मेट्रो प्लाजा स्थित एक होटल में पत्रकार वार्ता करते कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे
मेरठ। मेरठ के ग्रैंड एलोरा रेस्टोरेंट, मेट्रो प्लाजा में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व मीडिया विभाग अध्यक्ष एवं वर्तमान राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि भगवान श्रीराम के नाम पर देशभर के श्रद्धालुओं से एकत्र किए गए चंदे और चढ़ावे के संबंध में गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं तथा पूरे मामले की सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
पत्रकार वार्ता में अभय दुबे ने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन के नाम पर देशभर से श्रद्धालुओं, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और मध्यम वर्ग के लोगों ने अपनी श्रद्धा के साथ आर्थिक सहयोग दिया, लेकिन अब उस धन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा विषय है। कांग्रेस का आरोप है कि यदि ट्रस्ट के कामकाज में सब कुछ पारदर्शी था, तो शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफों की आवश्यकता क्यों पड़ी और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने से परहेज क्यों किया जा रहा है।
कांग्रेस ने उठाए कई सवाल
अभय दुबे ने पत्रकार वार्ता के दौरान केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कई प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि यदि ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की देखरेख में हुआ था, तो कथित अनियमितताओं की जवाबदेही कौन लेगा। उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि सब कुछ सही था तो ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए।
उन्होंने कहा कि मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार ट्रस्ट के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और अन्य मामलों को लेकर कई प्रकार की चर्चाएं सामने आई हैं। कांग्रेस का कहना है कि इन सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि देश के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
प्राण प्रतिष्ठा और अन्य आयोजनों के खर्च का भी उल्लेख
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि राम मंदिर से जुड़े विभिन्न आयोजनों के खर्च और वित्तीय लेनदेन की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप सामने आए हैं तो केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि शीर्ष स्तर की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कथित फर्जी रसीदों, नकद चढ़ावे, लेखा-जोखा और वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो स्वतंत्र जांच से किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस की ओर से निम्न प्रमुख मांगें रखी गईं—
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करें।
- कथित रूप से जिम्मेदार बताए जा रहे व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
- पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक एजेंसी से कराई जाए।
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन, चढ़ावे, भूमि खरीद, आयोजनों और अन्य खर्चों का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
- जांच पूरी होने तक ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
अभय दुबे ने कहा कि भगवान श्रीराम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि पूरे देश की आस्था के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए धन के उपयोग को लेकर कोई संदेह उत्पन्न हुआ है तो उसे पूरी पारदर्शिता के साथ दूर किया जाना चाहिए।
कई कांग्रेस नेता रहे मौजूद
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा, कांग्रेस प्रवक्ता हरिकिशन वर्मा, पूर्व जिला अध्यक्ष अवनीश काजल, पूर्व शहर अध्यक्ष जाहिद अंसारी, प्रदेश प्रवक्ता अभिमन्यु त्यागी, धूम सिंह गुर्जर, सलीम खान, राकेश कुशवाहा, रमाकांत शर्मा, संजय कटारिया, कमल जायसवाल, यासर सैफी, चौधरी शमसुद्दीन, विनोद सोनकर, विजय चिकारा, अवनीश पवार, के.डी. शर्मा सहित कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।