सेवा संकल्प अभियान के तहत सड़क दुर्घटनाओं पर चर्चा के कार्यक्रम में मंचासीन कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति
मेरठ। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) समिति ने युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया। इसका विषय “नशे के दुष्प्रभावों के प्रति युवा जागरूकता—रोकथाम तथा बचाव” रहा। कार्यक्रम में शराब के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान तथा नशामुक्त जीवनशैली अपनाने पर चर्चा की गई।
एनईपी समन्वयक डॉ. अर्चना आर्य ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम के उद्देश्यों तथा युवाओं के जीवन में नशामुक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्वेता यादव ने किया।
स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
वरिष्ठ न्यूरो-मनोचिकित्सक एवं व्यसन मुक्ति विशेषज्ञ डॉ. सम्यक जैन ने शराब के अनियंत्रित सेवन से होने वाले शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य यातायात प्रशिक्षक सुनील कुमार शर्मा और यातायात अधिकारी संतोष सिंह ने शराब पीकर वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं, सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन पर जानकारी दी। कंज्यूमर वॉइस के सलाहकार हेमंत उपाध्याय ने शराब के अनुचित सेवन से परिवार और व्यक्ति पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभावों के बारे में बताया और युवाओं से सोच-समझकर निर्णय लेने का आह्वान किया।
कुलपति ने सकारात्मक गतिविधियों पर ध्यान देने का दिया संदेश
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि युवाओं के स्वस्थ, सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में जागरूकता कार्यक्रमों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहकर शिक्षा, स्वास्थ्य और सकारात्मक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव डॉ. वी.पी. सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। आयोजन के बाद सर्वेक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों की जागरूकता का आकलन किया गया और पुस्तकें वितरित की गईं। कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित संस्था कंज्यूमर वॉइस के सहयोग से आयोजित हुआ। इसमें विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, शिक्षक और विद्यार्थी शामिल हुए।