अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र न बनाए जाने को लेकर कमिश्नरी पार्क पर धरना देते कोरी समाज के लोग
मेरठ। जाति प्रमाण पत्र जारी करने में कथित भेदभाव और उत्पीड़न के विरोध में सोमवार को मेरठ कमिश्नरी स्थित चौधरी चरण सिंह पार्क में कोरी/भुईयार समाज के लोगों ने विशाल धरना प्रदर्शन किया। धरने में मेरठ मंडल और सहारनपुर मंडल के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में समाज के युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले लगभग 35 वर्षों से समाज के लोगों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
धरना स्थल पर पहुंचे समाज के प्रतिनिधियों और वक्ताओं ने कहा कि शासन और न्यायालयों द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बावजूद तहसील स्तर पर जाति प्रमाण पत्र के आवेदनों को मनमाने ढंग से निरस्त किया जा रहा है। इससे समाज के युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
न्यायालय के आदेशों के बावजूद प्रमाण पत्र जारी करने में बाधा का आरोप
धरने में वक्ताओं ने कई मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के लोगों को बार-बार दस्तावेज जमा करने के बावजूद जाति प्रमाण पत्र नहीं दिए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मवाना तहसील के एक मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि एक युवक का जाति प्रमाण पत्र तीन वर्षों के दौरान 34 बार निरस्त किया गया। बाद में मामला न्यायालय पहुंचा, जहां से आदेश मिलने के बाद उसी आवेदन को एक सप्ताह के भीतर स्वीकृत कर दिया गया।
समाज के नेताओं का कहना है कि ऐसे उदाहरण यह दर्शाते हैं कि प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं, जिससे समाज के लोगों को मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
“जुलाहा जाति नहीं, एक पेशा है”
धरने में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि “जुलाहा” कोई जाति नहीं बल्कि एक पारंपरिक व्यवसाय या पेशा है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में शासन के आदेश, सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी तथा उच्च न्यायालय के निर्णय भी उपलब्ध हैं। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी करने में आपत्तियां लगाई जा रही हैं।
समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा पात्र लोगों को बिना किसी भेदभाव के जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए जाएं।
धरने में उठीं तीन प्रमुख मांगें
- महाधरना के दौरान समाज के लोगों ने प्रशासन और सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं—
- पहली मांग: कोरी और भुईयार समाज के लोगों को बिना उत्पीड़न और अनावश्यक आपत्तियों के जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।
- दूसरी मांग: संत कबीर साहब की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए तथा उनके नाम पर धर्मशाला का निर्माण कराया जाए।
- तीसरी मांग: वीरांगना झलकारी बाई कोरी के सम्मान में मेरठ के किसी प्रमुख चौराहे का नामकरण किया जाए और वहां उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए।
- लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
धरने को संबोधित करते हुए समाज के नेताओं ने कहा कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक धरना और आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह केवल जाति प्रमाण पत्र का मुद्दा नहीं बल्कि समाज के सम्मान, अधिकार और समान अवसरों से जुड़ा विषय है। इसलिए समाज अब अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करेगा।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
धरने के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को भी सौंपा। ज्ञापन में जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की मांग के साथ-साथ समाज के ऐतिहासिक और सामाजिक योगदान को सम्मान देने की भी अपील की गई।
महाधरने में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए रहे।
अब सभी की निगाहें प्रशासन की प्रतिक्रिया और समाज की मांगों पर होने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।