डी आई जी कलानिधि नैथानी ( मेरठ परिक्षेत्र)
मेरठ। मेरठ परिक्षेत्र में अपराधियों पर प्रभावी निगरानी और संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “ऑपरेशन HS (हिस्ट्रीशीटर)” के तहत जून माह के कार्यों की समीक्षा डीआईजी मेरठ रेंज कलानिधि नैथानी ने की। समीक्षा के दौरान सामने आया कि मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ जनपदों में कुल 6846 हिस्ट्रीशीटर अपराधियों का सत्यापन एवं निगरानी की गई। वहीं अपराधियों के चिन्हीकरण के आधार पर 67 नई हिस्ट्रीशीट खोली गईं, जबकि 05 हिस्ट्रीशीटरों की मृत्यु होने पर उनकी हिस्ट्रीशीट समाप्त कर दी गई।
डीआईजी ने बताया कि मेरठ रेंज के सभी हिस्ट्रीशीटरों का विवरण यक्ष (Yaksh) ऐप पर शत-प्रतिशत अपलोड कर दिया गया है, जिससे अपराधियों की निगरानी और उनके आपराधिक रिकॉर्ड का डिजिटल प्रबंधन अधिक प्रभावी हो सके।
जनपदवार स्थिति
समीक्षा के अनुसार मेरठ जनपद में जून माह के दौरान 13 नई हिस्ट्रीशीट खोली गईं। जिले के 268 हिस्ट्रीशीटर वर्तमान में जेल में निरुद्ध हैं तथा 2584 हिस्ट्रीशीटरों का डेटा यक्ष ऐप पर अपलोड किया गया है।
- बुलंदशहर में सबसे अधिक 45 नई हिस्ट्रीशीट खोली गईं। यहां 220 हिस्ट्रीशीटर जेल में निरुद्ध हैं और 2314 हिस्ट्रीशीटरों का डेटा ऐप पर दर्ज किया गया है।
- बागपत में 08 नई हिस्ट्रीशीट खोली गईं। जिले में 184 हिस्ट्रीशीटर जेल में बंद हैं तथा 1066 अपराधियों का डेटा यक्ष ऐप पर उपलब्ध कराया गया है।
- हापुड़ में 01 नई हिस्ट्रीशीट खोली गई। यहां 101 हिस्ट्रीशीटर जेल में निरुद्ध हैं और 882 हिस्ट्रीशीटरों का डेटा ऐप पर अपलोड किया गया है।
सक्रिय अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान डीआईजी कलानिधि नैथानी ने रेंज के सभी पुलिस अधीक्षकों एवं थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि उप निरीक्षक स्तर से हिस्ट्रीशीटरों का नियमित सत्यापन कराया जाए तथा जो अपराधी सक्रिय पाए जाएं, उनके विरुद्ध तत्काल प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि एडिशनल एसपी को नोडल अधिकारी बनाकर ऐसे अपराधियों की पहचान की जाए जिनके विरुद्ध 10 या उससे अधिक मुकदमे दर्ज हैं और उनकी हिस्ट्रीशीट अनिवार्य रूप से खोली जाए। साथ ही 07 या उससे अधिक मुकदमों वाले अपराधियों को भी चिन्हित कर आवश्यक जांच के बाद उनके विरुद्ध हिस्ट्रीशीट खोलने की कार्रवाई की जाए।
यक्ष ऐप पर डेटा अपडेट रखने के निर्देश
डीआईजी ने यक्ष ऐप पर अपराधियों के रिकॉर्ड को अद्यतन और त्रुटिरहित रखने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक थाना प्रभारी हिस्ट्रीशीटरों के डेटा की नियमित समीक्षा एवं सत्यापन सुनिश्चित करें, जबकि क्षेत्राधिकारी और पुलिस अधीक्षक स्तर से समय-समय पर रैंडम चेकिंग कर डेटा की गुणवत्ता की जांच की जाए।
उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक हिस्ट्रीशीटर का माता का नाम, उपनाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और पहचान चिन्ह अनिवार्य रूप से दर्ज किए जाएं। इसके अलावा अपराधी का नवीनतम फोटो, पहचान पत्र, ऑडियो रिकॉर्डिंग तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज भी ऐप पर अपलोड किए जाएं।
डीआईजी ने यह भी कहा कि जमानतदार (Bailer) का विवरण, रिश्तेदार एवं मित्रों की जानकारी तथा एफआईआर का रिकॉर्ड पूरी तरह सही और अद्यतन रखा जाए। साथ ही अपराधियों के आपराधिक इतिहास में दर्ज एफआईआर नंबर एवं धाराओं का सही मिलान कर त्रुटियों को दूर किया जाए और हाल में दर्ज नए मुकदमों का विवरण भी तत्काल यक्ष ऐप में अपडेट किया जाए।
मेरठ रेंज पुलिस का मानना है कि डिजिटल निगरानी प्रणाली और नियमित सत्यापन के माध्यम से आदतन अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा तथा कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।