सीसीएसयू और एफएसएल यूपी के बीच एमओयू पर चर्चा
मेरठ, 22 अक्टूबर। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के फॉरेंसिक साइंस विभाग में गुरुवार को विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें आपराधिक जांच की आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन और फॉरेंसिक साइंस में करियर की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि और वक्ता विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल), उत्तर प्रदेश के निदेशक डॉ. (प्रो.) आदर्श कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बीएससी और एमएससी फॉरेंसिक साइंस के उत्तीर्ण तथा अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए नए अवसर और रिक्तियां आने की संभावना है।
एफएसएल के साथ एमओयू पर हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला और डॉ. आदर्श कुमार के बीच विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक साइंस विभाग तथा एफएसएल उत्तर प्रदेश के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लेकर चर्चा हुई। इसके तहत विद्यार्थियों के लिए प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण, शोध परियोजनाओं और संयुक्त कार्यशालाओं के अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

प्रस्तावित सहयोग से विद्यार्थियों को आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों की जानकारी और प्रयोगशाला में काम करने का अनुभव मिल सकता है। साथ ही, इन गतिविधियों से उन्हें रोजगार के लिए जरूरी कौशल विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
क्राइम सीन और बैलिस्टिक साक्ष्यों की भूमिका समझाई
एफएसएल लखनऊ के उपनिदेशक डॉ. अजय श्रीवास्तव और एफएसएल गाजियाबाद के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. अशोक कुमार यादव ने वास्तविक जांचों के उदाहरणों के माध्यम से क्राइम सीन मैनेजमेंट और बैलिस्टिक साक्ष्यों के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि किसी आपराधिक मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों का सही तरीके से संकलन, संरक्षण और विश्लेषण जांच की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
वक्ताओं ने कहा कि आपराधिक मामलों की जांच में फॉरेंसिक विज्ञान का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए जांच की प्रक्रियाओं और आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक समझ हासिल करना उपयोगी है।
मॉक क्राइम सीन से दिखाई जांच की प्रक्रिया
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों की ओर से तैयार किया गया मॉक क्राइम सीन रहा। डॉ. राजेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में तैयार इस मॉडल के जरिए विद्यार्थियों ने अपराध स्थल की जांच और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों के पोस्टर और विषय आधारित रंगोली ने भी अतिथियों का ध्यान आकर्षित किया।
व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विभाग का जोर
विभागाध्यक्ष प्रो. बिंदु शर्मा ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस आपराधिक जांच और न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। विभाग का प्रयास है कि विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और आधुनिक जांच तकनीकों की जानकारी भी दी जाए। उन्होंने कहा कि एफएसएल उत्तर प्रदेश के साथ प्रस्तावित एमओयू से विद्यार्थियों को प्रयोगशाला प्रशिक्षण, शोध और विशेषज्ञों से संवाद के नए अवसर मिलने की संभावना है।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. बिंदु शर्मा के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में हुआ। इसमें विभाग के शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। विशेष व्याख्यान और मॉक क्राइम सीन के माध्यम से विद्यार्थियों को फॉरेंसिक विज्ञान की व्यावहारिक उपयोगिता, आधुनिक जांच पद्धतियों और करियर की संभावनाओं की जानकारी मिली।