साहित्य लोक केंद्रीय शाखा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देने पर आनंदिता आचार्य को किया पुरुस्कृत
मेरठ। साहित्यालोक केंद्रीय शाखा मेरठ के तत्वावधान में सुरेंद्र प्रताप सभागार, इस्माइल गर्ल्स डिग्री कॉलेज, बुढ़ाना गेट में गोस्वामी तुलसीदास जयंती का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और भक्ति से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने गोस्वामी तुलसीदास के साहित्यिक योगदान और रामचरितमानस के सामाजिक एवं नैतिक महत्व पर प्रकाश डाला।

नृत्य और संगीत प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने भक्ति और रामकथा पर आधारित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। आनंदिता आचार्य और भूमिका सिवाच ने “ठुमक चलत रामचंद्र” पर मनोहारी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की।
सारा मेवाती ने रामचरितमानस की चौपाइयों की प्रस्तुति से सभागार के वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं वंशिका सिंह ने राम स्तुति पर नृत्य प्रस्तुत किया। रुद्र प्रताप ने हनुमान चालीसा तथा डा. ऋतु अग्रवाल ने हनुमान अष्टक की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में भक्ति का भाव और गहरा कर दिया।

‘हम कथा सुनाते’ पर प्रस्तुति ने जीता दर्शकों का दिल
कार्यक्रम में यादवी ने “हम कथा सुनाते” गीत पर नृत्य प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति को उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा और तालियों से उत्साहवर्धन किया।
इसके अलावा गौरी साहनी, गौरी पंजगोत्रा, नैना शर्मा, वंशिका जैन, कौशल कुमार और वंश हांडा के गायन की भी सराहना की गई। संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने पूरे कार्यक्रम को सांस्कृतिक एवं भक्तिमय स्वरूप प्रदान किया।
मानव जीवन में तुलसीदास और रामचरितमानस का विशेष महत्व
साहित्यालोक के संस्था अध्यक्ष उमेश कुमार ने कहा कि मानव जीवन में गोस्वामी तुलसीदास और रामचरितमानस का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस में वर्णित आदर्शों और जीवन मूल्यों से समाज को नैतिकता, मर्यादा, कर्तव्य और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने और संस्कारों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की आवश्यकता पर जोर
साहित्यालोक के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. सुबोध गर्ग ने रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किए जाने की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस में निहित नैतिक एवं मानवीय मूल्यों को व्यापक स्तर पर समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि रामचरितमानस मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और आदर्श जीवन की प्रेरणा देती है तथा इसके संदेशों से समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना को बल मिल सकता है।
स्थापना काल से तुलसी जयंती मनाता आ रहा साहित्यालोक
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि साहित्यालोक अपनी स्थापना के समय से ही गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनाता आ रहा है। संस्था द्वारा श्रावण शुक्ल सप्तमी के अवसर पर तुलसी जयंती के आयोजन के माध्यम से उनके साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान को स्मरण किया जाता है।
संस्था के संरक्षक डा. एस.के. अग्रवाल ने महापुरुषों एवं साहित्यकारों को स्मरण करने और उनके विचारों को समाज तक पहुंचाने के लिए साहित्यालोक के प्रयासों की सराहना की।
कनाडा निवासी देवेंद्र गोयल ने वितरित की मानस की प्रार्थना पुस्तक
कार्यक्रम में प्रवासी भारतीय एवं वर्तमान में कनाडा निवासी देवेंद्र गोयल भी मौजूद रहे। उन्होंने उपस्थित लोगों को मानस की प्रार्थना पुस्तक का वितरण किया। इस अवसर पर साहित्य और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए गए।
नितिन गोयल और ऋतु अग्रवाल ने किया संचालन
कार्यक्रम का संचालन नितिन गोयल और ऋतु अग्रवाल ने किया। दोनों ने कार्यक्रम के विभिन्न चरणों का संचालन करते हुए अतिथियों, कलाकारों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों का मार्गदर्शन किया।
साहित्यप्रेमियों और गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में सुशील कंसल, ई. सत्य प्रकाश, विनय नोक, राकेश गुप्ता, यश गोयल, यशपाल जांगिड़, सुरेश चंद्र, नरेंद्र गोयल, सरोज दूबे, आशा त्यागी, प्रभा शर्मा, शशि खन्ना सहित साहित्यालोक से जुड़े अनेक पदाधिकारी, सदस्य, साहित्यप्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों, कलाकारों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया। तुलसी जयंती के माध्यम से गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य और रामचरितमानस में निहित आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।