पुस्तक का विमोचन करते हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण
पंचकूला। हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने शुक्रवार को पंचकूला में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित एक गरिमामय समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार एवं हरियाणा सरकार के जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. कृष्ण के. आर्य की नवीन काव्य कृति ‘जीवन गीत’ का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और समाज में लेखकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई तथा साहित्यकारों को सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कहा कि साहित्यकार समाज के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं। उनकी लेखनी केवल शब्दों का संकलन नहीं होती, बल्कि समाज को दिशा देने, इतिहास को संरक्षित करने और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। उन्होंने कहा कि साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से मानव जीवन के विविध आयामों को सामने लाते हैं तथा प्राचीन इतिहास के अनेक छिपे हुए पहलुओं से समाज को परिचित कराते हैं। ऐसे साहित्य से समाज का बौद्धिक विकास होता है और शासन-प्रशासन को भी सकारात्मक दिशा मिलती है।
कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों को सम्मानित भी किया और उनके साहित्यिक योगदान की सराहना की।
‘जीवन गीत’ में जीवन के विविध रंगों का समावेश
पुस्तक के लेखक डॉ. कृष्ण के. आर्य ने बताया कि ‘जीवन गीत’ उनकी दूसरी पुस्तक है, जिसमें कुल 51 कविताओं का संग्रह शामिल है। इस काव्य संग्रह में देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, कृष्ण भक्ति, पक्षियों के जीवन, मानवीय संवेदनाओं, पारिवारिक मूल्यों और भारतीय त्योहारों जैसे विविध विषयों को स्थान दिया गया है।
उन्होंने बताया कि पुस्तक में ‘इंसान हूं’, ‘पक्षियों की दुनिया’, ‘चुप रहता हूं’, ‘पैसे पेड़ पर लगते हैं’, ‘चौकीदार’, ‘भाग मत’, ‘शब्द नहीं मिलते’ तथा ‘तेरी मां जैसी’ जैसी अनेक कविताएं शामिल हैं, जो समाज के विभिन्न पहलुओं को संवेदनशीलता और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत करती हैं।
‘कर्मयोगी कृष्ण’ को मिला था राष्ट्रीय स्तर का सम्मान
डॉ. कृष्ण के. आर्य ने बताया कि उनकी पहली पुस्तक ‘कर्मयोगी कृष्ण’ को चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 2025 की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक (बेस्ट बुक ऑफ द ईयर) का सम्मान प्राप्त हो चुका है। यह पुस्तक भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित एक शोधपरक कृति है, जिसमें लगभग दो दर्जन प्रामाणिक ग्रंथों के संदर्भों का समावेश किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसमें श्रीकृष्ण से पूर्व की लगभग 60 पीढ़ियों, उनकी शिक्षा, जीवनचर्या, शासन व्यवस्था तथा वास्तविक और मूल द्वारका सहित कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विषयों को 11 अध्यायों में शोधपरक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इस अवसर पर डॉ. आर्य ने अपनी चर्चित पुस्तक ‘कर्मयोगी कृष्ण’ की एक प्रति भी विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण को भेंट की।
कई गणमान्य हस्तियां रहीं मौजूद
कार्यक्रम में यमुनानगर के विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, हरियाणा साहित्य अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. कुलदीप अग्निहोत्री, निदेशक डॉ. चंद्र त्रिखा सहित साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्ति उपस्थित रहे।
समारोह साहित्य, संस्कृति और भारतीय चिंतन की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ, जहां साहित्यकारों के योगदान को सम्मानित करते हुए नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का संदेश भी दिया गया।