नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में आयोजित विमुक्त जाति दिवस कार्यक्रम में सभा को संबोधित करते उत्तर प्रदेश समाज कल्याण मंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण
मेरठ। विमुक्त जाति दिवस के अवसर पर सोमवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु समुदायों के ऐतिहासिक संघर्ष, उनके अधिकारों और सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि विमुक्त एवं घुमंतु समाज को अब केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की मुख्यधारा का सक्रिय भागीदार बनाना होगा।
रैली वोट मांगने के लिए नहीं, अधिकारों के लिए है
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि चुनाव अभी दूर हैं और यह कार्यक्रम किसी से वोट मांगने या वोट देने के लिए नहीं है। यह कार्यक्रम अपने अधिकारों को मांगने और अधिकारपूर्वक उन्हें प्राप्त करने का संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आज चर्चा विकास और अधिकारों की होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि विमुक्त एवं घुमंतु समाज के अनेक परिवार आज भी फ्लाईओवर और पुलों के नीचे या अस्थायी ठिकानों पर रहने को मजबूर हैं। कई गांवों में लोगों को जमीन के पट्टे मिले हैं, लेकिन बड़ी संख्या में परिवार अब भी इससे वंचित हैं। स्थायी पता नहीं होने के कारण कई लोगों को आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज बनवाने में भी परेशानी आती है।
अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों को चिह्नित करने पर जोर
असीम अरुण ने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विमुक्त एवं घुमंतु समाज के लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने समुदाय के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समाज लंबे समय से संघर्ष और वीरता की परंपरा से जुड़ा रहा है। आज भी समाज के अनेक युवा और बेटियां पुलिस, सेना, सीआरपीएफ और बीएसएफ सहित विभिन्न सेवाओं में योगदान दे रहे हैं।
क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के इतिहास का किया उल्लेख
कार्यक्रम में वक्ताओं ने अंग्रेजी शासन के दौरान विमुक्त समुदायों के साथ हुए भेदभाव और दमन का भी उल्लेख किया। कहा गया कि अंग्रेजी शासन के दौरान कई समुदायों को ‘क्रिमिनल ट्राइब्स’ के रूप में चिह्नित करने वाला कानून लागू किया गया था।

वक्ताओं ने कहा कि इन समुदायों के लोग अपराधी नहीं थे, बल्कि उन्होंने अपने अस्तित्व, संस्कृति और सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। स्वतंत्र भारत में इस कलंक को समाप्त करने की दिशा में डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित उन सभी लोगों के योगदान को याद किया गया, जिन्होंने विमुक्त समुदायों को इस व्यवस्था से मुक्ति दिलाने के लिए प्रयास किए।
घुमंतु विकास बोर्ड के बाद ‘घुमंतु विकास मिशन’ की तैयारी
असीम अरुण ने बताया कि विमुक्त एवं घुमंतु समाज के विकास के लिए घुमंतु विकास बोर्ड का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड में समाज के लोगों को भी जिम्मेदारी दी जाएगी, जो प्रदेश में भ्रमण कर समुदाय की समस्याओं को समझने, योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और उनके क्रियान्वयन की निगरानी में सहयोग करेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार अब ‘घुमंतु विकास मिशन’ की दिशा में भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु परिवारों की बुनियादी समस्याओं का समाधान करना होगा।
जाति प्रमाण पत्र और आधार कार्ड की समस्या दूर करने का भरोसा
मंत्री ने कहा कि घुमंतु विकास मिशन के तहत सबसे पहले पहचान से जुड़ी समस्याओं को दूर करने पर जोर दिया जाएगा। जिन लोगों के जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं, उन्हें पात्रता के अनुसार जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
इसी तरह जिन लोगों के आधार कार्ड अभी तक नहीं बन पाए हैं, उनके आधार कार्ड बनवाने के लिए भी अभियान चलाने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि पहचान से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध होने से लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में आसानी होगी।
आमदनी प्रमाण पत्र से लेकर जमीन के पट्टे तक पर जोर
