पूर्व मंत्री पं सुनील भराला
मेरठ। जम्मू-कश्मीर को लेकर संयुक्त राष्ट्र की ओर से हाल ही में की गई टिप्पणी पर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुनील भराला ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के बयान को भारत की संप्रभुता और आंतरिक मामलों में अनावश्यक टिप्पणी बताते हुए इसका स्पष्ट शब्दों में विरोध किया। सुनील भराला ने कहा कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35A को हटाने का निर्णय भारत की संसद द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया था। यह भारत का आंतरिक विषय है और इसमें किसी बाहरी संस्था अथवा देश के हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत एक मजबूत और जीवंत लोकतंत्र है, जहां संविधान और न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं। जम्मू-कश्मीर में पिछले वर्षों के दौरान विकास, बुनियादी ढांचे, सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में हुई प्रगति को सकारात्मक परिणाम के रूप में देखा जाना चाहिए।
आतंकवाद और सीमा पार हिंसा पर भी ध्यान दे UN
पूर्व मंत्री सुनील भराला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर टिप्पणी करने से पहले संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद, सीमा पार से होने वाली हिंसा तथा निर्दोष नागरिकों पर होने वाले हमलों जैसे गंभीर मुद्दों पर भी समान गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से आतंकवाद की चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे में वैश्विक समुदाय से अपेक्षा है कि वह आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट, निष्पक्ष और प्रभावी भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में शांति स्थापित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए।
भारत-पाकिस्तान के बीच मुद्दों के द्विपक्षीय समाधान पर जोर
सुनील भराला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत की नीति लंबे समय से स्पष्ट रही है। भारत का मानना है कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित विषय भारत के आंतरिक मामलों से जुड़े हैं। वहीं भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी लंबित विषय का समाधान दोनों देशों के बीच हुए समझौतों और द्विपक्षीय प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच से भारत की संप्रभुता और संवैधानिक व्यवस्था पर सवाल उठाने अथवा हस्तक्षेप करने का प्रयास स्वीकार्य नहीं हो सकता।
‘भारत की एकता और अखंडता सर्वोपरि’
भाजपा नेता ने कहा कि भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता सर्वोपरि है। देश की संसद द्वारा लिए गए संवैधानिक निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत अपने आंतरिक मामलों और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम है। सुनील भराला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और नागरिकों की सुरक्षा भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ऐसे संवेदनशील विषयों पर टिप्पणी करते समय तथ्यों, भारत की संवैधानिक व्यवस्था और आतंकवाद से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों को भी ध्यान में रखेंगी। उन्होंने एक बार फिर कहा कि भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।