दिल्ली स्थित संसद भवन क्षेत्र में एल एल बी छात्रों ने किया शैक्षणिक भ्रमण
72 एलएल.बी. विद्यार्थियों ने करीब से समझी न्यायिक प्रक्रिया, सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली और कानून की बदलती यात्रा
मेरठ। मेरठ कॉलेज, मेरठ के विधि विभाग की ओर से एलएल.बी. के छात्र-छात्राओं के लिए देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली का शैक्षणिक एवं व्यावहारिक भ्रमण आयोजित किया गया। कई वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण को लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाए जाने वाले सैद्धांतिक विधिक ज्ञान के साथ न्यायिक प्रक्रिया और उसके व्यावहारिक स्वरूप से परिचित कराना रहा।
इस भ्रमण में कुल 72 विधि विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों को सर्वोच्च न्यायालय के वातावरण को करीब से देखने और उस न्यायिक व्यवस्था को समझने का अवसर मिला, जहां देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं विधिक मामलों पर सुनवाई होती है और शीर्ष न्यायाधीश एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कानून के विभिन्न पहलुओं पर विचार करते हैं।
किताबों से निकलकर न्याय व्यवस्था को समझने का मिला अवसर
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को न्यायालय की कार्यप्रणाली, न्यायिक प्रक्रिया, अधिवक्ताओं की भूमिका और कानून के व्यावहारिक पक्षों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। विधि के विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उन्हें कक्षा में पढ़े गए विभिन्न कानूनी सिद्धांतों को न्यायिक संस्थान के वास्तविक वातावरण से जोड़कर समझने का अवसर मिला।
विद्यार्थियों ने न्याय व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को करीब से देखा और यह समझने का प्रयास किया कि न्यायालयों में कानूनी प्रावधानों, संवैधानिक सिद्धांतों और न्यायिक प्रक्रियाओं का व्यवहारिक रूप किस प्रकार सामने आता है।
जानकारीपरक वीडियो के माध्यम से समझी न्याय व्यवस्था की यात्रा
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने एक विशेष जानकारीपरक वीडियो फिल्म भी देखी। इसके माध्यम से उन्हें भारतीय न्याय व्यवस्था और सर्वोच्च न्यायालय की ऐतिहासिक यात्रा, उसके क्रमिक विकास तथा वर्तमान आधुनिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) युग तक हुए बदलावों के बारे में जानकारी दी गई।
वीडियो प्रस्तुति विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक रही। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि समय के साथ तकनीक, सामाजिक आवश्यकताओं और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप देश की न्याय व्यवस्था भी निरंतर विकसित होती रही है।
सर्वोच्च न्यायालय की नवसुसज्जित लाइब्रेरी का भी किया अवलोकन
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने सर्वोच्च न्यायालय की नवसुसज्जित लाइब्रेरी का भी अवलोकन किया। विद्यार्थियों को वहां उपलब्ध विधिक साहित्य, शोध सामग्री और आधुनिक संसाधनों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई।
विधि के विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी का भ्रमण विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि उच्च स्तरीय विधिक अध्ययन और शोध के लिए किस प्रकार के संसाधनों और संदर्भ सामग्री का उपयोग किया जाता है। विद्यार्थियों ने इस अनुभव को अपने विधिक अध्ययन और भविष्य के पेशेवर जीवन के लिए उपयोगी बताया।
विद्यार्थियों ने अनुभव को बताया यादगार
सर्वोच्च न्यायालय के भ्रमण के बाद विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। विद्यार्थियों ने कहा कि कक्षा में कानून की पढ़ाई के दौरान जिन न्यायिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं के बारे में अध्ययन किया जाता है, उन्हें वास्तविक वातावरण में देखना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण अनुभव रहा।
विद्यार्थियों के अनुसार इस भ्रमण से उन्हें न केवल न्यायिक व्यवस्था को समझने में मदद मिली, बल्कि भविष्य में विधि के क्षेत्र में करियर को लेकर उनकी समझ भी अधिक स्पष्ट हुई। उन्होंने पूरे अनुभव को अपने विधिक अध्ययन और भावी व्यावसायिक जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी और स्मरणीय बताया।
प्राचार्य के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ भ्रमण
यह शैक्षणिक भ्रमण मेरठ कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) युधवीर सिंह के मार्गदर्शन तथा विधि विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) प्रवीण दुबलिश की पहल एवं संयोजन में आयोजित किया गया।
भ्रमण कार्यक्रम में प्रो. एम.पी. वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके साथ प्रो. अनुराग सिंह, प्रो. द्वारिका प्रसाद, डॉ. कौशल प्रताप सिंह और प्रो. डी.एन. द्विवेदी सहित विधि विभाग के अन्य शिक्षक भी उपस्थित रहे। शिक्षकों ने विद्यार्थियों के साथ रहकर भ्रमण की विभिन्न गतिविधियों का समन्वय किया और उन्हें आवश्यक जानकारी प्रदान की।
शोधार्थियों ने भी व्यवस्थाओं में किया सहयोग
शैक्षणिक भ्रमण को सफल बनाने में विधि विभाग के शोधार्थियों अंकित आर्य, भावना और विवेक ने भी सक्रिय सहयोग किया। उन्होंने विद्यार्थियों के समन्वय, व्यवस्थाओं और कार्यक्रम के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षकों और शोधार्थियों के सामूहिक प्रयास से भ्रमण कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया गया।
‘विधि शिक्षा केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित नहीं’
विधि विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) प्रवीण दुबलिश ने कहा कि विधि शिक्षा केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रह सकती। न्यायालय भ्रमण, Clinical Legal Education और प्रत्यक्ष अनुभव विद्यार्थियों को कानून को केवल पढ़ने के बजाय उसे समझने, अनुभव करने और व्यावहारिक दृष्टि से देखने की क्षमता प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को वास्तविक न्यायिक संस्थाओं और विधिक प्रक्रियाओं से परिचित कराने से उनकी कानूनी समझ और व्यावहारिक दृष्टिकोण मजबूत होता है। ऐसे अनुभव उन्हें भविष्य में अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी, विधिक सलाहकार अथवा कानून से जुड़े अन्य क्षेत्रों में बेहतर ढंग से कार्य करने के लिए तैयार करते हैं।
संसद और अन्य विधिक संस्थानों के भ्रमण की भी तैयारी
प्रो. दुबलिश ने कहा कि विभाग की ओर से भविष्य में भी इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियों को जारी रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के लिए सर्वोच्च न्यायालय, संसद तथा अन्य प्रमुख विधिक एवं संवैधानिक संस्थानों के शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किए जाने की योजना है।
उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को कानून की किताबों से आगे ले जाकर भारतीय लोकतांत्रिक एवं न्यायिक संस्थाओं के वास्तविक कामकाज से परिचित कराना है।
व्यावहारिक अनुभव से मजबूत होगी विधि शिक्षा
मेरठ कॉलेज के विधि विभाग की ओर से आयोजित यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए अकादमिक अध्ययन के साथ व्यावहारिक अनुभव जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। सर्वोच्च न्यायालय का भ्रमण, न्याय व्यवस्था की ऐतिहासिक यात्रा पर जानकारीपरक प्रस्तुति और नवसुसज्जित लाइब्रेरी का अवलोकन विद्यार्थियों के लिए सीखने का महत्वपूर्ण अवसर बना।
कॉलेज प्रशासन और विधि विभाग का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में विधिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक समझ, शोध की प्रवृत्ति और न्यायिक संस्थाओं के प्रति गंभीर दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास जारी रहेगा।