मेरठ कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य अतिथि को सम्मानित करते आयोजक मंडल
मेरठ, 8 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विशेष रूप से शारीरिक शिक्षा और खेलों के क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं। अब शारीरिक शिक्षा केवल खेल गतिविधियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि बहुविषयक शिक्षा प्रणाली के माध्यम से विद्यार्थियों को शैक्षणिक विकास, खेल प्रशिक्षण और करियर निर्माण के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। यह विचार राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र के प्रोफेसर अनिल करवंदे ने मेरठ कॉलेज में आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में व्यक्त किए।
गुरुवार को मेरठ कॉलेज के शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शारीरिक शिक्षा और खेल : चुनौतियां एवं अवसर’ विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत शारीरिक शिक्षा की बदलती भूमिका, खेलों के महत्व और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
बहुविषयक शिक्षा से शारीरिक शिक्षा को मिलेगी नई पहचान : प्रो. अनिल करवंदे
सेमिनार के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अनिल करवंदे ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा के पारंपरिक वर्गीकरण को समाप्त करते हुए बहुविषयक शिक्षा प्रणाली को प्रोत्साहित किया है। इससे शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हुई हैं।
उन्होंने कहा कि पहले शिक्षा को मुख्य रूप से कला, विज्ञान और वाणिज्य जैसे अलग-अलग विषयों में विभाजित करके देखा जाता था, लेकिन नई शिक्षा नीति ने इन सीमाओं से आगे बढ़कर विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों का अध्ययन करने के अवसर प्रदान किए हैं।
प्रो. करवंदे ने बताया कि इस बदलाव का लाभ शारीरिक शिक्षा और खेलों से जुड़े विद्यार्थियों को भी मिलेगा। अब विद्यार्थी अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विभिन्न विषयों के साथ शारीरिक शिक्षा का अध्ययन कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और व्यक्तित्व विकास को भी सुनिश्चित करना है। इस दृष्टि से शारीरिक शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
भारतीय पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने पर दिया जोर
प्रो. अनिल करवंदे ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा और पारंपरिक खेलों को दिए गए महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारत की अपनी समृद्ध खेल परंपरा रही है। नई शिक्षा नीति में शारीरिक शिक्षा, खेल गतिविधियों और भारतीय पारंपरिक खेलों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराने के साथ-साथ खेलों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को खेलों के प्रति जागरूक करने और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षण संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। शारीरिक शिक्षा को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
शारीरिक शिक्षा को केवल खेल तक सीमित न समझें : प्रो. केशव सिंह गुर्जर
सेमिनार के द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के प्रोफेसर केशव सिंह गुर्जर ने शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में अपने लगभग पांच दशक के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए।
उन्होंने कहा कि शारीरिक शिक्षा एक व्यापक शैक्षणिक विषय है, जिसे केवल मैदान में खेल गतिविधियों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इसके सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक दोनों पक्ष समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
प्रो. गुर्जर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शारीरिक शिक्षा में बेहतर भविष्य बनाने के लिए नियमित अध्ययन, अनुशासन, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कक्षाओं में सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शारीरिक शिक्षा के विभिन्न पहलुओं को गंभीरता से समझें और अपने ज्ञान तथा कौशल को निरंतर विकसित करें।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में करियर की नई संभावनाओं को समझने के लिए विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
विद्यार्थियों के भविष्य और करियर की संभावनाओं पर हुई चर्चा
राष्ट्रीय सेमिनार में विशेषज्ञों ने शारीरिक शिक्षा और खेलों के क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसरों तथा भविष्य की संभावनाओं पर भी विचार रखे।
वक्ताओं ने बताया कि बदलती शिक्षा व्यवस्था में शारीरिक शिक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे विषय के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ खेलों से जुड़ी व्यावहारिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी करें।
सेमिनार में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी होनी चाहिए, ताकि वे अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार शैक्षणिक एवं व्यावसायिक भविष्य की दिशा निर्धारित कर सकें।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को नियमित कक्षाओं में उपस्थित रहने, खेल प्रशिक्षण में भाग लेने और विषय से संबंधित ज्ञान को विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
प्राचार्य प्रो. नीरज कुमार और प्रो. अनीता मलिक ने की सत्रों की अध्यक्षता
राष्ट्रीय सेमिनार के प्रथम सत्र की अध्यक्षता मेरठ कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर नीरज कुमार ने की, जबकि द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डीन स्टूडेंट प्रोफेसर अनीता मलिक ने की।
कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर योगेश कुमार ने किया। उन्होंने सेमिनार की विभिन्न गतिविधियों का संचालन करते हुए वक्ताओं और प्रतिभागियों के बीच संवाद स्थापित कराया।
शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, मुख्य वक्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने राष्ट्रीय सेमिनार में विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए विचारों को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया।
छात्र-छात्राओं ने विशेषज्ञों से पूछे सवाल, जिज्ञासाओं का हुआ समाधान
सेमिनार के अंतिम चरण में छात्र-छात्राओं के लिए प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, शारीरिक शिक्षा के भविष्य, खेल प्रशिक्षण और करियर की संभावनाओं से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे।
मुख्य वक्ताओं प्रो. अनिल करवंदे और प्रो. केशव सिंह गुर्जर ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का विस्तार से समाधान किया।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अध्ययन, अनुशासन और व्यावहारिक प्रशिक्षण को महत्व देने की सलाह दी।
प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को नई शिक्षा नीति के अंतर्गत शारीरिक शिक्षा की उपयोगिता और संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।
सेमिनार में बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी रहे उपस्थित
मेरठ कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य नियंता प्रोफेसर पवन, आईक्यूएसी समन्वयक प्रोफेसर अर्चना सिंह, प्रेस प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी प्रोफेसर चंद्रशेखर भारद्वाज, प्रोफेसर मनोज सिवाच, प्रोफेसर पंजाब सिंह मलिक, डॉ. पंकज भारती, डॉ. विनय आर्य, डॉ. विपिन चौधरी, डॉ. संदीप सिंह और डॉ. वंशिका सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत शारीरिक शिक्षा और खेलों की बदलती भूमिका पर सार्थक चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों की जानकारी देते हुए शैक्षणिक और व्यावहारिक दक्षता विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
मेरठ कॉलेज के शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सेमिनार में विद्यार्थियों को खेल और शिक्षा के बीच बढ़ते समन्वय तथा भविष्य की संभावनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।