डॉ प्रिंसराज की बनाई कलाकृति के बारे में चर्चा करती अभिनेत्री हेमामालिनी
मथुरा। गीता शोध संस्थान, मथुरा में आयोजित तीन दिवसीय ‘श्रीकृष्ण राष्ट्रीय कला कार्यशाला’ का समापन समारोह कलाकारों के लिए विशेष रूप से गौरवपूर्ण रहा। कार्यशाला में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए करीब 20 चित्रकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज संस्कृति से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को अपनी-अपनी विशिष्ट कला शैलियों के माध्यम से कैनवास पर जीवंत रूप प्रदान किया। कलाकारों ने माखन चोरी, राधा-कृष्ण प्रेम, गौ-प्रेम, बांसुरी वादन, बालकृष्ण के वात्सल्य और गिरिराज धारण जैसे प्रसंगों को अपनी कलात्मक दृष्टि से प्रस्तुत किया।

हेमामालिनी ने कलाकारों की कलाकृतियों का किया अवलोकन
समापन समारोह की मुख्य अतिथि सांसद एवं प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमामालिनी ने कार्यशाला में प्रदर्शित सभी कलाकारों की कलाकृतियों का अवलोकन किया। उन्होंने कलाकारों से उनकी रचनाओं के विषय, भाव, कला शैली और कलाकृति के पीछे की कल्पना के बारे में विस्तार से जानकारी ली। कलाकारों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण और ब्रज संस्कृति से जुड़े प्रसंगों को अलग-अलग कलात्मक शैलियों में प्रस्तुत करने के प्रयास की उन्होंने सराहना की।
‘मुरली मनोहर कान्हा’ कलाकृति ने खींचा विशेष ध्यान
इसी दौरान राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार, मूर्तिकार एवं चित्रकार डॉ. प्रिंस राज की कलाकृति ‘मुरली मनोहर कान्हा’ ने सांसद हेमामालिनी का विशेष ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने इस कलाकृति को काफी रुचि के साथ देखा और उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। कलाकृति के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप और उनकी लीलाओं को प्रस्तुत किए जाने की उन्होंने विशेष सराहना की।

ब्रज की कृष्ण लीलाओं को कला के माध्यम से समाज तक पहुंचाने पर जोर
हेमामालिनी ने कहा कि ब्रज की धरती भगवान श्रीकृष्ण की अनगिनत लीलाओं की साक्षी रही है। इन लीलाओं को कला के माध्यम से समाज तक पहुंचाने का प्रयास महत्वपूर्ण और सराहनीय है। उन्होंने कहा कि कलाकारों को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं, ब्रज की संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को समाज तक पहुंचाने का प्रयास निरंतर जारी रखना चाहिए।
डॉ. प्रिंस राज ने जताया आभार
अपनी कलाकृति की सराहना किए जाने पर डॉ. प्रिंस राज ने कहा कि हेमामालिनी जैसी प्रतिष्ठित कलाकार एवं जनप्रतिनिधि के हाथों सम्मान और अपनी कलाकृति की प्रशंसा प्राप्त होना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य और गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि ‘मुरली मनोहर कान्हा’ की हेमामालिनी द्वारा की गई सराहना उनके लिए विशेष रूप से प्रेरणादायी है और इससे भविष्य में और बेहतर कला-सृजन करने की प्रेरणा मिली है।

श्रीकृष्ण की लीलाओं को चित्रों में अभिव्यक्त करना श्रद्धा का माध्यम
डॉ. प्रिंस राज ने कहा कि ब्रज की पावन धरती पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करना उनके लिए केवल कला-सृजन तक सीमित नहीं है। यह उनके लिए ब्रज संस्कृति, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा को अभिव्यक्त करने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि ब्रज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को कला के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में इस प्रकार के आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कलाकारों ने विभिन्न कृष्ण लीलाओं को कैनवास पर उतारा
तीन दिवसीय कार्यशाला में शामिल कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को अपनी-अपनी कला शैलियों में प्रस्तुत किया। किसी कलाकार ने बालकृष्ण के वात्सल्य भाव को उकेरा तो किसी ने माखन चोरी और रासभाव को अपनी रचना का विषय बनाया। वहीं गिरिराज धारण, गौ-प्रेम और बांसुरी वादन जैसे प्रसंग भी कलाकारों की रचनाओं में देखने को मिले। इन कलाकृतियों के माध्यम से ब्रज की सांस्कृतिक विविधता और श्रीकृष्ण की लीलाओं के विभिन्न भावों को सामने लाने का प्रयास किया गया।

आयोजकों ने कलाकारों का जताया आभार
समापन समारोह के अवसर पर ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अधिकारियों ने कार्यशाला में शामिल सभी कलाकारों का आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कला आयोजन कलाकारों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ ब्रज की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करते हैं।
देश-दुनिया तक पहुंचे ब्रज की कला और संस्कृति का संदेश
डॉ. प्रिंस राज ने गीता शोध संस्थान, ब्रज तीर्थ विकास परिषद और कार्यशाला के आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कला आयोजनों से कलाकारों को ब्रज की संस्कृति और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को कला के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर मिलता है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।