अमिताभ ठाकुर
मेरठ/लखनऊ। सोशल मीडिया पर मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के विरुद्ध कथित रूप से आपत्तिजनक और धमकी भरी भाषा का प्रयोग किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस संबंध में आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को शिकायत भेजकर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने, वैज्ञानिक जांच कराने तथा विधिक कार्रवाई करने की मांग की है।
11 जुलाई 2026 को भेजे गए अपने शिकायती पत्र में अमिताभ ठाकुर ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर प्रसारित एक सार्वजनिक वीडियो/रील में कथित रूप से मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय, उनकी पत्नी और उनकी माता के विरुद्ध अत्यंत अश्लील, अपमानजनक और धमकी भरे शब्दों का प्रयोग किया गया है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि वीडियो में एसएसपी को “जिंदा जला देने” जैसी कथित हिंसात्मक बात कही गई है।
सोशल मीडिया वीडियो पर जताई गंभीर आपत्ति
शिकायत के अनुसार संबंधित वीडियो अभी भी फेसबुक पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। अमिताभ ठाकुर का कहना है कि वीडियो में न केवल एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के विरुद्ध हिंसा के लिए कथित रूप से उकसाने वाली बातें कही गई हैं, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों के प्रति भी अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार के संबंध में भी कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं।
विरोध और धमकी में अंतर समझना जरूरी: अमिताभ ठाकुर
शिकायत पत्र में अमिताभ ठाकुर ने स्पष्ट किया कि मेरठ में पुलिस हिरासत में मारपीट के कथित मामले को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में आक्रोश रहा है और उन्होंने स्वयं भी उस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी।
हालांकि उन्होंने कहा कि किसी पुलिस अधिकारी की कार्यशैली का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन उस अधिकारी के विरुद्ध सार्वजनिक रूप से हिंसा का आह्वान करना अथवा उनके परिवार के सदस्यों के लिए अशोभनीय भाषा का प्रयोग करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आता। उनके अनुसार यदि शिकायत में वर्णित आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गंभीर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।
एफआईआर दर्ज करने और वैज्ञानिक जांच की मांग
आज़ाद अधिकार सेना ने डीजीपी से मांग की है कि संबंधित फेसबुक वीडियो का तत्काल संज्ञान लेते हुए उसका वैज्ञानिक परीक्षण एवं सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं सहित अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर सख्त विधिक कार्रवाई की जाए।
संगठन ने यह भी मांग की है कि विवादित वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने अथवा उसके प्रसारण पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि इस प्रकार की सामग्री के प्रसार को रोका जा सके।