एसएसपी से वार्ता कर ज्ञापन सौंपते दलित किसान नेताओं का प्रतिनिधिमंडल
किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट के विरोध में प्रस्तावित था पैदल मार्च, प्रतिनिधिमंडल ने एसएसपी के सामने रखीं कई मांगें
मेरठ । भारतीय किसान यूनियन (डॉ. बीआर अंबेडकर) के अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय भाटी और जिलाध्यक्ष मोहित जाटव के साथ निवर्तमान एसएसपी अविनाश पांडे के कार्यकाल के दौरान कथित मारपीट के विरोध में सोमवार को प्रस्तावित बहुजन न्याय मार्च को पुलिस-प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया। मार्च चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से शुरू होकर कलेक्ट्रेट तक जाना प्रस्तावित था। प्रशासन ने छात्रों को नए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद छात्र मार्च स्थगित करने पर सहमत हुए।
मार्च को लेकर विश्वविद्यालय में पुलिस बल की तैनाती
बहुजन न्याय मार्च की घोषणा को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। मार्च में शामिल होने के लिए पहुंच रहे कुछ छात्र नेताओं को पुलिस ने पहले ही रोक दिया। पुलिस द्वारा मार्च को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दिए जाने पर छात्रों ने इसका विरोध किया और विश्वविद्यालय परिसर में ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान छात्रों और पुलिस-प्रशासन के बीच काफी देर तक नोकझोंक की स्थिति बनी रही।
एडीएम सिटी और एसपी सिटी ने छात्रों से की बातचीत
छात्रों के धरने पर बैठने की सूचना मिलने के बाद एडीएम सिटी बृजेश कुमार सिंह और एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले पुलिस बल के साथ विश्वविद्यालय पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने छात्रों और छात्र नेताओं से बातचीत कर उनकी बात सुनी। अधिकारियों ने छात्रों से प्रस्तावित पैदल मार्च स्थगित करने का आग्रह किया। साथ ही उन्हें भरोसा दिलाया कि उनके प्रतिनिधिमंडल की नए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कराई जाएगी और उनकी समस्याओं एवं मांगों को एसएसपी के सामने रखने का अवसर दिया जाएगा।
काफी देर तक चली नोकझोंक, फिर मार्च स्थगित करने पर सहमति
पैदल मार्च को लेकर छात्रों और पुलिस अधिकारियों के बीच काफी देर तक बातचीत होती रही। छात्र अपनी मांगों को लेकर मार्च निकालने पर अड़े हुए थे, जबकि पुलिस-प्रशासन कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए मार्च स्थगित कराने का प्रयास कर रहा था। अधिकारियों के आश्वासन के बाद अंततः छात्र प्रतिनिधिमंडल ने पैदल मार्च स्थगित करने पर सहमति जताई। इसके बाद एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंचे।
पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने नए एसएसपी से की मुलाकात
पुलिस-प्रशासन के आश्वासन के मुताबिक दोपहर में छात्रों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की नवागत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति (IPS) से मुलाकात कराई गई। प्रतिनिधिमंडल ने किसान नेताओं के साथ कथित घटना और उससे जुड़े मामलों को लेकर अपनी आपत्तियां और मांगें एसएसपी के सामने रखीं।छात्र प्रतिनिधियों ने पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए अपनी बात विस्तार से रखी।
ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़े मुकदमे वापस लेने की मांग
प्रतिनिधिमंडल की ओर से हिमांशु सिद्धार्थ ने ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़े आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मामलों की समीक्षा की जानी चाहिए और यदि मुकदमे अनावश्यक रूप से दर्ज हुए हैं तो उनके संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
तत्कालीन एसएसपी समेत पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग
छात्र प्रतिनिधिमंडल ने किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट के मामले में तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे समेत संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग भी रखी। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि डॉ. दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के साथ कथित तौर पर बर्बरता एवं मारपीट की गई थी। छात्रों ने इस मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की।
निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठन की मांग
छात्र नेताओं ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग भी एसएसपी के समक्ष रखी। उनका कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच होने से घटना के वास्तविक तथ्यों का पता चल सकेगा और यदि किसी स्तर पर पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।
एसएसपी ने नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया
छात्र प्रतिनिधिमंडल द्वारा रखी गई मांगों को एसएसपी ने सुना। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एसएसपी ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि उनकी ओर से रखे गए मामलों और मांगों पर शासन की गाइडलाइन एवं नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी से मुलाकात के बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल वापस लौट गया। इसके साथ ही सोमवार को प्रस्तावित पैदल मार्च को लेकर बना गतिरोध भी फिलहाल समाप्त हो गया।
सुरक्षा के मद्देनजर विश्वविद्यालय में तैनात रहा पुलिस बल
पैदल मार्च की घोषणा के मद्देनजर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारियों की मौजूदगी में छात्रों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित किया गया। पुलिस अधिकारियों का प्रयास रहा कि प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो और बातचीत के माध्यम से मामले का समाधान निकाला जा सके।
इंस्पेक्टरों को छात्रों से संवाद की जिम्मेदारी
छात्रों को समझाने और स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए इंस्पेक्टर मेडिकल सत्यवीर सिंह अत्री, इंस्पेक्टर नौचंदी अनूप कुमार सिंह और इंस्पेक्टर देहली गेट अतुल कुमार को जिम्मेदारी दी गई थी। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर उन्हें प्रशासन के आश्वासन से अवगत कराया और प्रतिनिधिमंडल की एसएसपी से मुलाकात कराने की बात कही।
फिलहाल टला पैदल मार्च, आगे की कार्रवाई पर नजर
पुलिस-प्रशासन के आश्वासन के बाद सोमवार को सीसीएस विश्वविद्यालय से कलेक्ट्रेट तक प्रस्तावित बहुजन न्याय मार्च फिलहाल स्थगित हो गया। हालांकि, छात्रों द्वारा उठाई गई मांगों और एसएसपी की ओर से दिए गए कार्रवाई के आश्वासन के बाद अब पूरे मामले में आगे होने वाली प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है। किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट और पुलिसकर्मियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप संबंधित पक्षों के दावे हैं। मामले में वास्तविक तथ्यों और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच एवं सक्षम कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।