आरजीपीजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं ने ग्रामीण मूल्यों के बारे में जानकारी ली
मेरठ। रघुनाथ गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, मेरठ के समाजशास्त्र विभाग एवं समाजशास्त्र संघ द्वारा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) तथा भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परंपरा और ग्रामीण विकास” विषय पर एक प्रेरणादायी अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा, ग्रामीण जीवन के मूल्यों तथा सतत विकास की अवधारणा से परिचित कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं इस्माईल नेशनल महिला पीजी कॉलेज की समाजशास्त्र विभाग की प्रोफेसर दीप्ति कौशिक के स्वागत के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी ने की। इस अवसर पर महाविद्यालय की शिक्षिकाओं, शोधार्थियों एवं बड़ी संख्या में छात्राओं ने सहभागिता की।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल इतिहास का विषय नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य के निर्माण का भी मजबूत आधार है। उन्होंने परास्नातक की छात्राओं को वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, भारतीय दर्शन और अन्य प्राचीन ग्रंथों का गंभीर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इन ग्रंथों में निहित जीवन मूल्य, नैतिकता और सामाजिक चेतना आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी प्राचीन काल में थीं।
उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति, ग्रामीण परंपराओं और लोकज्ञान को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य करें, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके और भारतीय ज्ञान परंपरा का संरक्षण एवं संवर्धन हो सके।
मुख्य वक्ता प्रो. दीप्ति कौशिक ने अपने व्याख्यान में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल प्राचीन धार्मिक या दार्शनिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय जीवन का व्यापक एवं समृद्ध आधार है। उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, अर्थशास्त्र, कृषि विज्ञान, आयुर्वेद, योग और लोकज्ञान जैसी परंपराएं आज भी मानव जीवन को संतुलित, समावेशी और सतत विकास की दिशा प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की ग्रामीण संस्कृति सदैव भारतीय ज्ञान परंपरा का केंद्र रही है। आत्मनिर्भरता, सामुदायिक सहयोग, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग, जैविक खेती, जल संरक्षण, पंचायती व्यवस्था, लोककला तथा कुटीर उद्योग जैसे अनेक आयाम भारतीय ग्रामीण जीवन की विशेष पहचान हैं। वर्तमान समय में जब विश्व स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को महत्व दिया जा रहा है, तब भारतीय ज्ञान परंपरा की उपयोगिता और अधिक बढ़ गई है।
प्रो. दीप्ति कौशिक ने छात्राओं से कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय परंपरागत ज्ञान का समन्वय समय की आवश्यकता है। यदि युवा पीढ़ी भारतीय ज्ञान-विज्ञान, लोकपरंपराओं और ग्रामीण विकास के सिद्धांतों को आत्मसात करेगी, तो वह समाज और राष्ट्र के विकास में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगी।
कार्यक्रम की संयोजिका मेजर प्रो. अंजुला राजवंशी रहीं। उन्होंने कार्यक्रम का संचालन करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला तथा अतिथि वक्ता का परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सह-संयोजिका प्रो. रजनी श्रीवास्तव एवं प्रो. मंजुलता का विशेष योगदान रहा।
समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. अनु रस्तोगी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना नहीं बल्कि ज्ञान अर्जित करना, उसे समझना और समाज के हित में उसका उपयोग करना है। उन्होंने छात्राओं को नियमित अध्ययन, शोध और भारतीय सामाजिक परंपराओं के गहन अध्ययन के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में शोध छात्रा अतिका एवं नईमा, छात्राएं राधिका शर्मा, शाजिया सहित अन्य छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम के आयोजन में सविता एवं शशि का भी विशेष सहयोग रहा।
व्याख्यान के दौरान छात्राओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण, लोकज्ञान और सामाजिक परिवर्तन से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए तथा विशेषज्ञों से संवाद स्थापित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका के प्रति प्रेरित करना था।
महाविद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं वैचारिक कार्यक्रम छात्राओं के व्यक्तित्व विकास, शोध अभिरुचि और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम के अंत में अतिथि वक्ता का आभार व्यक्त किया गया तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, ग्रामीण विकास के प्रति जागरूकता और समाजोपयोगी शिक्षा को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।