सात दिवसीय माटीकला मेले का आगाज, दीपों और मिट्टी के उत्पादों से सजा बाजार
छह जिलों के कारीगर 30 स्टॉलों पर बेच रहे हैं अपने उत्पाद; कारीगरों के लिए स्टॉल और आम लोगों के लिए प्रवेश निःशुल्क
मेरठ #ANN दीपावली पर घर-आंगन को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीये और सजावटी सामान खरीदने का अवसर मेरठवासियों को मिल रहा है। पीएमश्री राजकीय इंटर कॉलेज परिसर में रविवार से सात दिवसीय माटीकला मेले की शुरुआत हुई। मेले में मिट्टी की सौंधी खुशबू, रंग-बिरंगे दीये और कारीगरों के हाथों से बने उत्पाद लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। सोमवार को प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सोमेंद्र तोमर और राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी मेले का विधिवत उद्घाटन करेंगे।
मेले में मेरठ के साथ बुलंदशहर, हापुड़, गाजियाबाद, मथुरा और आगरा के कुम्हारों ने 30 स्टॉल लगाए हैं। इन पर मिट्टी के दीये, घरेलू उपयोग के बर्तन, सुराही, गुल्लक और घर सजाने के लिए तैयार की गई कलाकृतियां उपलब्ध हैं। दीपावली को ध्यान में रखते हुए दीयों को अलग-अलग डिजाइन और रंगों में तैयार किया गया है। माटीकला उत्पादों के साथ बनारसी साड़ी और अन्य हस्तशिल्प वस्तुओं की खरीदारी का अवसर भी मेले में मिल रहा है।
बच्चों के लिए पेंटिंग किट और सजावटी कुल्हड़
मेले के पहले दिन शहरवासियों ने खरीदारी में रुचि दिखाई। मिट्टी के पारंपरिक उत्पादों के साथ कुछ नए प्रयोग भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। कुल्हड़ों पर किया गया क्रोशिया वर्क आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बच्चों के लिए मिट्टी के विभिन्न उत्पाद और अपनी पसंद के रंगों से दीये सजाने वाली पेंटिंग किट भी रखी गई हैं। इनके जरिए बच्चे दीपावली की तैयारी के साथ अपनी रचनात्मकता भी दिखा सकते हैं।
कारीगरों को निःशुल्क स्टॉल, प्रवेश शुल्क भी नहीं
आयोजकों के अनुसार, कारीगरों को अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए निःशुल्क स्टॉल दिए गए हैं। मेले में आने वाले लोगों से प्रवेश शुल्क भी नहीं लिया जा रहा। इससे कुम्हारों और छोटे हस्तशिल्प कारीगरों को बिना अतिरिक्त खर्च के अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का मौका मिला है।
आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक कुम्हारी कला को बढ़ावा देना और कारीगर परिवारों को बाजार उपलब्ध कराना है। ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना से आयोजित इस मेले में ग्राहक सीधे कारीगरों से उत्पाद खरीद सकते हैं। इससे मिट्टी के दीये और बर्तनों की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ स्थानीय कारीगरों की आमदनी को भी सहारा मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय उत्पाद खरीदने की अपील
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने शहरवासियों से मेले में पहुंचकर स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने की अपील की। उन्होंने कहा कि दीपावली पर मिट्टी के दीये और स्वदेशी उत्पाद अपनाना परंपरा से जुड़ने के साथ कुम्हार परिवारों की आजीविका को समर्थन देने का भी माध्यम है।