न्यूटीम हॉस्पिटल में प्रेस वार्ता करते डॉक्टर
मेरठ। न्यूट्रिमा अस्पताल के ईएनटी विभाग में दुर्लभ जन्मजात बीमारी कोएनल एट्रेसिया (Choanal Atresia) से पीड़ित एक मरीज का सफल एंडोस्कोपिक ऑपरेशन किया गया। इसके साथ ही अस्पताल में इस जटिल बीमारी का यह पांचवां सफल ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कोएनल एट्रेसिया एक जन्मजात विकार है, जिसमें नाक के पिछले भाग (Choana) का प्राकृतिक छिद्र जन्म से ही पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद होता है। यह बीमारी विशेष रूप से नवजात शिशुओं में गंभीर श्वसन समस्या उत्पन्न कर सकती है, इसलिए इसका समय पर निदान और विशेषज्ञ उपचार अत्यंत आवश्यक होता है।
इस जटिल सर्जरी की सफलता में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. सुमित उपाध्याय के साथ-साथ अस्पताल की नवजात एवं बाल रोग विशेषज्ञ टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ऑपरेशन से पहले तथा ऑपरेशन के बाद मरीज की संपूर्ण देखभाल नियोनेटोलॉजिस्ट एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित उपाध्याय के मार्गदर्शन में न्यूट्रिमा अस्पताल की विशेष नियोनेटल (NICU) टीम द्वारा की गई। विशेषज्ञ निगरानी, सतत मॉनिटरिंग और समुचित उपचार के कारण मरीज का ऑपरेशन एवं रिकवरी दोनों सफल रहे।
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. सुमित उपाध्याय ने कहा, “कोएनल एट्रेसिया एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और विशेषज्ञ उपचार से मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है। आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक और अनुभवी टीम के सहयोग से हम इस जटिल बीमारी का सफल उपचार कर रहे हैं।”
डॉ. अमित उपाध्याय, नियोनेटोलॉजिस्ट एवं शिशु रोग विशेषज्ञ ने कहा, “ऐसे नवजात एवं छोटे बच्चों में ऑपरेशन जितना महत्वपूर्ण होता है, उतनी ही महत्वपूर्ण ऑपरेशन से पहले और बाद की गहन चिकित्सा देखभाल होती है। न्यूट्रिमा अस्पताल की विशेष नियोनेटल टीम द्वारा मरीज की निरंतर निगरानी, श्वसन प्रबंधन और समुचित उपचार सुनिश्चित किया गया, जिससे मरीज का स्वास्थ्य तेजी से बेहतर हुआ।”
न्यूट्रिमा अस्पताल आधुनिक तकनीक, अनुभवी ईएनटी सर्जन, नियोनेटोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञों तथा प्रशिक्षित NICU टीम के समन्वित प्रयासों से दुर्लभ एवं जटिल जन्मजात रोगों के सफल उपचार के लिए निरंतर कार्यरत है।
[01/07, 16:24] I M A DR SUMIT UPADHYAY 1: कोएनल एट्रेसिया (Choanal Atresia) एक दुर्लभ लेकिन गंभीर जन्मजात बीमारी है। इसमें नाक के पिछले हिस्से (Choana) का प्राकृतिक मार्ग जन्म से ही हड्डी, झिल्ली या दोनों के कारण बंद होता है। इससे नाक से हवा फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाती।
बीमारी कितनी प्रचलित है?
- यह लगभग 5,000–8,000 जीवित जन्मों में 1 बच्चे में पाई जाती है।
- लड़कियों में यह लड़कों की तुलना में कुछ अधिक देखी जाती है।
- लगभग 60–70% मामलों में केवल एक नथुना प्रभावित होता है, जबकि 30–40% मामलों में दोनों नथुने बंद होते हैं।
यह बीमारी कितनी गंभीर है?
- दोनों नथुने बंद (Bilateral Choanal Atresia) होने पर यह नवजात शिशु के लिए मेडिकल इमरजेंसी होती है।
- जन्म के बाद शुरुआती दिनों में नवजात मुख्य रूप से नाक से ही सांस लेते हैं। यदि दोनों नाक के मार्ग बंद हों, तो शिशु को सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई, दूध पीने में परेशानी, शरीर में ऑक्सीजन की कमी (Hypoxia) और समय पर उपचार न मिलने पर जान का खतरा हो सकता है।
- ऐसे मामलों में तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सा, वायुमार्ग (Airway) की व्यवस्था और शीघ्र सर्जरी की आवश्यकता होती है।
- यदि केवल एक नथुना बंद हो
- कई बार बीमारी देर से पता चलती है।
- बच्चे या बड़े व्यक्ति में लगातार एक तरफ नाक बंद रहना, बार-बार साइनस संक्रमण, नाक से सांस लेने में कठिनाई, खर्राटे या दुर्गंधयुक्त स्राव जैसे लक्षण हो सकते हैं।
उपचार
इस बीमारी का सबसे प्रभावी उपचार एंडोस्कोपिक सर्जरी है, जिसमें बंद नाक के मार्ग को खोलकर सामान्य श्वास का रास्ता बनाया जाता है। सफल उपचार के लिए ईएनटी सर्जन, नियोनेटोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ और NICU टीम का समन्वित प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
डॉ. सुमित उपाध्याय का संदेश:
“कोएनल एट्रेसिया एक दुर्लभ लेकिन गंभीर जन्मजात बीमारी है। यदि नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद सांस लेने या दूध पीने में कठिनाई हो, तो इसे सामान्य समस्या समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। समय पर सही जांच और विशेषज्ञ उपचार से अधिकांश बच्चों का सफल इलाज संभव है और वे सामान्य जीवन जी सकते हैं।”
प्रेस वार्ता संदेश हैं:
“कोएनल एट्रेसिया एक दुर्लभ लेकिन गंभीर जन्मजात बीमारी है। पहले ऐसे बच्चों में मृत्यु का जोखिम अधिक था, लेकिन आज आधुनिक एंडोस्कोपिक सर्जरी, NICU सुविधाओं और अनुभवी नियोनेटोलॉजिस्ट तथा; ईएनटी विशेषज्ञों की संयुक्त देखभाल से अधिकांश बच्चों का सफल उपचार संभव है। समय पर पहचान और सही उपचार ही बच्चे की जान बचाने की कुंजी है।”