डी आई जी कलानिधि नैथानी
मेरठ। मेरठ परिक्षेत्र में अपराध नियंत्रण और पेशेवर अपराधियों पर प्रभावी निगरानी के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन HS (हिस्ट्रीशीटर)’ के तहत जून माह की समीक्षा की गई। मेरठ परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) कलानिधि नैथानी ने ऑपरेशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए रेंज के सभी जनपदों को सक्रिय हिस्ट्रीशीटरों के विरुद्ध प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई करने तथा उनके नियमित सत्यापन के निर्देश दिए।
डीआईजी कार्यालय से जारी प्रेस नोट के अनुसार जून माह के दौरान मेरठ रेंज के चारों जनपदों—मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़—में कुल 6,846 हिस्ट्रीशीटर अपराधियों का सत्यापन एवं निगरानी की गई। इसी अवधि में 67 नई हिस्ट्रीशीट खोली गईं, जबकि 5 हिस्ट्रीशीटरों की मृत्यु हो जाने के कारण उनकी हिस्ट्रीशीट (एचएस खाका) समाप्त कर दी गई। इसके अलावा 773 हिस्ट्रीशीटर वर्तमान में विभिन्न जेलों में निरुद्ध हैं।
यक्ष ऐप पर शत-प्रतिशत डेटा फीडिंग पूरी
प्रेस नोट के अनुसार मेरठ परिक्षेत्र के सभी हिस्ट्रीशीटरों का विवरण यक्ष (Yaksha) ऐप पर शत-प्रतिशत दर्ज कर दिया गया है। डीआईजी ने निर्देश दिए कि भविष्य में भी सभी अभिलेखों को समय-समय पर अपडेट किया जाए ताकि अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।
जनपदवार स्थिति
मेरठ जनपद
- जून माह में नई हिस्ट्रीशीट: 13
- जेल में निरुद्ध हिस्ट्रीशीटर: 268
- यक्ष ऐप पर फीड हिस्ट्रीशीटर: 2,584
- बुलंदशहर जनपद
- नई हिस्ट्रीशीट: 45
- जेल में निरुद्ध हिस्ट्रीशीटर: 220
- यक्ष ऐप पर फीड हिस्ट्रीशीटर: 2,314
- बागपत जनपद
- नई हिस्ट्रीशीट: 8
- जेल में निरुद्ध हिस्ट्रीशीटर: 184
- यक्ष ऐप पर फीड हिस्ट्रीशीटर: 1,066
- हापुड़ जनपद
- नई हिस्ट्रीशीट: 1
- जेल में निरुद्ध हिस्ट्रीशीटर: 101
- यक्ष ऐप पर फीड हिस्ट्रीशीटर: 882
उप निरीक्षक स्तर से हो नियमित सत्यापन
डीआईजी कलानिधि नैथानी ने सभी जनपद प्रभारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक थाने में उप निरीक्षक (एसआई) स्तर से हिस्ट्रीशीटरों का नियमित सत्यापन कराया जाए। जो अपराधी सक्रिय पाए जाएं, उनके विरुद्ध तत्काल और प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि वे दोबारा आपराधिक गतिविधियों में शामिल न हो सकें।
गंभीर अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोलने के निर्देश
डीआईजी ने बताया कि प्रत्येक जनपद में एडिशनल एसपी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि जिन अपराधियों पर 10 या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, उनकी गतिविधियों का मूल्यांकन कर आवश्यकतानुसार हिस्ट्रीशीट खोली जाए।
इसके साथ ही 7 या उससे अधिक मुकदमों वाले अपराधियों का भी चिन्हीकरण कर उनकी गतिविधियों की समीक्षा की जाए और आवश्यकता पड़ने पर उनके विरुद्ध भी हिस्ट्रीशीट खोली जाए। पुलिस का उद्देश्य अपराधियों का सटीक चिन्हीकरण कर उनके विरुद्ध समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई करना है।
यक्ष ऐप को अपडेट रखने के लिए विशेष निर्देश
- डीआईजी ने यक्ष ऐप पर दर्ज सूचनाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- प्रत्येक थाना प्रभारी नियमित रूप से हिस्ट्रीशीटरों के डेटा का सत्यापन करें।
- क्षेत्राधिकारी और पुलिस अधीक्षक स्तर से समय-समय पर रैंडम चेकिंग कर डेटा की गुणवत्ता की जांच की जाए।
- प्रत्येक हिस्ट्रीशीटर का माता का नाम, उपनाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और पहचान चिन्ह अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए।
- अपराधी का नवीनतम स्पष्ट फोटो, पहचान पत्र, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य आवश्यक दस्तावेज ऐप पर अपलोड किए जाएं।
- जमानतदार (Bailer) विवरण, रिश्तेदार एवं मित्रों का विवरण तथा एफआईआर संबंधी जानकारी पूरी तरह सही और अद्यतन रखी जाए।
- अपराधी के आपराधिक इतिहास में दर्ज एफआईआर नंबर और धाराओं का सही मिलान कर त्रुटियों को दूर किया जाए।
- हाल में दर्ज नए मुकदमों की जानकारी भी तत्काल यक्ष ऐप पर अपडेट की जाए।
अपराध नियंत्रण को और प्रभावी बनाने की पहल
मेरठ परिक्षेत्र पुलिस का मानना है कि ऑपरेशन HS का उद्देश्य केवल हिस्ट्रीशीटरों का रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि उनकी गतिविधियों पर सतत निगरानी रखकर अपराधों की पुनरावृत्ति को रोकना भी है। नियमित सत्यापन, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और सक्रिय अपराधियों के विरुद्ध समय पर कार्रवाई से कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी।
डीआईजी ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऑपरेशन HS को अभियान के रूप में जारी रखते हुए प्रत्येक सक्रिय हिस्ट्रीशीटर पर कड़ी निगरानी रखी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर उनके विरुद्ध निरोधात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।