मानव अधिकार प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंचासीन अतिथिगण
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के सेमिनार हॉल में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली के सहयोग से मानवाधिकारों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और अन्य प्रतिभागियों को मानवाधिकारों, संवैधानिक मूल्यों तथा मानवाधिकार संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री अंजनी अनुज, प्रेजेंटिंग ऑफिसर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली, विशिष्ट अतिथि प्रो. बीरपाल सिंह, रिसर्च डायरेक्टर, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, डॉ. विवेक कुमार, कोऑर्डिनेटर, इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज तथा कार्यक्रम संयोजक श्री आशीष कौशिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।

मानवाधिकारों की सार्वभौमिकता और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार पर जोर
मुख्य अतिथि श्री अंजनी अनुज ने अपने संबोधन की शुरुआत मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा, 1948 की प्रस्तावना के संदर्भ से की। उन्होंने कहा कि मानव परिवार के सभी सदस्यों की जन्मजात गरिमा तथा उनके समान और अविच्छिन्न अधिकारों की मान्यता ही विश्व में स्वतंत्रता, न्याय और शांति की आधारशिला है।
उन्होंने भारत में मानवाधिकारों की सुरक्षा से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। उन्होंने मानवाधिकारों के विभिन्न स्वरूपों पर चर्चा करते हुए नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों तथा सामूहिक अधिकारों के महत्व को समझाया।
श्री अंजनी अनुज ने कहा कि मानवाधिकार प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता, समानता और कल्याण से गहराई से जुड़े हैं। इन अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए संस्थागत तंत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने मानवाधिकारों से जुड़े मामलों के समाधान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग जैसी संस्थाओं की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

अधिकारों से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान की आवश्यकता
श्री अंजनी अनुज ने कहा कि किसी भी अधिकार से जुड़ी समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब संबंधित पक्षों के अधिकारों का समुचित संरक्षण और समाधान सुनिश्चित किया जाए। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रतिभागियों के सवालों के जवाब भी दिए।
उन्होंने NHRC के प्रमुख कार्यों, बंधुआ मजदूरी, डिजिटल संप्रभुता, ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों में मानवाधिकारों के दायरे और महत्व के साथ-साथ प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप में मानवाधिकार शिक्षा की उपयोगिता पर भी विस्तार से जानकारी दी।

मानवाधिकार शिक्षा को कानूनी शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बताया
कार्यक्रम संयोजक श्री आशीष कौशिक ने स्वागत भाषण में कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और अन्य प्रतिभागियों के बीच मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता एवं समझ विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में मानवीय गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और न्याय की रक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। विधि के छात्र भविष्य में वकील, न्यायाधीश, शिक्षाविद और नीति-निर्माता के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाएंगे। ऐसे में उनके लिए मानवाधिकार एवं संवैधानिक मूल्यों की गहरी समझ आवश्यक है।
उन्होंने मानवाधिकारों के उत्थान के साथ-साथ संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय विधि के प्रावधानों तथा मानवाधिकार संरक्षण से जुड़े कानूनों पर भी प्रकाश डाला।
शोध के माध्यम से सामाजिक समस्याओं के समाधान पर जोर
विशिष्ट अतिथि प्रो. बीरपाल सिंह, रिसर्च डायरेक्टर, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने मानवाधिकारों की सुरक्षा और शोध के बीच महत्वपूर्ण संबंध पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान का प्रसार करना नहीं है, बल्कि ऐसा शोध विकसित करना भी है, जो समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में उपयोगी साबित हो।
उन्होंने शोधार्थियों और छात्रों से सैद्धांतिक चर्चाओं तक सीमित न रहने तथा ऐसे विषयों पर शोध करने का आह्वान किया, जिनमें आम लोगों, विशेष रूप से कमजोर एवं हाशिए पर रहने वाले समुदायों के अनुभवों और समस्याओं को प्रमुखता मिले।

संवैधानिक व्यवस्था में मानवाधिकारों की भूमिका पर चर्चा
श्री रामवीर श्रेष्ठ, संसद टीवी ने मानवाधिकारों के संवैधानिक आधार पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को स्वतंत्रता प्रदान करने के साथ-साथ उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए संवैधानिक व्यवस्था भी सुनिश्चित करता है।
उन्होंने मानवाधिकारों को गरिमापूर्ण जीवन का आधार बताते हुए प्रतिभागियों से प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान और मानवीय मूल्यों को अपने व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक जीवन में अपनाने की अपील की।
प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा और समानता के साथ जीवन का अधिकार
डॉ. विवेक कुमार, कोऑर्डिनेटर, इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज ने कहा कि मानवाधिकार शिक्षा को केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। यह कानूनी शिक्षा का महत्वपूर्ण और अनिवार्य हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति, उसकी सामाजिक, आर्थिक अथवा सांस्कृतिक पृष्ठभूमि चाहे जो भी हो, उसे गरिमा, स्वतंत्रता और समानता के साथ जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने विद्यार्थियों से मानवाधिकारों की समझ को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने का आह्वान किया।
चार तकनीकी सत्रों में मानवाधिकार कानूनों की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में मानवाधिकारों से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान की।
प्रथम तकनीकी सत्र : मानवाधिकारों का उत्थान एवं संवैधानिक-अंतरराष्ट्रीय विधि
प्रथम तकनीकी सत्र में श्री आशीष कौशिक ने मानवाधिकारों के विकास एवं उत्थान के साथ-साथ संवैधानिक एवं अंतरराष्ट्रीय विधि के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने मानवाधिकार संरक्षण से जुड़े कानूनों की पृष्ठभूमि और वर्तमान कानूनी व्यवस्था में उनके महत्व को विस्तार से समझाया।
द्वितीय तकनीकी सत्र : मानवाधिकार संस्थानों की कार्यप्रणाली
द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. विवेक कुमार ने मानवाधिकार संस्थानों की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए गठित विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाओं, उनके दायित्वों और समाज में उनकी उपयोगिता के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी।
तृतीय तकनीकी सत्र : महिला एवं बाल संरक्षण कानून
तृतीय तकनीकी सत्र में डॉ. अपेक्षा चौधरी ने महिला एवं बाल संरक्षण कानूनों से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को रेखांकित किया।
चतुर्थ तकनीकी सत्र : बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी एवं SC/ST संरक्षण कानून
चतुर्थ तकनीकी सत्र में डॉ. सुदेशना एवं डॉ. विकास कुमार ने बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के संरक्षण से संबंधित कानूनों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कमजोर एवं वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों तथा उनके प्रभावी उपयोग के बारे में प्रतिभागियों को अवगत कराया।
शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम में डॉ. कुसुमा वती, डॉ. धनपाल, डॉ. महिपाल सिंह, डॉ. सुशील कुमार शर्मा, डॉ. मिनाक्षी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने मानवाधिकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की और प्रश्नोत्तर सत्र में अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
राष्ट्रगान के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम की सह-संयोजक डॉ. अपेक्षा चौधरी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल एवं सार्थक बनाने के लिए सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों, शोधार्थियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया। धन्यवाद प्रस्ताव के बाद राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।