिए”
डॉ. बाजपेयी ने स्पष्ट किया कि ई-फाइलिंग सेंटर की मांग उनका अंतिम लक्ष्य नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी मूल मांग उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंचों की स्थापना है। ई-फाइलिंग सेंटर को उन्होंने इस दिशा में एक प्रारंभिक और व्यावहारिक कदम बताया, जिससे प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की न्याय तक पहुंच आसान हो सकती है।
उन्होंने दोहराया कि उत्तर प्रदेश में मेरठ, आगरा, वाराणसी और गोरखपुर में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित की जानी चाहिए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत दूरदराज के क्षेत्रों को राहत की जरूरत
डॉ. बाजपेयी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का विशाल क्षेत्रफल, बड़ी आबादी और न्यायालयों में लंबित मुकदमों की भारी संख्या न्यायिक व्यवस्था को अधिक विकेंद्रीकृत किए जाने की आवश्यकता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल और प्रदेश के अन्य दूरस्थ क्षेत्रों के लाखों लोगों को इलाहाबाद स्थित हाईकोर्ट तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे वादकारियों और उनके परिवारों को समय, धन तथा अन्य संसाधनों का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
उनका कहना है कि प्रस्तावित चार हाईकोर्ट बेंच स्थापित किए जाने के बाद भी उत्तर प्रदेश पर उसकी जनसंख्या, क्षेत्रफल और लंबित मुकदमों के अनुपात में न्यायिक भार देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक रहेगा। इसलिए न्यायिक प्रशासन के विकेंद्रीकरण की आवश्यकता बनी रहेगी।
“न्याय जनता के द्वार तक पहुंचे”
डॉ. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी ने कहा कि हाईकोर्ट की बेंच की मांग केवल किसी एक क्षेत्र की मांग नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य आम नागरिक को सुलभ, त्वरित और समान न्याय उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में ई-फाइलिंग सेंटर की व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया जाना चाहिए, ताकि डिजिटल माध्यम से न्याय तक पहुंच आसान हो सके।
उन्होंने कहा कि “न्याय जनता के द्वार तक पहुंचे”—यही उनकी मांग और इस पूरे प्रयास का उद्देश्य है।
डॉ. बाजपेयी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि ई-फाइलिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में मेरठ, आगरा, वाराणसी और गोरखपुर में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करना प्रदेश की जनता के व्यापक हित में आवश्यक है।