मायावती (पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश)
बसपा सुप्रीमो ने कहा- चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता से ही लोकतंत्र पर जनता का विश्वास मजबूत होगा; एसआईआर से जुड़ी भ्रांतियां दूर करने की चुनाव आयोग से मांग
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को देश में चुनाव प्रक्रिया, ईवीएम, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर मीडिया को संबोधित किया। मायावती ने चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल बंद कर बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान कराने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं के मन में किसी तरह का संदेह नहीं रहना चाहिए और चुनाव आयोग को एसआईआर से संबंधित भ्रांतियों को भी समय रहते दूर करना चाहिए।
संविधान और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी का किया उल्लेख
मायावती ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अधिकार देता है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324 का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावों के संचालन की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग को सौंपी गई है। उनके अनुसार, चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें प्रत्येक मतदाता अपनी इच्छा के अनुसार मतदान कर सके और उसका मत उसी उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज एवं मतगणना में शामिल हो, जिसे उसने वोट दिया है। उन्होंने कहा कि मतदाता के मन में यह संदेह नहीं होना चाहिए कि उसका वोट किसी दूसरे उम्मीदवार के खाते में चला गया या उसकी गणना किसी अन्य के पक्ष में हुई। मायावती ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के विश्वास से जोड़ते हुए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर दिया।
ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर की मांग दोहराई
मायावती ने कहा कि देश में शुरुआती कई दशकों तक चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाता था। उनके अनुसार, मतगणना के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मतपत्रों की गिनती की जाती थी। उन्होंने ईवीएम व्यवस्था को लेकर अपनी पार्टी की पुरानी आपत्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बसपा शुरू से ही ईवीएम से मतदान का विरोध करती रही है। उन्होंने कहा कि बसपा ने ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर पहले भी न्यायालय का रुख किया था। मायावती ने कहा कि बाद में ईवीएम के साथ वीवीपैट व्यवस्था लागू की गई, लेकिन उनकी पार्टी की मांग के अनुसार सभी वीवीपैट पर्चियों का ईवीएम में दर्ज मतों से पूर्ण मिलान नहीं किया जाता। इसी आधार पर उन्होंने बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग फिर दोहराई।
भाजपा और ईवीएम को लेकर मायावती का दावा
मायावती ने अपने संबोधन में कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भाजपा की ओर से भी ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए जाते थे। उन्होंने कहा कि उस समय भाजपा ने ईवीएम में इलेक्ट्रॉनिक चिप के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई थी और इसके संबंध में अपनी बात रखी थी। मायावती ने कहा कि बाद में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बावजूद ईवीएम से मतदान और मतगणना की व्यवस्था जारी रही। उन्होंने कहा कि बसपा का मत है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं के मन में किसी भी प्रकार का संदेह नहीं होना चाहिए।
नगीना सीट को लेकर भी किया दावा
बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट का उल्लेख करते हुए आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद की जीत को लेकर भी अपनी पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों का जिक्र किया। मायावती ने दावा किया कि इस चुनाव परिणाम के पीछे ईवीएम में धांधली की गई। उन्होंने इसे अपने दल और उसके मतदाताओं के संदर्भ में एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। यह मायावती का राजनीतिक दावा है; उन्होंने अपने संबोधन में इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र जांच या न्यायिक निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया।
एसआईआर को लेकर भ्रांतियां दूर करने की मांग
मायावती ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे से संबंधित कई तरह की भ्रांतियां सामने आई हैं और निर्वाचन आयोग को इन्हें समय रहते स्पष्ट करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इन भ्रांतियों के कारण उनकी पार्टी सहित विपक्षी दलों में भी असमंजस और असंतोष की स्थिति बनी है। उन्होंने कहा कि चुनाव से संबंधित अन्य विषयों को लेकर भी यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट कर दी जाती तो मौजूदा परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। मायावती ने निर्वाचन आयोग से एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी देकर भ्रम की स्थिति समाप्त करने की मांग की।
‘फ्री एंड फेयर इलेक्शन’ पर विश्वास बहाल करने की मांग
मायावती ने कहा कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था पर सभी लोगों का विश्वास बना रहना जरूरी है। उन्होंने बसपा की ओर से मांग रखी कि ईवीएम से चुनाव कराने की प्रक्रिया बंद की जाए और इसकी जगह बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान कराया जाए। उन्होंने कहा कि एसआईआर समेत चुनाव से जुड़े अन्य मामलों को लेकर जो भी भ्रांतियां हैं, उन्हें निर्वाचन आयोग द्वारा दूर किया जाना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास कायम रहे।
दिल्ली और पंजाब की कानून-व्यवस्था पर भी टिप्पणी
बसपा प्रमुख ने देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दिल्ली और पंजाब समेत कुछ राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न मुद्दों को लेकर कानून-व्यवस्था बिगड़ने की घटनाएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने संबंधित राज्य सरकारों से कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाने की अपील की। मायावती ने कहा कि कानून-व्यवस्था मजबूत रहना जनहित में आवश्यक है। उन्होंने अपने संबोधन का समापन जय भीम और जय भारत के नारे के साथ किया