पूर्व मंत्री पं सुनील भराला
मेरठ। संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार को लेकर पंडित सुनील भराला ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा, संस्कृति और संस्कारों की अमूल्य धरोहर है। इसलिए संस्कृत भाषा को संरक्षण देने के साथ-साथ नई पीढ़ी को इससे जोड़ना समय की आवश्यकता है।
संस्कृत विद्यालयों की व्यवस्थाओं को मजबूत करने की मांग
पंडित सुनील भराला ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उत्तर प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों की मूलभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने संस्कृत विद्यालयों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने, विद्यालयों की शैक्षिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने तथा विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन का वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए विद्यालयों में पर्याप्त संसाधन और मजबूत शैक्षिक व्यवस्था होना जरूरी है। इसके साथ ही संस्कृत विद्यालयों में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति और पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
सरकारी और निजी विद्यालयों में इंटर स्तर तक संस्कृत की मांग
पंडित सुनील भराला ने संस्कृत भाषा को सरकारी एवं निजी विद्यालयों में इंटर स्तर तक अनिवार्य किए जाने की मांग भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी है। उनका कहना है कि यदि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही संस्कृत के अध्ययन से जोड़ा जाएगा तो नई पीढ़ी में इस प्राचीन भाषा के प्रति रुचि और गौरव की भावना विकसित होगी।
उन्होंने संस्कृत को शिक्षा व्यवस्था में अधिक प्रभावी स्थान दिए जाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अपनी भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने में संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका है।
नई पीढ़ी में संस्कृत के प्रति रुचि पैदा करना जरूरी
पंडित सुनील भराला ने कहा कि संस्कृत के प्रति नई पीढ़ी में रुचि और गौरव की भावना जागृत करना केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को अपनी भाषाई और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी आवश्यक है।
उनके अनुसार संस्कृत में भारतीय ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, दर्शन और संस्कृति से जुड़ा व्यापक साहित्य उपलब्ध है। इसलिए इस भाषा को केवल प्राचीन भाषा के रूप में देखने के बजाय इसके अध्ययन और संरक्षण के लिए आधुनिक स्तर पर भी प्रयास किए जाने चाहिए।
संस्कृत का संरक्षण भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के समान
उन्होंने कहा कि संस्कृत का संरक्षण केवल एक भाषा को बचाने का विषय नहीं है, बल्कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा, सनातन संस्कृति और सभ्यता से जुड़े महत्वपूर्ण विरासत तत्वों के संरक्षण का भी संकल्प है। संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकारी प्रयासों के साथ सामाजिक स्तर पर भी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
संस्कृत दिवस पर संरक्षण और संवर्धन का आह्वान
पंडित सुनील भराला ने संस्कृत दिवस के अवसर पर लोगों से संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि संस्कृत विद्यालयों की व्यवस्थाओं को मजबूत करने, शिक्षकों की नियुक्ति, पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने तथा विद्यालयी शिक्षा में संस्कृत को अधिक प्रभावी स्थान देने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
मुख्य संदेश:
“संस्कृत को बचाना है—क्योंकि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान, संस्कृति और संस्कारों की अमूल्य धरोहर है।”