पीजीआई लखनऊ में स्वर्ण प्राशन शोध प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्यसभा सांसद डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेई
लखनऊ। राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा है कि चिकित्सक के रूप में उनके लिए आज का दिन अत्यंत सौभाग्यपूर्ण रहा। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान जिस इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) और उसके आयुर्वेदिक प्रबंधन के तहत स्वर्ण प्राशन संस्कार की अवधारणा को उन्होंने राज्यसभा में उठाकर पूरे देश के सामने रखने का प्रयास किया था, उसी विषय पर अब पीजीआई लखनऊ में आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के आधार पर विस्तृत अनुसंधान किया जा रहा है।
डॉ. बाजपेयी ने कहा कि पीजीआई लखनऊ में उन्हें इस शोध कार्य को निकट से देखने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि डॉ. विकास अग्रवाल के नेतृत्व में डॉ. हर्ष और डॉ. मोहित स्वर्ण प्राशन पर गंभीर एवं विस्तृत अनुसंधान कर रहे हैं। उनके अनुसार यह शोध आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में अक्सर यह कहा जाता है कि मरीज का भाग्य भी उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो अथवा शरीर का कोई अंग शिथिल हो गया हो, तो ऐसे मामलों में स्वर्ण प्राशन के उपयोग से लाभ मिलने की संभावनाएं दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने की बात शोधकर्ताओं ने बताई है।
डॉ. बाजपेयी ने बताया कि उनके समक्ष एक बुजुर्ग मरीज का उदाहरण प्रस्तुत किया गया, जिनके हाथ-पैर लगातार कांपते थे और उन्हें चलने-फिरने में भी कठिनाई होती थी। शोधकर्ताओं के अनुसार लगभग एक महीने तक स्वर्ण प्राशन लेने के बाद उनकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और वे स्वयं चलने-फिरने लगे। साथ ही हाथों का कंपन भी काफी हद तक नियंत्रित हो गया। इसी प्रकार बच्चों में भी इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि इस दिशा में अनुसंधान सफलतापूर्वक आगे बढ़ता है तो पीजीआई लखनऊ मानवता की सेवा में एक महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने स्वर्ण प्राशन संस्कार को आधुनिक वैज्ञानिक पैरामीटर पर प्रमाणित करने के लिए पीजीआई लखनऊ के चिकित्सकों और शोधकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।
डॉ. बाजपेयी ने कहा कि इस पूरे अभियान को आगे बढ़ाने में डॉ. अभय तिवारी का विशेष योगदान रहा है। उन्होंने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।