पुलिस उप महानिरीक्षक मेरठ परिक्षेत्र कला निधि नैथानी
मेरठ। मेरठ परिक्षेत्र पुलिस ने आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग और अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) की प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में मेरठ परिक्षेत्र के चारों जनपद—मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़—ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि मार्च 2026 से लगातार तीसरी बार हासिल हुई है, जिसे पुलिस विभाग ने बड़ी सफलता माना है।
पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) मेरठ परिक्षेत्र श्री कलानिधि नैथानी ने बताया कि NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) लागू होने के बाद से 1 जुलाई 2022 से प्रदेश के सभी जनपदों में स्थापित जनपदीय अंगुली चिन्ह इकाइयों के माध्यम से अपराधियों के फिंगरप्रिंट का डिजिटल संकलन और फीडिंग का कार्य निरंतर किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस प्रणाली के माध्यम से अपराधियों के फिंगरप्रिंट का वैज्ञानिक एवं डिजिटल विश्लेषण किया जाता है, जिससे उनकी त्वरित पहचान संभव हो पाती है। इससे अपराधों के खुलासे, पुराने मामलों के विश्लेषण और अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी में पुलिस को काफी सहायता मिल रही है। आधुनिक तकनीक आधारित यह व्यवस्था जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
डीआईजी के अनुसार, मई 2026 के डाटा फीडिंग के आधार पर जारी प्रदेश स्तरीय NAFIS रैंकिंग में मेरठ परिक्षेत्र के सभी चारों जनपदों ने 100 प्रतिशत फीडिंग सुनिश्चित करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया।
जारी आंकड़ों के अनुसार—
- मेरठ जनपद में 533 अपराधियों के फिंगरप्रिंट का 100 प्रतिशत डिजिटल फीडिंग की गई।
- बुलंदशहर में 506 अपराधियों के फिंगरप्रिंट दर्ज किए गए।
- बागपत में 215 अपराधियों का डाटा अपलोड किया गया।
- हापुड़ में 212 अपराधियों के फिंगरप्रिंट NAFIS प्रणाली में दर्ज किए गए।
इस प्रकार मई 2026 के दौरान मेरठ परिक्षेत्र के चारों जनपदों में कुल 1466 अपराधियों के फिंगरप्रिंट डिजिटल प्रणाली में सफलतापूर्वक फीड किए गए।
डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बताया कि रेंज के सभी जनपदों में NAFIS प्रणाली के अंतर्गत होने वाली फीडिंग की नियमित समीक्षा की जाती है तथा जनपद प्रभारियों को समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जाते हैं, जिससे कार्य की गुणवत्ता और गति बनी रहे।
उन्होंने इस उपलब्धि के लिए मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ के सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग कर अपराध नियंत्रण और अपराधियों की पहचान की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को भविष्य में भी इसी समर्पण और दक्षता के साथ कार्य करते रहने के निर्देश दिए।
NAFIS प्रणाली को देशभर में अपराधियों के डिजिटल फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड तैयार करने और राज्यों के बीच सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए विकसित किया गया है। इस प्रणाली से अपराधियों की पहचान पहले की तुलना में अधिक तेज, सटीक और प्रभावी तरीके से संभव हो रही है, जिससे कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है।