अमिताभ ठाकुर (आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आई पी एस अमिताभ ठाकुर )
मेरठ। मेरठ कलेक्ट्रेट परिसर में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर मामला अब मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मेरठ पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहन में मौजूद अधिवक्ता रवि गौतम सहित अन्य नागरिकों के साथ कथित मारपीट, पुलिस द्वारा बल प्रयोग तथा बाद में अधिवक्ता को अपने साथ ले जाने के मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
आयोग द्वारा जारी शिकायत प्राप्ति पत्र के अनुसार यह शिकायत 09 जुलाई 2026 को प्राप्त हुई, जिसे डायरी संख्या 5300/IN/2026 आवंटित की गई है। शिकायत के साथ संबंधित दस्तावेज भी आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं।
शिकायत में क्या कहा गया?
शिकायत में अमिताभ ठाकुर ने कहा है कि 08 जुलाई को मेरठ कलेक्ट्रेट पर छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया था। उनका कहना है कि इस शिकायत का उद्देश्य ललिता गौतम हत्याकांड की विवेचना पर सवाल उठाना नहीं है, बल्कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कथित कार्रवाई की जांच कराना है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ द्वारा स्वयं कुछ नागरिकों को थप्पड़ मारने तथा पुलिस वाहन में मौजूद अधिवक्ता रवि गौतम के साथ कथित रूप से मारपीट किए जाने की बात विभिन्न समाचार रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में सामने आई है।
वीडियो और समाचार रिपोर्टों का दिया गया हवाला
अमिताभ ठाकुर ने आयोग को भेजी शिकायत में कहा है कि यदि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो और समाचार रिपोर्टों में दिखाई गई घटनाएं सही पाई जाती हैं, तो यह मामला गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन, पुलिस अधिकारों के दुरुपयोग (Abuse of Police Authority) तथा संभावित हिरासत में हिंसा (Custodial Violence) की श्रेणी में आ सकता है।
उन्होंने कहा कि जिले के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी द्वारा पुलिस नियंत्रण में मौजूद व्यक्ति के साथ कथित रूप से शारीरिक बल प्रयोग किया जाना विधि के शासन और नागरिक अधिकारों से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
स्वतंत्र जांच और साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग
शिकायत में उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग से मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही घटना से संबंधित सभी वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके।
इसके अलावा यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई किए जाने की भी मांग की गई है।
आयोग ने शिकायत की दर्ज
उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग द्वारा जारी शिकायत प्राप्ति पत्र में बताया गया है कि शिकायत प्राप्त होने के बाद उसे डायरी संख्या 5300/IN/2026 प्रदान की गई है। फिलहाल आयोग द्वारा शिकायत स्वीकार किए जाने की पुष्टि की गई है। मामले में आगे की कार्रवाई आयोग की प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।