राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर सी एम ओ रमाकांत सागर को सम्मानित करते आयोजक
मेरठ। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय एवं वेंक्टेश्वरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (VIMS) में “Who Heal the Healers” विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार, चिकित्सक सम्मान समारोह तथा ‘टीबी मुक्त भारत’ एवं देश सेवा शपथ समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सा सेवा, राष्ट्र निर्माण और जनस्वास्थ्य में चिकित्सकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही चिकित्सकों और मेडिकल विद्यार्थियों को मानव सेवा तथा टीबी उन्मूलन के लिए सक्रिय योगदान देने का संकल्प दिलाया गया।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. सी.वी. रमन सभागार में किया गया। शुभारंभ प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी, कुलपति प्रो. कृष्ण कान्त दवे, मुख्य अतिथि एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमाकान्त सागर, डीन मेडिकल डॉ. प्रभु एम.एच., एडिशनल मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अमित जैन तथा डॉ. वी.पी. सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एवं सीएमओ डॉ. रमाकान्त सागर ने कहा कि चिकित्सक केवल बीमारियों का उपचार ही नहीं करते, बल्कि समाज को स्वस्थ और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान चिकित्सकों ने दिन-रात अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों की सेवा की, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि वेंक्टेश्वरा मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक, मेडिकल छात्र, जिला स्वास्थ्य समिति और उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मिलकर ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान को सफल बनाने के लिए समन्वित रूप से कार्य करेंगे।
प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी ने कहा कि चिकित्सक केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विकसित भारत-2047 के निर्माण की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ भारत और आयुष्मान भारत” की परिकल्पना को साकार किए बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने समाज से चिकित्सकों के प्रति सम्मान और विश्वास बनाए रखने की भी अपील की।
इस अवसर पर वेंक्टेश्वरा समूह के संस्थापक अध्यक्ष श्री सुधीर गिरि ने कहा कि चिकित्सक केवल मरीजों का इलाज नहीं करते, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। स्वस्थ नागरिक ही सशक्त और विकसित भारत की पहचान होते हैं, इसलिए चिकित्सा क्षेत्र का योगदान अमूल्य है।
कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों, मेडिकल विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों को मानव सेवा, राष्ट्र सेवा तथा ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान में सक्रिय भागीदारी की शपथ दिलाई गई। इसके अलावा विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर चिकित्सक दिवस समारोह को यादगार बना दिया।
समारोह में उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं देने वाले चिकित्सकों को शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक विशेषज्ञ चिकित्सकों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विशाल, डिप्टी सीएमओ डॉ. योगेन्द्र, एडिशनल सीएमओ डॉ. भास्कर, डॉ. बी.एस. त्यागी, डॉ. रमाशंकर, डॉ. जरीन अफरोज, डॉ. गरिमा भटनागर, डॉ. महंतेश, डॉ. शशीधरन, डॉ. श्रीकृष्ण, डॉ. मनीष तोमर, डॉ. वर्षोधरा, डॉ. प्रज्ञा कुशवाहा, डॉ. अरुण कुमार गोस्वामी, डॉ. रूचि चौधरी, डॉ. सुप्रीति भटनागर, डॉ. सची अहलावत, डॉ. नौशाद, डॉ. वीरेन्द्र, डॉ. रूचि पटवर्द्धन, डॉ. पंकज सिंह सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक, मेडिकल विद्यार्थी, फैकल्टी सदस्य और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय विश्वविद्यालय प्रशासन और मीडिया प्रभारी विश्वास राणा द्वारा किया गया।
चिकित्सक दिवस के इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि चिकित्सा सेवा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। साथ ही ‘टीबी मुक्त भारत’ जैसे राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने के लिए चिकित्सा संस्थानों, स्वास्थ्य विभाग और समाज के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।