कमिश्नर पार्क में धरनारत रवि गौतम ने शुरु की भूख हड़ताल
मेरठ। आईपीएस अविनाश पांडे की बर्खास्तगी समेत विभिन्न मांगों को लेकर कमिश्नरी पार्क में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे दलित नेता रवि गौतम ने गुरुवार से भूख हड़ताल शुरू कर दी। भूख हड़ताल शुरू होने के बाद उनके समर्थक भी बड़ी संख्या में कमिश्नरी पार्क पहुंचे। इस दौरान रवि गौतम ने पुलिस कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
रवि गौतम का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि 8 जुलाई को हुई घटना के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता की। उनका दावा है कि इस घटना में उनके साथ भी मारपीट की गई और पुलिस वैन में उनके साथ कथित मारपीट का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
8 जुलाई की घटना से शुरू हुआ विवाद
पूरे मामले की शुरुआत 8 जुलाई को ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर हुए धरने से हुई थी। धरने के दौरान जाम लगाए जाने की शिकायत के बाद तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। रवि गौतम का आरोप है कि इस दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ मारपीट की गई और उन्हें वहां से खदेड़ा गया।
घटना के बाद पुलिस ने रवि गौतम समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। सभी आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। बाद में जमानत मिलने के बाद रवि गौतम ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में आंदोलन शुरू करने की घोषणा की।

20 अगस्त से कमिश्नरी पार्क में धरना
जमानत पर बाहर आने के बाद रवि गौतम ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया। 20 अगस्त को उन्होंने कमिश्नरी पार्क में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इस बीच 24 अगस्त को पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मेरठ के नए एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। हालांकि, रवि गौतम का आरोप है कि इसके बाद भी उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
30 अगस्त को हुई महापंचायत
मांगों पर सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए 30 अगस्त को कमिश्नरी पार्क में महापंचायत बुलाई गई थी। महापंचायत में आंदोलन को आगे बढ़ाने और भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई थी। इसी क्रम में गुरुवार को रवि गौतम ने अपने अनिश्चितकालीन धरने को भूख हड़ताल में बदल दिया।
भूख हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद भारतीय किसान यूनियन (डॉ. बी.आर. अंबेडकर) से जुड़े कई लोग भी कमिश्नरी पार्क पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया।
पुलिस पर बर्बरता का आरोप
रवि गौतम लगातार पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि 8 जुलाई की घटना के दौरान उनके साथ जो व्यवहार किया गया, वह केवल उनके साथ नहीं बल्कि पूरे दलित समाज के सम्मान से जुड़ा मामला है।
रवि गौतम का दावा है कि उनके साथ हुई कथित मारपीट के पीछे उनकी सामाजिक पहचान भी एक कारण थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के लिखे जाने तक नहीं हुई है। पुलिस और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
भाजपा में मौजूद दलित नेताओं को भी घेरा
गुरुवार को भूख हड़ताल शुरू करने के दौरान रवि गौतम ने भाजपा में मौजूद दलित समाज के नेताओं को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि वह अपने समाज के सम्मान के लिए आंदोलन कर रहे हैं और उन्हें इस बात पर आपत्ति है कि समाज के प्रतिनिधि इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दलित समाज के नेता अपने समाज के मुद्दों पर आवाज नहीं उठाएंगे तो आने वाले समय में परिस्थितियां गंभीर हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के सम्मान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर है।
भूख हड़ताल के बाद प्रशासन पर बढ़ा दबाव
रवि गौतम के भूख हड़ताल पर बैठने के बाद अब प्रशासन के सामने आंदोलन को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है। आंदोलनकारी पुलिस कार्रवाई की जांच, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई समेत अपनी अन्य मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।
फिलहाल कमिश्नरी पार्क में धरना और भूख हड़ताल जारी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन की ओर से आंदोलनकारियों की मांगों को लेकर क्या कदम उठाया जाता है और पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर होती है।