पूर्व मंत्री पं सुनील भराला
मेरठ। फायर ब्रांड नेता पंडित सुनील भराला ने पवित्र सावन माह में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा मछली की दावत किए जाने के कथित आयोजन को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस आयोजन की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि सावन का महीना सनातन समाज की आस्था, श्रद्धा और भगवान शिव की भक्ति से जुड़ा अत्यंत पवित्र माह है। ऐसे धार्मिक अवसर पर इस प्रकार का आयोजन किया जाना सनातन समाज की धार्मिक भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
सावन माह की धार्मिक आस्था का दिया हवाला
पंडित सुनील भराला ने कहा कि सावन का महीना सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते हैं और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों एवं परंपराओं का पालन करते हैं। ऐसे में सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों से धार्मिक भावनाओं और परंपराओं के प्रति संवेदनशीलता बरतने की अपेक्षा की जाती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक पर्व या आस्था से जुड़े अवसर पर समाज की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उनके अनुसार सावन के पवित्र माह में मछली की दावत का आयोजन सनातन समाज की भावनाओं के प्रति उचित संवेदनशीलता नहीं दर्शाता।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर साधा निशाना
पंडित सुनील भराला ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा मछली की दावत किए जाने को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय लोगों को समाज की धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था किसी भी समाज के लिए महत्वपूर्ण विषय होती है और सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे विभिन्न समुदायों की भावनाओं का सम्मान करें।
सनातन आस्था और परंपराओं के सम्मान की अपील
पंडित सुनील भराला ने लोगों से सनातन आस्था और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक अवसरों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी ऐसी गतिविधि से बचना चाहिए जिससे किसी वर्ग या समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हों।
उन्होंने अपने बयान में उक्त आयोजन की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सनातन समाज की आस्था, श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
बयान के बाद राजनीतिक चर्चा तेज
पंडित सुनील भराला के इस बयान के सामने आने के बाद सावन माह में मछली की दावत को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। उनके बयान को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। हालांकि, इस खबर में दावत के आयोजन और उससे जुड़े तथ्यों का उल्लेख पंडित सुनील भराला के बयान के आधार पर किया गया है।