थाना खरखौदा के पीछे दिखाई देती मस्जिद की मीनार
मेरठ। जनपद मेरठ के खरखौदा क्षेत्र में स्थित हैदरी मस्जिद को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण कार्रवाई सामने आई है। थाना खरखौदा पुलिस द्वारा मस्जिद से संबंधित दस्तावेजों की मांग करते हुए नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में संबंधित पक्ष को सात दिनों के भीतर मस्जिद के स्वामित्व, निर्माण एवं वैधता से जुड़े अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना खरखौदा के प्रभारी निरीक्षक की ओर से जारी नोटिस में राजस्व अभिलेखों का हवाला दिया गया है। नोटिस के अनुसार राजस्व ग्राम खरखौदा की खतौनी में दर्ज खसरा संख्या 1217 की भूमि थाना परिसर की भूमि के रूप में दर्ज है। प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड में उक्त भूमि थाना खरखौदा को आवंटित दर्शाई गई है, जबकि इसी भूमि पर हैदरी मस्जिद का निर्माण होना पाया गया है।
इसी संदर्भ में मस्जिद से जुड़े व्यक्ति अब्दुल गफ्फार को नोटिस जारी करते हुए निर्देशित किया गया है कि यदि मस्जिद के निर्माण, स्वामित्व, आवंटन अथवा वैधता से संबंधित कोई दस्तावेज उपलब्ध हों तो उन्हें नोटिस प्राप्त होने की तिथि से सात दिनों के भीतर पुलिस प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
पुलिस द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि दस्तावेजों के परीक्षण और उपलब्ध अभिलेखों के अध्ययन के बाद ही आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम राजस्व अभिलेखों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उठाया गया है तथा इसका उद्देश्य भूमि की स्थिति और उससे जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन करना है।
इस कार्रवाई के सामने आने के बाद क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोगों के बीच मामले को लेकर उत्सुकता बनी हुई है, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जा रही है।
फिलहाल संबंधित पक्ष को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए सात दिनों का समय दिया गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्धारित अवधि के भीतर कौन-कौन से अभिलेख प्रस्तुत किए जाते हैं और उनके परीक्षण के बाद प्रशासन द्वारा आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मामले में किसी भी प्रकार का अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजों की जांच, राजस्व रिकॉर्ड के सत्यापन और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच और अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है।
नोट: यह समाचार पुलिस द्वारा जारी नोटिस और उसमें उल्लिखित तथ्यों पर आधारित है। मामले में अंतिम निर्णय संबंधित दस्तावेजों की जांच और सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।