सड़क पर खंभे या खंभे पर सड़क
मेरठ। रंगोली पुल से लेकर आरटीओ पुल तक कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्य को लेकर क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान कई स्थानों पर बिजली के खंभे सड़क के बीच अथवा सड़क की सीमा में खड़े दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सड़क का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इन खंभों के कारण वाहन चालकों और राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रह सकता है।
सड़क बनने से पहले पोल हटाने की मांग
क्षेत्रवासियों का कहना है कि किसी भी सड़क का निर्माण शुरू करने से पहले सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई और सीमा के भीतर आने वाले बिजली के खंभों, अन्य विद्युत ढांचों तथा अवरोधों को हटाया जाना चाहिए। इसके बाद ही सड़क का निर्माण कराया जाना उचित है। लोगों का आरोप है कि वर्तमान में सड़क निर्माण का कार्य आगे बढ़ रहा है, लेकिन सड़क के बीच में खड़े बिजली के खंभों को अभी तक नहीं हटाया गया है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, यदि सड़क निर्माण के बाद भी बिजली के ये खंभे सड़क के बीच या वाहन आवागमन की सीमा में बने रहते हैं तो रात के समय विशेष रूप से दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है। लोगों ने संबंधित विभागों से तत्काल मौके का निरीक्षण कराकर ऐसे सभी खंभों को सड़क की निर्धारित सीमा से हटाने की मांग की है।
हादसा होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी?
क्षेत्रवासियों ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया है कि यदि भविष्य में सड़क के बीच खड़े बिजली के खंभों की वजह से कोई गंभीर सड़क हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी किस विभाग की होगी। लोगों का कहना है कि बिजली के खंभे विद्युत विभाग से संबंधित हैं, जबकि सड़क का निर्माण नगर निगम अथवा संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा कराया जा रहा है। ऐसे में दोनों विभागों के बीच समन्वय कर निर्माण शुरू होने से पहले विद्युत पोलों को हटाना अथवा निर्धारित स्थान पर स्थानांतरित करना आवश्यक था।
लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण पूरा होने के बाद समस्या को दूर करने के बजाय निर्माण शुरू होने से पहले ही इसका समाधान किया जाना चाहिए था। इससे न केवल सड़क की डिजाइन और यातायात व्यवस्था बेहतर रहेगी, बल्कि भविष्य में संभावित दुर्घटनाओं को भी रोका जा सकेगा।
सड़क की गुणवत्ता को लेकर भी उठ रहे सवाल
क्षेत्रवासियों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों में शासन और विभागीय स्तर पर निर्धारित मानकों का पालन किया जाना जरूरी है। सड़क की चौड़ाई, मोटाई, निर्माण सामग्री, बेस तैयार करने की प्रक्रिया और अन्य तकनीकी मानकों की जांच संबंधित विभाग द्वारा की जानी चाहिए, ताकि निर्माण कार्य लंबे समय तक टिकाऊ रहे।
लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण पर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है, इसलिए कार्य की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों की पारदर्शी तरीके से निगरानी होना आवश्यक है। क्षेत्रवासियों ने संबंधित अधिकारियों से मौके का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।
निर्माण से पहले विभागों के बीच समन्वय की जरूरत
क्षेत्रवासियों के अनुसार, सड़क निर्माण से पहले संबंधित विभागों के अधिकारियों को संयुक्त निरीक्षण करना चाहिए था। सड़क की सीमा में आने वाले बिजली के खंभों, नालियों, सीवर लाइन, पानी की पाइपलाइन और अन्य अवरोधों को चिह्नित करने के बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इससे बाद में सड़क को दोबारा काटने या निर्माण में बदलाव करने की स्थिति से भी बचा जा सकता है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि रंगोली पुल से आरटीओ पुल तक निर्माणाधीन सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराकर सड़क के बीच या यातायात क्षेत्र में आ रहे बिजली के खंभों को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए। साथ ही सड़क की गुणवत्ता की भी तकनीकी स्तर पर जांच कराई जाए।
पूर्व में भी विकास कार्यों को लेकर उठ चुके हैं सवाल
क्षेत्रवासियों ने यह भी बताया कि क्षेत्र में विकास कार्यों में देरी और कार्यों की स्थिति को लेकर पूर्व में भी सामाजिक संगठन सच द्वारा प्रदर्शन किया जा चुका है। संगठन की ओर से विकास कार्यों में हो रही देरी और संबंधित समस्याओं को लेकर आवाज उठाई गई थी। ऐसे में अब सड़क निर्माण के दौरान बिजली के खंभों और गुणवत्ता से जुड़े सवाल सामने आने के बाद संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
लोगों की मांग – पहले खतरा दूर हो, फिर आगे बढ़े निर्माण
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन विकास कार्य के साथ लोगों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने मांग की है कि सड़क का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार कराया जाए और सड़क के बीच खड़े बिजली के खंभों को हटाने की कार्रवाई पहले सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि संभावित हादसे का इंतजार करने के बजाय विभागों को अभी कार्रवाई करनी चाहिए।