आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज
जैन धर्मशाला में श्री सम्मेद शिखर की कृत्रिम रचना पर 24 कूटों में विराजमान किए गए चरण चिह्न, हजारों श्रद्धालुओं ने चढ़ाए निर्वाण लाडू
मेरठ । मोक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर जैन धर्मशाला, रेलवे रोड, मेरठ में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान श्री पारसनाथ का निर्वाण महामहोत्सव परम पूज्य आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महामुनिराज के मंगल सानिध्य में श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मशाला पहुंचे और भगवान पारसनाथ के चरणों में निर्वाण लाडू समर्पित कर मोक्ष कल्याणक की खुशी मनाई।
श्री सम्मेद शिखर की बनाई गई भव्य कृत्रिम रचना
कार्यक्रम की विशेष आकर्षण का केंद्र जैन धर्मशाला परिसर में तैयार की गई श्री सम्मेद शिखर जी पर्वत की कृत्रिम रचना रही। इस रचना पर 24 कूटों का निर्माण कर भगवान के चरण चिह्न विराजमान किए गए थे। श्रद्धालुओं ने इन पवित्र कूटों पर पहुंचकर भगवान के चरणों का पूजन किया और निर्वाण लाडू अर्पित किए।
आयोजकों के अनुसार इस आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को श्री सम्मेद शिखर जी की पवित्रता और वहां से मोक्ष प्राप्त करने वाले तीर्थंकरों की स्मृति से जोड़ने का प्रयास किया गया।
स्वर्णभद्र कूट पर चढ़ाया गया 23 किलो का निर्वाण लाडू
भगवान श्री पारसनाथ के निर्वाण महामहोत्सव के अवसर पर स्वर्णभद्र कूट पर 23 किलो का विशेष निर्वाण लाडू अर्पित किया गया। यह लाडू श्री जयंती प्रसाद हेमचंद जैन सर्राफ, मयंक जैन और गौरव जैन परिवार की ओर से समर्पित किया गया।
इसके अतिरिक्त अन्य 23 कूटों पर भी विशेष धर्मानुरागी परिवारों एवं श्रद्धालुओं द्वारा निर्वाण लाडू अर्पित किए गए। हजारों श्रद्धालुओं ने 24 कूटों पर भगवान के चरणों में श्रद्धा के साथ निर्वाण लाडू समर्पित कर अपनी आस्था प्रकट की।
श्री कल्याण मंदिर विधान का हुआ आयोजन
इस पवित्र अवसर पर श्री कल्याण मंदिर विधान का भी विधिवत आयोजन किया गया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान का स्मरण किया और विधान में सहभागिता की।
आयोजकों के अनुसार इस अवसर पर सौधर्म इंद्र के रूप में श्री मयंक जैन, कुबेर इंद्र के रूप में श्री मुकेश कुमार एवं अंकित कुमार जैन तथा महाआरती करने का सौभाग्य श्री अनिल जैन को प्राप्त हुआ।
आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज की रचना का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान परम पूज्य आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज द्वारा रचित ‘श्री शांतिनाथ महामंडल विधान’ पुस्तक का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं एवं उपस्थित धर्मानुरागियों ने पुस्तक के प्रकाशन को धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
आचार्य श्री ने बताया श्री सम्मेद शिखर का आध्यात्मिक महत्व
परम पूज्य आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को मंगल आशीर्वचन देते हुए भगवान पारसनाथ के निर्वाण कल्याणक और श्री सम्मेद शिखर जी के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि आज सभी श्रद्धालु श्री सम्मेद शिखर जी के पवित्र पर्वत पर 23वें तीर्थंकर भगवान श्री पारसनाथ के निर्वाण महामहोत्सव के अवसर पर उनके चरणों में निर्वाण लाडू समर्पित करने आए हैं। उन्होंने बताया कि जब कोई मुनिराज सम्यक्त्व को प्राप्त कर शिखर पर आरूढ़ होते हैं तो उसे सम्मेद शिखर कहा जाता है। उन्होंने श्री सम्मेद शिखर को मोक्ष की प्राप्ति से जुड़ा पवित्र स्थल बताया।
भगवान के दर्शन से मन में जागता है आध्यात्मिक विश्वास
आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में विपरीत परिस्थितियां आने पर व्यक्ति को चिंतित होने के बजाय भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्वास बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान के दर्शन और उनके प्रति सच्ची आस्था व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का संचार करती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भगवान को केवल नेत्रों से देखने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनके आदर्शों और संदेशों को हृदय में भी धारण किया जाए। इससे व्यक्ति संसार के दुखों और भव-भ्रमण से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
निर्वाण लाडू को बताया मोद और आनंद का प्रतीक
आचार्य श्री ने निर्वाण लाडू अर्पित करने की परंपरा का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए कहा कि जब किसी घर में खुशी होती है तो लोग लड्डू खिलाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हैं। इसी प्रकार जब श्रद्धालु श्री सम्मेद शिखर जी की वंदना करने आते हैं तो उनके मन में मोद अर्थात आनंद का भाव उत्पन्न होता है।
भगवान के मोक्ष कल्याणक की खुशी में उनके श्री चरणों में निर्वाण लाडू अथवा मोदक अर्पित किए जाते हैं। यह श्रद्धा और आनंद की आध्यात्मिक अभिव्यक्ति है।
पारस पत्थर का उदाहरण देकर समझाया प्रभु की शरण का महत्व
श्री कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान के संदर्भ में आचार्य श्री ने पारस पत्थर का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार पारस पत्थर के स्पर्श से लोहा भी सोना बन जाता है, उसी प्रकार प्रभु का आशीर्वाद और उनकी शरण व्यक्ति के जीवन को आध्यात्मिक रूप से प्रकाशित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य प्रभु की शरण प्राप्त कर उनके बताए मार्ग पर चले तो वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
प्रमाद त्यागकर भगवान के दर्शन करने का संदेश
आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन करते समय प्रमाद त्यागने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मन में प्रमाद रहने पर व्यक्ति प्रभु से वास्तविक रूप से जुड़ नहीं पाता। प्रमाद के कारण जीव गलत कार्यों की ओर प्रवृत्त होता है और आध्यात्मिक उन्नति में बाधा उत्पन्न होती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि भगवान के दर्शन केवल बाहरी रूप से न किए जाएं, बल्कि मन को एकाग्र करके प्रभु के गुणों और आदर्शों का चिंतन किया जाए।
20 अगस्त को कालिंदी कॉलोनी में रहेगा आचार्य श्री का प्रवास
श्री पुष्प वर्षा योग समिति के अध्यक्ष श्री सुरेश जैन रितुराज ने बताया कि 20 अगस्त को आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज का प्रवास कालिंदी कॉलोनी, ट्रांसपोर्ट नगर के पास रहेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता करने और आचार्य श्री के मंगल सानिध्य का लाभ लेने का आह्वान किया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समाज के गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में योगेश जैन (अरिहंत प्रकाशन), सुरेंद्र कुमार जैन, प्रेमचंद जैन, हंस कुमार जैन, रितेश जैन, अक्षय जैन, विजय जैन, संजय जैन धम्मो, अनुज जैन एडवोकेट, राजीव कुमार जैन, श्रीकिशन जैन, विनोद जैन भट्टे वाले, प्रवीन जैन आलू वाले, प्रमोद जैन एडवोकेट, सनत जैन, धन कुमार जैन सहित अनेक श्रेष्ठीगण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान जैन धर्मावलंबियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। धार्मिक अनुष्ठान, निर्वाण लाडू समर्पण, विधान, पूजन और आचार्य श्री के मंगल प्रवचनों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा