एडवोकेट रामकुमार शर्मा
मेरठ। मेरठ नगर में सार्वजनिक सड़कों, नालों, चौराहों और सरकारी भूमि पर बने अवैध धार्मिक स्थलों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सिविल कोर्ट मेरठ के अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने नगर आयुक्त, जिलाधिकारी और मंडलायुक्त मेरठ को ज्ञापन भेजकर शहर में बने ऐसे सभी धार्मिक अतिक्रमणों का व्यापक सर्वे कराए जाने तथा नियमानुसार निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने अपने ज्ञापन में कहा है कि मेरठ शहर के विभिन्न हिस्सों में सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर मंदिर, मज़ार और अन्य धार्मिक संरचनाएं निर्मित हैं, जिनके कारण यातायात व्यवस्था, जल निकासी और आम नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता के अधीन है। किसी भी व्यक्ति या समूह को सरकारी भूमि अथवा सार्वजनिक मार्ग पर अतिक्रमण कर धार्मिक निर्माण करने का अधिकार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला
ज्ञापन में अधिवक्ता ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2009 में जारी निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी राज्यों को सार्वजनिक स्थलों पर नए धार्मिक ढांचों के निर्माण को रोकने तथा अवैध निर्माणों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का भी हवाला दिया गया, जिनमें सार्वजनिक मार्गों, फुटपाथों और सरकारी भूमि पर धार्मिक अतिक्रमणों को अस्वीकार्य बताया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का दायित्व है कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त बनाए रखा जाए ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
इन स्थानों का किया उल्लेख
ज्ञापन में मेरठ शहर के कई ऐसे स्थानों का उल्लेख किया गया है जहां धार्मिक अतिक्रमण होने का दावा किया गया है। इनमें सिविल कोर्ट के बाहर नाले के ऊपर बना मंदिर, जसवंत राय अस्पताल के सामने सड़क पर स्थित मंदिर, खैरनगर क्षेत्र में स्थित मज़ार, रुड़की रोड पर लेखा नगर के समीप बड़ी मज़ार तथा मेघदूत नाले के चौराहे के पास नाले के किनारे बना मंदिर शामिल हैं।
अधिवक्ता का कहना है कि इन निर्माणों के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं, यातायात प्रभावित होता है और बरसात के दौरान जल निकासी व्यवस्था बाधित होने से जलभराव की समस्या बढ़ जाती है। इसके साथ ही दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
स्वच्छता और धार्मिक गरिमा का भी उठाया मुद्दा
राम कुमार शर्मा ने अपने ज्ञापन में कहा कि सनातन संस्कृति और भारतीय परंपरा में स्वच्छता को विशेष महत्व दिया गया है। ऐसे में गंदे नालों के ऊपर या उनके किनारे धार्मिक स्थलों का होना धार्मिक गरिमा और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर अवैध धार्मिक ढांचों को हटाने के बजाय उनके आसपास या नीचे नालों का निर्माण कर उन्हें संरक्षित किया जा रहा है, जो न्यायालयों के निर्देशों और शासन की मंशा के विपरीत है।
प्रशासन से की ये प्रमुख मांगें
अधिवक्ता ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मेरठ नगर में सार्वजनिक भूमि पर बने सभी अवैध धार्मिक स्थलों का उच्च स्तरीय सर्वे कराया जाए। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के अनुरूप सभी धर्मों के मामलों में समान और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा यातायात, जल निकासी और सार्वजनिक सुरक्षा में बाधक अतिक्रमणों को प्राथमिकता के आधार पर हटाने, ऐसे अतिक्रमणों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा किसी भी प्रकार के राजनीतिक या सामाजिक दबाव से मुक्त होकर कार्रवाई करने की मांग भी की गई है।
कार्रवाई पर टिकी निगाहें
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार विभिन्न शहरों में अतिक्रमण हटाने, स्वच्छता सुधारने और शहरी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अभियान चला रही है। ऐसे में मेरठ में अवैध धार्मिक अतिक्रमणों को लेकर उठी यह मांग प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस ज्ञापन पर क्या रुख अपनाता है और शहर में सार्वजनिक भूमि पर बने कथित अवैध धार्मिक स्थलों को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।