हथिनी माधुरी से जुड़े सुप्रीम कोर्ट मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप जैन।
मेरठ, 9 अक्टूबर 2026। महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित नांदनी मठ की हथिनी माधुरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को लेकर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप जैन ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने पशु अधिकार संगठन पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) की याचिका खारिज करते हुए उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उनके अनुसार, यह फैसला हथिनी माधुरी की नांदनी मठ वापसी के बाद उत्पन्न कानूनी विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
सुदीप जैन ने बताया कि न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की पीठ के समक्ष शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई हुई। उन्होंने कहा कि माधुरी की वापसी के बाद उसके पुनर्वास को लेकर दोबारा सवाल उठाए गए थे, लेकिन न्यायालय के फैसले से संबंधित कानूनी प्रयास को झटका लगा है।
नांदनी मठ वापसी के बाद फिर उठाया गया विवाद : सुदीप जैन
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप जैन ने कहा कि हथिनी माधुरी की वनतारा से कोल्हापुर स्थित नांदनी मठ में वापसी के बाद भी उसे लेकर कानूनी विवाद खड़ा करने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि PETA ने माधुरी के पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को दोबारा न्यायालय के समक्ष उठाया।
जैन के अनुसार, माधुरी की वापसी से जुड़े लोगों और समर्थकों के लिए यह मामला केवल एक हथिनी के स्थानांतरण तक सीमित नहीं था, बल्कि इससे धार्मिक परंपराओं, सामाजिक भावनाओं और लंबे समय से चल रहे जनआंदोलन का जुड़ाव भी रहा है।

उन्होंने कहा कि माधुरी को उसके पुराने स्थान पर वापस भेजे जाने के बाद भी विवाद को जारी रखने की कोशिश की गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने से इस प्रयास को झटका लगा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया महत्वपूर्ण
सुदीप जैन ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत याचिका का खारिज होना उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से माधुरी की नांदनी मठ वापसी का समर्थन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि माधुरी के पुनर्वास को लेकर एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास किया गया था। जैन ने याचिका खारिज होने और जुर्माना लगाए जाने को PETA के लिए बड़ा झटका बताया।
माधुरी की वापसी को बताया लंबे जनसंघर्ष का परिणाम
सुदीप जैन ने कहा कि हथिनी माधुरी की नांदनी मठ वापसी अचानक लिया गया निर्णय नहीं था, बल्कि इसके पीछे लंबे समय तक किए गए सामाजिक प्रयास, जनसमर्थन और कानूनी प्रक्रियाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि माधुरी की वापसी की मांग को लेकर विभिन्न स्तरों पर आवाज उठाई गई। इस दौरान अनेक सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने अपनी भूमिका निभाई।
जैन के अनुसार, माधुरी की वापसी के लिए चलाए गए प्रयासों ने यह प्रदर्शित किया कि किसी मुद्दे को लेकर संगठित और निरंतर प्रयास किए जाएं तो उसे व्यापक स्तर पर उठाया जा सकता है।
पूर्व सांसद राजू शेट्टी सहित आंदोलन से जुड़े लोगों के योगदान की सराहना
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने हथिनी माधुरी की वापसी के लिए किए गए प्रयासों में पूर्व सांसद राजू शेट्टी की भूमिका की विशेष सराहना की।
उन्होंने कहा कि राजू शेट्टी सहित अनेक लोगों ने माधुरी की वापसी की मांग को प्रमुखता से उठाया। सड़क से लेकर न्यायालय तक इस मुद्दे को लेकर किए गए प्रयासों और जनसमर्थन ने पूरे प्रकरण को महत्वपूर्ण बनाया।
सुदीप जैन ने उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने माधुरी की वापसी के समर्थन में आवाज उठाई और इस विषय को लगातार सार्वजनिक चर्चा में बनाए रखा।
माधुरी मामले में न्यायिक प्रक्रिया को लेकर सामने आई प्रतिक्रिया
हथिनी माधुरी का मामला उसके स्थानांतरण, पुनर्वास और नांदनी मठ वापसी से जुड़े प्रश्नों के कारण चर्चा में रहा है। इस मामले में पशु कल्याण से संबंधित विषयों के साथ धार्मिक और सामाजिक भावनाओं का पक्ष भी सामने आया है।
सुदीप जैन ने सुप्रीम कोर्ट की कथित कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे माधुरी की वापसी का समर्थन करने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया।
उन्होंने कहा कि माधुरी की नांदनी मठ वापसी में योगदान देने वाले सभी व्यक्तियों और संगठनों के प्रयास सराहनीय हैं। साथ ही उन्होंने इस पूरे प्रकरण में जनसमर्थन और कानूनी प्रयासों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया