बैठक के दौरान मंचासीन बार एसोसिएशन के पदाधिकारी
मेरठ। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अधिवक्ता संघों की हड़ताल और न्यायिक कार्य से विरत रहने संबंधी गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाए जाने के बाद मेरठ में अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण बैठक कर अपनी रणनीति तय की। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, मेरठ और मेरठ बार एसोसिएशन, मेरठ के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को लाल बहादुर शास्त्री सभागार में वरिष्ठ अधिवक्ताओं, पूर्व अध्यक्षों और पूर्व महामंत्रियों की एक आपातकालीन संयुक्त सभा आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविन्द्र कुमार सिंह तथा मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से की। सभा का संचालन डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के महामंत्री प्रशान्त गुप्ता एवं मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री परवेज आलम द्वारा किया गया।
हाईकोर्ट के आदेश पर हुई विस्तृत चर्चा
बैठक में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 3 जून 2026 को पारित उस आदेश पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें प्रदेश के सभी अधिवक्ता संघों को किसी भी स्थिति में हड़ताल या न्यायिक कार्य से विरत रहने संबंधी प्रस्ताव पारित न करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बार एसोसिएशनों के पदाधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिवक्ताओं और पूर्व पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। बैठक में डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन एवं मेरठ बार एसोसिएशन के कई पूर्व अध्यक्षों, पूर्व महामंत्रियों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भाग लिया तथा आदेश के विधिक और संवैधानिक पहलुओं पर चर्चा की।
शपथ पत्र न देने का सर्वसम्मत निर्णय
बैठक के दौरान पारित प्रस्तावों में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि हाईकोर्ट द्वारा मांगे गए शपथ पत्र के संबंध में कोई भी शपथ पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। अधिवक्ताओं का मत था कि इस विषय पर प्रदेशभर के बार संगठनों से व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
सभा में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 20 दिसंबर 2024 को पारित आदेश और उच्च न्यायालय के 3 जून 2026 के आदेश के बीच विधिक स्थिति को लेकर गंभीर विचार आवश्यक है। अधिवक्ताओं ने कहा कि इस विषय पर व्यापक कानूनी विमर्श होना चाहिए ताकि सभी पक्षों की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
पश्चिमी यूपी हाईकोर्ट बेंच आंदोलन को मिलेगा नया स्वरूप
बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। अधिवक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को न्याय प्राप्त करने के लिए आज भी प्रयागराज तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे आम नागरिकों और अधिवक्ताओं को भारी असुविधा होती है।
इस संबंध में पश्चिमी उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति से जुड़े सभी जिलों की एक आपातकालीन बैठक 20 जून 2026 को बुलाने का निर्णय लिया गया। इस बैठक में आगे की आंदोलनात्मक रणनीति तय की जाएगी।
22 जिलों के प्रतिनिधियों की होगी ऑनलाइन बैठक
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति द्वारा 11 जून 2026 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के प्रतिनिधियों की एक ऑनलाइन जूम बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में वर्तमान परिस्थितियों पर चर्चा कर आगे की वैधानिक कार्रवाई और आंदोलन की दिशा तय की जाएगी।
सांकेतिक हड़ताल पर भी विचार
संयुक्त सभा में यह प्रस्ताव भी पारित किया गया कि संघर्ष समिति से जुड़े सभी जिलों की बार एसोसिएशनों के साथ विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल आयोजित की जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय सभी संबंधित बार एसोसिएशनों की राय प्राप्त होने के बाद ही लिया जाएगा।
प्रदेशस्तरीय महाअधिवक्ता सम्मेलन का प्रस्ताव
अधिवक्ताओं ने यह भी निर्णय लिया कि उत्तर प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों का एक महाअधिवक्ता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन के स्थान और तिथि का निर्धारण सभी बार संगठनों की सहमति से किया जाएगा। सम्मेलन में अधिवक्ताओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों, न्यायिक सुधारों तथा हाईकोर्ट बेंच स्थापना की मांग पर विस्तृत चर्चा होगी।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने रखे अपने विचार
बैठक में अनेक वरिष्ठ अधिवक्ताओं, पूर्व अध्यक्षों, पूर्व महामंत्रियों तथा शासकीय अधिवक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि अधिवक्ताओं के अधिकारों, न्यायिक व्यवस्था और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापना के लिए संघर्ष को लोकतांत्रिक और वैधानिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
सभा के अंत में पारित प्रस्तावों को प्रदेश के अन्य बार संगठनों तक पहुंचाने और जनमानस को अवगत कराने के लिए मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्णय लिया गया।
इस बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि हाईकोर्ट के हालिया आदेश को लेकर अधिवक्ता संगठनों में व्यापक चर्चा और असहमति का माहौल है तथा आने वाले दिनों में प्रदेशभर के बार संगठनों की गतिविधियां इस मुद्दे पर केंद्रित रह सकती हैं।