GSTAT दिवस पर हुआ 'ई जनरल' का लोकार्पण
नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) दिवस गुरुवार को वर्चुअल वेब कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सादगीपूर्ण तरीके से मनाया गया। कार्यक्रम में GSTAT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डॉ. संजय कुमार मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। देशभर में स्थित GSTAT की विभिन्न पीठों के न्यायिक एवं तकनीकी सदस्यों ने ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान GSTAT के ई-जर्नल ‘आईएलआर GSTAT’ (ILR GSTAT) के प्रथम अंक का लोकार्पण किया गया। ई-जर्नल के माध्यम से जीएसटी से जुड़े अपीलीय मामलों, न्यायिक दृष्टिकोण और प्रक्रियात्मक पहलुओं को सामने लाने की दिशा में पहल की गई है। ई-जर्नल के प्रथम अंक का लोकार्पण कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।
जीएसटी अपीलीय न्यायशास्त्र पर तकनीकी सत्र
GSTAT दिवस के अवसर पर जीएसटी अपीलीय न्यायशास्त्र एवं प्रक्रियाओं से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में GSTAT की कार्यप्रणाली, कर निर्धारण से संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
विशेषज्ञों ने स्क्रूटनी के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों, प्रधान पीठ और राज्य पीठों के अधिकार क्षेत्र तथा सीजीएसटी अधिनियम की धारा 73 एवं 74 के तहत कर, ब्याज और जुर्माने के निर्धारण से संबंधित विषयों पर अपने विचार साझा किए।
प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों पर चर्चा
कार्यक्रम में प्राकृतिक न्याय एवं निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। वक्ताओं ने न्यायिक एवं अपीलीय प्रक्रिया में संबंधित पक्षों को उचित अवसर दिए जाने तथा पारदर्शी प्रक्रिया के महत्व पर विचार रखे।
इसके साथ ही GSTAT (प्रक्रिया) नियम, 2025 से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने अपीलीय व्यवस्था को प्रभावी बनाने और प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित करने से जुड़े विषयों पर अपने अनुभव और विचार साझा किए।
CESTAT से GSTAT तक अपीलीय व्यवस्था के विकास पर मंथन
तकनीकी सत्र में CESTAT से GSTAT तक अपीलीय व्यवस्था के विकास पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कर संबंधी विवादों के निस्तारण के लिए विकसित हुई अपीलीय व्यवस्था तथा GSTAT की भूमिका से जुड़े विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्टता, पारदर्शिता और प्रभावशीलता को बनाए रखते हुए कर विवादों के निस्तारण की व्यवस्था को किस प्रकार और मजबूत किया जा सकता है।
स्वागत भाषण से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ GSTAT के तकनीकी सदस्य (केंद्र) अनिल कुमार गुप्ता के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी न्यायिक एवं तकनीकी सदस्यों का स्वागत किया और GSTAT दिवस के आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
इसके बाद न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन ने मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने निर्धारित विषयों के विभिन्न कानूनी एवं न्यायिक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न तकनीकी एवं न्यायिक सदस्यों ने अपने-अपने निर्धारित विषयों पर विचार प्रस्तुत किए। वर्चुअल माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में देशभर की विभिन्न पीठों के सदस्यों की भागीदारी रही।
न्यायिक व्यवस्था को प्रभावी और पारदर्शी बनाने पर जोर
समापन संबोधन में GSTAT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डॉ. संजय कुमार मिश्रा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रेरणादायी पंक्तियों का उल्लेख करते हुए संस्थान के सदस्यों से चुनौतियों का सामना करते हुए सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर कार्य करना होगा। GSTAT की कार्यप्रणाली में बेहतर समन्वय और संस्थागत मजबूती के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।
संजय कुमार अग्रवाल ने किया संयोजन
कार्यक्रम का संयोजन GSTAT दिल्ली राज्य पीठ के उपाध्यक्ष संजय कुमार अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम का संचालन दिल्ली राज्य पीठ के तकनीकी सदस्य (राज्य) संजीव जैन ने किया।
अंत में दिल्ली पीठ के उपाध्यक्ष की ओर से धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही वर्चुअल वेब कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित GSTAT दिवस कार्यक्रम का समापन हुआ।