सनातन जागरण कार्यक्रम में पूर्व मंत्री पं सुनील भराला का सम्मान करते आयोजक
भुवनेश्वर/पुरी। भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्र चेतना के संवर्धन के उद्देश्य से कार्यरत राष्ट्रीय परशुराम परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को ओडिशा के पुरी क्लब में आयोजित हुई। बैठक में देशभर से आए राष्ट्रीय, प्रांतीय एवं जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने संगठन के विस्तार, सेवा कार्यों, सांस्कृतिक संरक्षण, युवा जागरण, सामाजिक समरसता और भविष्य की राष्ट्रीय कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में कई प्रस्तावों और योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। परिषद के अनुसार, आने वाले समय में संगठन को देश के प्रत्येक राज्य, जिले और ब्लॉक स्तर तक सशक्त रूप से विस्तार देने तथा सेवा और सांस्कृतिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर संचालित करने का लक्ष्य रखा गया।
संगठन विस्तार और जनजागरण अभियान पर जोर
बैठक के दौरान संगठन की सदस्यता बढ़ाने, सेवा अभियानों को मजबूत करने, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन, आर्थिक सुदृढ़ीकरण और राष्ट्रव्यापी जनजागरण अभियान को गति देने पर चर्चा हुई। परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों तक सेवा, संस्कार और संगठन का संदेश पहुंचाना है।
बैठक में यह भी प्रस्तावित किया गया कि जिला और ब्लॉक स्तर तक संगठनात्मक ढांचे को मजबूत किया जाए तथा प्रशिक्षण शिविरों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से नए कार्यकर्ताओं को जोड़ा जाए।
पंडित सुनील भराला ने भगवान परशुराम के आदर्शों पर दिया जोर
राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक, वरिष्ठ समाजसेवी एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री पंडित सुनील भराला ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का कालखंड है और भगवान श्री परशुराम के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम सत्य, धर्म, न्याय, पराक्रम, त्याग, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं। परिषद का उद्देश्य उनके जीवन-दर्शन और मूल्यों को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को राष्ट्रसेवा का माध्यम मानते हुए समाज, शिक्षा, युवा, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
भगवान श्री परशुराम राष्ट्रीय तीर्थ परिपथ का प्रस्ताव
बैठक के प्रमुख विषयों में “भगवान श्री परशुराम राष्ट्रीय तीर्थ परिपथ (श्री परशुराम सर्किट)” का प्रस्ताव भी शामिल रहा।
परिषद ने प्रस्ताव रखा कि भगवान परशुराम से जुड़े देशभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों को एक राष्ट्रीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जाएं। परिषद का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन, स्थानीय विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर भी हुई चर्चा
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार, भारतीय पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक समरसता, युवाओं में सांस्कृतिक जागरूकता और विभिन्न सामाजिक विषयों पर भी चर्चा की गई।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने समाज में सकारात्मक विचार, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक आत्मगौरव को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्णय लिया।
सदस्यता अभियान और डिजिटल विस्तार की रणनीति
बैठक में संगठन की आर्थिक स्थिति की समीक्षा करते हुए आर्थिक स्वावलंबन, संसाधन विकास, देशव्यापी सदस्यता अभियान, डिजिटल सदस्यता प्रणाली और संगठन के विस्तार की रणनीति पर भी विचार किया गया।
इसके अलावा प्रशिक्षण शिविरों के आयोजन, आगामी राष्ट्रीय कार्यक्रमों की तैयारी तथा हरिद्वार और नासिक कुंभ में सेवा शिविर लगाने जैसे प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। गोवा में भगवान परशुराम अनुसंधान एवं अध्ययन केंद्र स्थापित करने तथा प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के माध्यम से संगठन की गतिविधियों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी विचार किया गया।
भगवान परशुराम मंदिर और लिंगराज महादेव मंदिर में किया दर्शन
बैठक के बाद पंडित सुनील भराला ने परिषद के पदाधिकारियों के साथ भुवनेश्वर स्थित भगवान श्री परशुराम मंदिर और श्री लिंगराज महादेव मंदिर में दर्शन एवं पूजा-अर्चना की।
उन्होंने राष्ट्र की अखंडता, सामाजिक सद्भाव, विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना करते हुए भगवान परशुराम और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
“राष्ट्र प्रथम, संस्कृति सर्वोपरि” का लिया संकल्प
बैठक के समापन पर परिषद के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से यह संकल्प दोहराया कि “राष्ट्र प्रथम, संस्कृति सर्वोपरि और समाज सेवा हमारा परम धर्म” के मूल मंत्र के साथ संगठन समाज सेवा, सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएगा।
कई राज्यों के पदाधिकारी रहे मौजूद
बैठक में परशुराम शक्ति वाहिनी की राष्ट्रीय अध्यक्षा डॉ. चिदात्मिका खटुआ, राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) विनय शर्मा, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष रजनीश त्यागी, राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष सुनील दत्त शर्मा, राष्ट्रीय परशुराम स्वाभिमान सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय भराला, मध्य प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष कपिल तिवारी, ओडिशा प्रभारी संतोष कुमार साहू, संयोजक रजनीकांत मिश्रा, मीडिया प्रभारी चंद्रशेखर पति सहित विभिन्न राज्यों के पदाधिकारी, प्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु
- ओडिशा के पुरी में राष्ट्रीय परशुराम परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित।
- संगठन विस्तार, सेवा कार्य, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रव्यापी जनजागरण अभियान पर विस्तृत चर्चा।
- पंडित सुनील भराला ने भगवान परशुराम के आदर्शों को समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।
- भगवान श्री परशुराम राष्ट्रीय तीर्थ परिपथ (परशुराम सर्किट) के प्रस्ताव पर विचार।
- सदस्यता अभियान, डिजिटल विस्तार, प्रशिक्षण शिविर और सेवा कार्यक्रमों की रणनीति पर मंथन।
- हरिद्वार और नासिक कुंभ में सेवा शिविर तथा गोवा में अनुसंधान एवं अध्ययन केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव।
- बैठक के बाद परिषद पदाधिकारियों ने भुवनेश्वर में भगवान परशुराम मंदिर और लिंगराज महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की।
- समापन पर “राष्ट्र प्रथम, संस्कृति सर्वोपरि और समाज सेवा हमारा परम धर्म” के संकल्प को दोहराया।