कमिश्नरी पार्क पर किसान आंदोलन को संबोधित करते राकेश टिकैत
मेरठ। किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की ओर से मेरठ में शुरू किया गया किसान मजदूर महापंचायत और कमिश्नरी घेराव आंदोलन मंगलवार को पहले दिन लगातार जारी रहा। कमिश्नरी पार्क में बड़ी संख्या में किसान और ट्रैक्टर पहुंचने से क्षेत्र में हलचल बनी रही। भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने आंदोलन को तीन दिन तक जारी रखने का ऐलान किया है। संगठन की ओर से दावा किया गया है कि आंदोलन में करीब पांच हजार ट्रैक्टरों को जुटाया जाएगा।
कमिश्नरी पार्क में किसानों का जमावड़ा
एक सितंबर को आयोजित महापंचायत के लिए सुबह से ही अलग-अलग क्षेत्रों से किसान ट्रैक्टर लेकर कमिश्नरी पार्क की ओर पहुंचते रहे। कई ट्रैक्टरों पर तिरंगा लगाया गया। भाकियू की ओर से किसानों के लिए लंगर और भंडारे की व्यवस्था भी किए जाने की बात कही गई है। किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की ओर से भी सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं।

तीन दिन तक जारी रहेगा धरना
भाकियू नेताओं के अनुसार यह आंदोलन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है। आज धरने का प्रथम दिवस है और धरना लगातार जारी रहेगा। आंदोलन को तीन दिन तक चलाने का निर्णय लिया गया है। संगठन ने किसानों से अधिक से अधिक संख्या में धरनास्थल पर पहुंचने और आंदोलन को मजबूत बनाने की अपील की है। नेताओं का कहना है कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए जरूरत पड़ने पर आंदोलन को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
खाद, गन्ना भुगतान और बिजली समेत कई मुद्दे
भाकियू की ओर से किसानों की प्रमुख समस्याओं में खाद की उपलब्धता, समितियों पर खाद वितरण में कथित अनियमितता, अधिक ब्याज वसूली, गन्ने का भुगतान, बिजली के बढ़े हुए लोड, गलत बिजली बिल और पेनल्टी जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है। संगठन का आरोप है कि कई किसानों को घरेलू बिजली कनेक्शन और लोड से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सिंचाई से जुड़ी समस्याओं के समाधान की भी मांग की जा रही है।

नगर निगम सीमा में शामिल गांवों की समस्याएं भी उठीं
भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने आंदोलन से पहले नगर निगम सीमा में शामिल गांवों में किसानों के साथ बैठकें की थीं। जाटोली, नंगलाताशी, दयामपुर, डाबका, रजपुरा और सरूरपुर क्षेत्र में हुई बैठकों में ग्रामीणों ने जलभराव, नालों की सफाई, विकास कार्यों में कथित उपेक्षा और हाउस टैक्स से जुड़ी समस्याएं बताईं।
किसानों का कहना है कि नगर निगम सीमा में शामिल होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में हाउस टैक्स का बोझ बढ़ा है। कुछ स्थानों पर साल में दो बार हाउस टैक्स वसूले जाने और कथित रूप से अधिक बिल भेजे जाने की शिकायतें भी आंदोलन के दौरान उठाई गईं। डीएफसीसी रेलवे के पुलों के नीचे जलभराव के कारण आवागमन प्रभावित होने की समस्या भी प्रमुखता से रखी गई।
अनुराग चौधरी ने गांव-गांव किया संपर्क
महापंचायत को सफल बनाने के लिए भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने पिछले दिनों शहरी सीमा में आने वाले गांवों में किसानों से संपर्क किया। बैठकों के दौरान स्थानीय समस्याओं की जानकारी लेने के साथ किसानों से एकजुट होकर एक सितंबर की महापंचायत में पहुंचने की अपील की गई। संगठन की ओर से करीब पांच हजार ट्रैक्टरों के पहुंचने का दावा किया गया है।
मंच से राकेश टिकैत ने उठाया जमीन और किसान हितों का मुद्दा
महापंचायत के दौरान भाकियू नेता राकेश टिकैत ने किसानों की जमीन, खेती की आर्थिक स्थिति और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते औद्योगिक एवं शहरी विस्तार को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी जमीन बचाने और संगठन को मजबूत करने की जरूरत है। टिकैत ने ट्रैक्टर आंदोलन को किसानों और युवा पीढ़ी को खेती तथा जमीन से जोड़ने का माध्यम बताया।

अपने भाषण में उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन एवं सरकार के स्तर पर प्रभावी बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने किसानों से संगठन को गांव-गांव मजबूत करने का आह्वान किया।
अनुराग चौधरी ने प्रशासनिक समस्याओं का मुद्दा उठाया
भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने अपने संबोधन में किसानों और ग्रामीणों की विभिन्न प्रशासनिक समस्याओं का उल्लेख किया। उन्होंने अधिकारियों से किसानों की समस्याओं पर सीधे संवाद करने की मांग की। बिजली के बढ़े लोड, प्रमाणपत्रों से संबंधित समस्याओं, ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत सुविधाओं तथा किसानों से जुड़े अन्य मामलों को लेकर उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाए।
उन्होंने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने और किसानों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही। उनके अनुसार संगठन की ओर से गांव-गांव जाकर ट्रैक्टर प्रमुखों और किसान कार्यकर्ताओं को आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
तीन दिन के आंदोलन पर प्रशासन की नजर
किसानों के तीन दिन तक धरना जारी रखने के ऐलान के बाद प्रशासन की नजर आंदोलन की गतिविधियों पर बनी हुई है। कमिश्नरी क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की गई है और यातायात को व्यवस्थित रखने के लिए आवश्यक रूट डायवर्जन किया गया है। अधिकारियों की ओर से लगातार स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।
शाम को कमिश्नर से प्रतिनिधिमंडल की वार्ता
इसी बीच शाम के समय भाकियू के प्रतिनिधिमंडल की कमिश्नर के साथ वार्ता भी प्रस्तावित/जारी है। प्रतिनिधिमंडल की ओर से किसानों की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा जा रहा है। वार्ता में किन मुद्दों पर चर्चा होती है और प्रशासन की ओर से क्या आश्वासन दिया जाता है, इस पर किसानों और संगठन की नजर बनी हुई है।
किसान संगठनों का कहना है कि यदि वार्ता में समस्याओं के समाधान को लेकर ठोस आश्वासन मिलता है तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। वहीं, मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में तीन दिवसीय धरना जारी रखने और आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी भी संगठन की ओर से दी गई है।
पहले दिन से ही आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार
फिलहाल कमिश्नरी पार्क में किसानों का धरना लगातार जारी है। ट्रैक्टरों और किसानों की मौजूदगी से आंदोलन का स्वरूप बड़ा दिखाई दे रहा है। अब सभी की नजर शाम की प्रशासनिक वार्ता और अगले दो दिनों में भाकियू की रणनीति पर है। आज आंदोलन का पहला दिन है और संगठन के अनुसार अगले दो दिनों तक भी धरना जारी रहेगा।