राहुल गांधी
नई दिल्ली। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जहां अपनी उपलब्धियों और विकास कार्यों को प्रमुखता से प्रस्तुत कर रही है, वहीं कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दल सरकार की नीतियों और फैसलों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने कई ऐसे निर्णय लिए जिनका असर आम जनता, किसानों, युवाओं, छोटे व्यापारियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़ा। हालांकि केंद्र सरकार इन आरोपों को निराधार बताते हुए अपने फैसलों को देशहित में उठाए गए कदम करार देती रही है।
रोजगार और बेरोजगारी पर विपक्ष का हमला
विपक्ष का कहना है कि पिछले वर्षों में देश में बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि हर वर्ष करोड़ों रोजगार देने के वादे पूरे नहीं हुए। उनका कहना है कि सरकारी विभागों में लाखों पद लंबे समय तक खाली रहे और युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी तथा पेपर लीक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
सरकार का पक्ष है कि स्वरोजगार, स्टार्टअप इंडिया, मुद्रा योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
महंगाई को लेकर लगातार निशाना
विपक्ष का आरोप है कि खाद्य पदार्थों, एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और घरेलू जरूरत की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से आम परिवारों का बजट प्रभावित हुआ। विपक्ष का कहना है कि महंगाई ने मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला।
सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने महंगाई को कई अन्य देशों की तुलना में नियंत्रित रखा और गरीबों को मुफ्त राशन जैसी योजनाओं से राहत दी।
नोटबंदी और जीएसटी पर सवाल
विपक्ष का आरोप है कि वर्ष 2016 की नोटबंदी से छोटे व्यापारियों, असंगठित क्षेत्र और दैनिक मजदूरों को भारी नुकसान हुआ। उनका कहना है कि इससे अर्थव्यवस्था की गति प्रभावित हुई और अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।
इसी प्रकार वस्तु एवं सेवा कर (GST) को लेकर विपक्ष का आरोप है कि शुरुआती वर्षों में इसकी जटिल प्रक्रिया से छोटे कारोबारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
सरकार का कहना है कि नोटबंदी का उद्देश्य काले धन और नकली मुद्रा पर रोक लगाना था तथा GST ने पूरे देश में एक समान कर व्यवस्था लागू की।
किसानों से जुड़े मुद्दों पर आरोप
विपक्ष का कहना है कि किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित समय में पूरा नहीं हुआ। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि लागत और फसल की उचित कीमत जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार की आलोचना करता रहा है।
तीन कृषि कानूनों के विरोध में हुए किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए विपक्ष का कहना है कि सरकार को अंततः कानून वापस लेने पड़े।
सरकार का पक्ष है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, सिंचाई परियोजनाएं और कृषि क्षेत्र में निवेश किसानों के हित में किए गए कदम हैं।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों—जैसे प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग—का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ अधिक किया गया।
सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि जांच एजेंसियां कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करती हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई किसी राजनीतिक आधार पर नहीं होती।
मणिपुर और सामाजिक तनाव के मुद्दे
विपक्ष ने मणिपुर हिंसा, विभिन्न राज्यों में सांप्रदायिक तनाव और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर सरकार को घेरा। विपक्ष का आरोप है कि कई संवेदनशील घटनाओं में केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रही।
सरकार का कहना है कि राज्यों के सहयोग से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांति स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास किए गए।
महिलाओं की सुरक्षा पर विपक्ष के सवाल
विपक्ष ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों और कुछ चर्चित मामलों का हवाला देते हुए सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि महिला सुरक्षा के लिए और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
सरकार का कहना है कि महिला सुरक्षा के लिए कई कानूनों में संशोधन किए गए, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए तथा महिला सशक्तिकरण की विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
संविधान और संघीय ढांचे को लेकर आरोप
विपक्ष का आरोप है कि कई विधेयकों और निर्णयों में राज्यों से पर्याप्त परामर्श नहीं लिया गया तथा संसद में पर्याप्त चर्चा के बिना कानून पारित किए गए।
सरकार का कहना है कि सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए संसद द्वारा विधेयक पारित किए गए और संघीय व्यवस्था का सम्मान किया गया।
विदेश नीति पर विपक्ष की आलोचना
विपक्ष ने चीन के साथ सीमा विवाद, पड़ोसी देशों के साथ संबंधों और कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार की रणनीति पर प्रश्न उठाए हैं।
सरकार का कहना है कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा पहले से अधिक मजबूत हुई है, जी-20 की सफल अध्यक्षता इसका उदाहरण है और भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है।
आर्थिक असमानता और निजीकरण पर सवाल
विपक्ष का आरोप है कि सरकारी संपत्तियों के निजीकरण, बढ़ती आर्थिक असमानता और कुछ बड़े उद्योग समूहों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों से आर्थिक संतुलन प्रभावित हुआ।
सरकार का कहना है कि निजी निवेश, विनिवेश और बुनियादी ढांचे में निवेश से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है तथा भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है।
सरकार का जवाब
केंद्र सरकार और भाजपा का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक कारणों से आरोप लगाता है, जबकि पिछले 12 वर्षों में भारत ने डिजिटल भुगतान, सड़क और रेल नेटवर्क, रक्षा, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति की है। सरकार का दावा है कि करोड़ों लोगों को योजनाओं का सीधा लाभ मिला है और भारत वैश्विक स्तर पर अधिक मजबूत स्थिति में पहुंचा है।
निष्कर्ष
मोदी सरकार के 12 वर्षों को लेकर देश में दो अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण सामने आते हैं। भाजपा इसे विकास, सुशासन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में परिवर्तनकारी काल बताती है, जबकि विपक्ष रोजगार, महंगाई, कृषि, लोकतांत्रिक संस्थाओं, आर्थिक नीतियों और सामाजिक मुद्दों को लेकर सरकार की आलोचना करता है। इन दावों और आरोपों का मूल्यांकन लोकतांत्रिक विमर्श, उपलब्ध आंकड़ों, न्यायिक निर्णयों और जनता की राय के आधार पर किया जाता है।