जिला अधिकारी कार्यालय परिसर स्थित ई रजिस्ट्री कार्यालय पर प्रदर्शन करते दस्तावेज लेखक संघ के कार्यकर्ता
मेरठ। उत्तर प्रदेश के निबंधन विभाग में लागू की जा रही नई ई-पंजीकरण व्यवस्था को लेकर विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। मेरठ के अधिवक्ता संघ, दस्तावेज लेखक संघ, दस्तावेज परामर्श समिति तथा स्टाम्प विक्रेता संगठनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 17 सूत्रीय ज्ञापन भेजकर विभाग में प्रस्तावित बदलावों पर पुनर्विचार करने और व्यापक स्तर पर चर्चा करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि निबंधन विभाग से प्रदेश भर में लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक, स्टाम्प विक्रेता, टाइपिस्ट, मुंशी, फोटोकॉपी व्यवसायी और अन्य सहयोगी वर्ग वर्षों से निबंधन व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं और विभाग के राजस्व संग्रह में महत्वपूर्ण योगदान देते आए हैं। संगठनों का कहना है कि नई ई-पंजीकरण व्यवस्था को लेकर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण कई स्थानों पर विरोध और हड़ताल जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं।
नई व्यवस्था से पहले व्यापक संवाद की मांग
ज्ञापन में प्रमुख मांग यह उठाई गई है कि निबंधन विभाग में कोई भी नई व्यवस्था लागू करने से पहले अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प विक्रेताओं और विभागीय अधिकारियों के साथ व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जाए। संगठनों का कहना है कि जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोगों के सुझावों और अनुभवों को शामिल किए बिना किए गए बदलावों से आम जनता को लाभ मिलने के बजाय कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप का सुझाव
संगठनों ने विभाग में पारदर्शिता और त्वरित संवाद की व्यवस्था विकसित करने के लिए एक साझा व्हाट्सएप समूह बनाने का सुझाव दिया है। प्रस्ताव के अनुसार इस समूह में मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रतिनिधि, विभागीय मंत्री, प्रमुख सचिव, महानिरीक्षक निबंधन, मंडलीय एवं जिला स्तर के अधिकारी, उप निबंधक, अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक शामिल किए जाएं। इससे नीतिगत निर्णयों, समस्याओं और समाधान संबंधी जानकारी तत्काल सभी स्तरों तक पहुंच सकेगी।
पांच दिवसीय कार्य व्यवस्था की वकालत
ज्ञापन में रविवार या अतिरिक्त समय में कार्यालय खोलने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई गई है। संगठनों का कहना है कि सप्ताह में पांच कार्य दिवस की व्यवस्था अधिक व्यवहारिक होगी। इससे बिजली, डीजल और पेट्रोल की बचत होगी तथा प्रदूषण में भी कमी आएगी। साथ ही अधिकारियों, कर्मचारियों और आम जनता को भी सुविधा मिलेगी।
जनता को मिलने वाली छूटों के प्रचार-प्रसार की मांग
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकार द्वारा महिलाओं, पूर्व सैनिकों, दिव्यांगजनों, औद्योगिक इकाइयों, अस्पतालों और अन्य वर्गों को स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क में कई प्रकार की रियायतें दी गई हैं। हालांकि इन योजनाओं और छूटों की जानकारी आम जनता तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच रही है। संगठनों ने मांग की है कि इन सभी छूटों की जानकारी सरल भाषा में पुस्तिका के रूप में प्रत्येक उप निबंधक कार्यालय में उपलब्ध कराई जाए।
समयबद्ध सेवाओं और स्टाफ बढ़ाने की मांग
ज्ञापन में सिटीजन चार्टर के तहत निर्धारित समय सीमा में कार्यों के निस्तारण पर भी जोर दिया गया है। संगठनों का कहना है कि स्टाम्प रिफंड सहित कई सेवाएं निर्धारित समय में पूरी नहीं हो पातीं। इसके अलावा अधिकांश उप निबंधक कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी भी बड़ी समस्या बनी हुई है। ज्ञापन में प्रत्येक कार्यालय में पर्याप्त संख्या में निबंधन लिपिक, रिकॉर्ड कीपर और तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति की मांग की गई है।
निजी एजेंसियों और अन्य प्राधिकरणों को अधिकार देने पर चिंता
संगठनों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि पंजीकरण संबंधी कार्य अन्य विकास प्राधिकरणों या निजी एजेंसियों को सौंपे गए तो इससे पारदर्शिता, गोपनीयता और कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में सरकारी नियंत्रण के कारण दस्तावेजों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित रहती है, जबकि निजी एजेंसियों के माध्यम से इस प्रकार के जोखिम बढ़ सकते हैं।
जनहित और राजस्व हित में निर्णय लेने की अपील
अधिवक्ता संघ, दस्तावेज लेखक संघ और स्टाम्प विक्रेता संगठनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया है कि जनहित, पारदर्शिता, राजस्व वृद्धि और निबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उनके सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाए। संगठनों का मानना है कि संवाद और सहयोग के माध्यम से ऐसी व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जिससे सरकार, विभाग और आम जनता सभी को लाभ मिल सके।
ई-पंजीकरण व्यवस्था को लेकर उठे इस विवाद ने प्रदेश में निबंधन विभाग की कार्यप्रणाली और भविष्य की व्यवस्थाओं पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की आगामी प्रतिक्रिया और निर्णयों पर टिकी हैं।