असीम अरुण ने कहा कि समुदाय के लोगों के लिए आय प्रमाण पत्र की समस्या को भी दूर किया जाएगा। जिन परिवारों के पास रहने या खेती करने के लिए जमीन नहीं है, उन्हें उपलब्ध सरकारी भूमि के नियमों के अनुसार पट्टा दिलाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के पास जमीन उपलब्ध हो जाएगी, उन्हें आवास निर्माण के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना सहित पात्र योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

‘अब लगातार घूमना नहीं, स्थायी रूप से बसना है’
कार्यक्रम में घुमंतु समाज के स्थायी पुनर्वास और शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया। असीम अरुण ने कहा कि समुदाय के लोग अब अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं, अपना कारोबार स्थापित करना चाहते हैं और स्थायी रूप से आगे बढ़ना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि घूमना यदि किसी की इच्छा हो तो अलग बात है, लेकिन मजबूरी में लगातार घूमते रहना विकास के रास्ते में बाधा बनता है। सरकार का प्रयास है कि पात्र परिवारों को जमीन, आवास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें स्थायी जीवन की ओर बढ़ाया जाए।
शिक्षा व्यवस्था सुधारने पर भी दिया जोर
असीम अरुण ने कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कई गांवों में विद्यालयों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां भी विद्यालयों में कमियां हैं, उन्हें दूर किया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया और कहा कि विमुक्त एवं घुमंतु समाज के बच्चों को भी बेहतर शैक्षिक वातावरण मिलना चाहिए।
युवाओं को रोजगार और कारोबार से जोड़ने की योजना
कार्यक्रम में युवाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने मुख्यमंत्री युवा योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को अपना छोटा कारोबार शुरू करने के लिए ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक युवक पहले प्रतिदिन करीब 300 से 400 रुपये की मजदूरी पर डीजे का काम करता था। उसे करीब 4.5 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया, जिससे उसने अपना डीजे सिस्टम खरीद लिया। अब वह कर्मचारी के बजाय अपने कारोबार का मालिक बनकर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से समाज के युवाओं को नौकरी तलाशने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनने का अवसर मिलेगा।
पुलिसकर्मियों से भी संवेदनशील व्यवहार की अपील
कार्यक्रम के दौरान पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए असीम अरुण ने कहा कि विमुक्त एवं घुमंतु समाज के लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के समय की व्यवस्था समाप्त हो चुकी है और आजाद भारत में किसी भी समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव या अनावश्यक उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।
उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपील की कि वे समाज के लोगों को अपने भाई-बहन की तरह समझें और उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनें।
विमुक्त जाति दिवस के ऐतिहासिक महत्व को किया याद
कार्यक्रम में विमुक्त जाति दिवस के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह दिन विमुक्त समुदायों के संघर्ष, योगदान और अधिकारों को याद करने का अवसर है। साथ ही समाज को शिक्षा, रोजगार, आवास, पहचान और सामाजिक सम्मान के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ने के संकल्प को दोहराया गया।
कई जनप्रतिनिधि और प्रमुख लोग रहे मौजूद
राज्य स्तरीय कार्यक्रम में समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण के साथ राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप, राज्य मंत्री दिनेश खटीक, राज्य मंत्री संजीव कुमार गोंड, विधायक हाजी गुलाम मोहम्मद, विधान परिषद सदस्य अश्वनी त्यागी, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी और मेरठ के मेयर हरिकांत अहलूवालिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम से निकला संदेश—अधिकार, शिक्षा और स्थायी विकास
विमुक्त जाति दिवस के राज्य स्तरीय आयोजन में समुदाय के लिए पहचान, जमीन, आवास, शिक्षा और रोजगार को विकास की प्राथमिकताओं में शामिल करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि अब विमुक्त एवं घुमंतु समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योजनाओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से पहुंचाना जरूरी है। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि अधिकारों के साथ शिक्षा, स्थायी आवास और आर्थिक आत्मनिर्भरता के माध्यम से समाज को नई दिशा दी जाए।