राजगुरु की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन करती प्राचार्य प्रो संगीता शुक्ला
शिवराम हरि राजगुरु की जयंती पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम, महापुरुषों की प्रतिमाओं पर किया गया माल्यार्पण
मेरठ। महान स्वतंत्रता सेनानी एवं अमर क्रांतिकारी शिवराम हरि राजगुरु की जयंती के अवसर पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ परिसर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के नेतृत्व में राजगुरु की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित अन्य महापुरुषों की प्रतिमाओं पर भी माल्यार्पण कर उनके त्याग, तपस्या और राष्ट्र के प्रति समर्पण को स्मरण किया गया।
राजगुरु का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत : प्रो. संगीता शुक्ला
इस अवसर पर कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि शिवराम हरि राजगुरु भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन महान क्रांतिकारियों में शामिल थे, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उनका जीवन साहस, राष्ट्रप्रेम, संकल्प और त्याग की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि राजगुरु ने बेहद कम आयु में ही यह संकल्प ले लिया था कि भारत माता को पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त कराना ही उनके जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य होगा। देश की स्वतंत्रता के लिए उनके भीतर जो अदम्य उत्साह और समर्पण था, वह आज भी युवाओं को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता है।
बलिदान केवल इतिहास का अध्याय नहीं, जीवंत संदेश
कुलपति ने कहा कि राजगुरु का बलिदान केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति का जीवंत संदेश है। उन्होंने अपने क्रांतिकारी साथियों के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में जिस साहस और प्रतिबद्धता का परिचय दिया, वह प्रत्येक भारतीय को अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों के जीवन से यह संदेश मिलता है कि राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कठिन परिस्थितियों में भी अपने संकल्प से पीछे नहीं हटना चाहिए।
महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग से मिली आजादी
प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि देश को स्वतंत्रता महान क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान से मिली है। इसलिए वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है कि वह स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करे और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता को मजबूत करना ही महान स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
युवाओं को इतिहास और महापुरुषों के जीवन से जोड़ना जरूरी
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें देश के गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष और महापुरुषों के जीवन-मूल्यों से परिचित कराना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी जब स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और उनके त्याग को समझेगी, तभी वह राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को बेहतर ढंग से समझ सकेगी। राजगुरु का जीवन युवाओं को साहस, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रहित की भावना के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प
प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि राजगुरु और अन्य अमर बलिदानियों ने जिस स्वतंत्र एवं सशक्त भारत का सपना देखा था, उसे विकसित और आत्मनिर्भर भारत के रूप में आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना ही उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के भारत की दिशा में सार्थक कदम होगा।
विश्वविद्यालय परिसर में अन्य महापुरुषों को भी किया नमन
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित अन्य महापुरुषों की प्रतिमाओं पर भी माल्यार्पण किया गया। विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में महापुरुषों के योगदान को स्मरण करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने महान स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संकल्प भी लिया।
शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. भूपेंद्र सिंह, प्रो. वीरपाल सिंह, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद की अध्यक्ष प्रो. नीलू जैन गुप्ता, प्रो. कृष्णकांत शर्मा, प्रो. रविंद्र कुमार, प्रो. राकेश कुमार शर्मा, डॉ. वैशाली पाटील, डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. रवि प्रकाश, इंजीनियर मनीष मिश्रा, इंजीनियर मनोज कुमार, इंजीनियर प्रवीण पवार, दीपक त्यागी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय परिवार ने अमर क्रांतिकारी शिवराम हरि राजगुरु के त्याग और बलिदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संदेश दिया।