मेरठ बार एसोसिएशन
मेरठ। मेरठ बार एसोसिएशन ने अपने एक सदस्य अधिवक्ता को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। बार एसोसिएशन का आरोप है कि संबंधित अधिवक्ता ने एक विवादित मामले में संगठन का सहयोग प्राप्त करने के बाद बिना एसोसिएशन को जानकारी दिए आरोपित पक्ष से समझौता कर लिया, जिससे बार एसोसिएशन की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री परवेज आलम द्वारा जारी नोटिस में अधिवक्ता आशुतोष शर्मा को संबोधित करते हुए कहा गया है कि सदर बाजार स्थित वैरायटी सेंटर के स्वामी शिवम अग्रवाल के साथ 26 मार्च 2026 को हुई कथित मारपीट और गाली-गलौज की घटना के बाद बार एसोसिएशन ने उनके समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
एसएसपी से वार्ता कर कराई गई थी कार्रवाई
नोटिस के अनुसार मेरठ बार एसोसिएशन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से वार्ता की थी। इसके बाद प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने, गैर-जमानती वारंट जारी कराने तथा संबंधित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराने में संगठन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
बार एसोसिएशन का कहना है कि संगठन के हस्तक्षेप और सहयोग से मामले में आरोपित पक्ष के खिलाफ न्यायालय से आवश्यक कार्रवाई भी कराई गई थी।
बिना जानकारी दिए किया समझौता
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि संबंधित अधिवक्ता ने बाद में न्यायालय में बयान देकर आरोपित पक्ष के साथ समझौता कर लिया, जबकि इस संबंध में मेरठ बार एसोसिएशन को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई।
बार एसोसिएशन का कहना है कि यदि किसी मामले में संगठन अपने सदस्य के समर्थन में खड़ा होता है और उसके लिए संघर्ष करता है, तो बाद में किसी भी प्रकार का समझौता करने से पूर्व संगठन को विश्वास में लिया जाना चाहिए था।
संगठन को गुमराह करने का आरोप
नोटिस में कहा गया है कि इस घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत होता है कि संगठन का उपयोग केवल मुकदमा दर्ज कराने और कानूनी दबाव बनाने के लिए किया गया। इसके बाद व्यक्तिगत स्तर पर समझौता कर लेने से संगठन की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है और बार एसोसिएशन के सदस्य स्वयं को आहत महसूस कर रहे हैं।
बार एसोसिएशन ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत निंदनीय बताते हुए कहा है कि इससे संगठन की छवि और सम्मान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
तीन दिन में मांगा जवाब
महामंत्री परवेज आलम ने नोटिस के माध्यम से संबंधित अधिवक्ता को निर्देशित किया है कि वह तीन दिन के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण मेरठ बार एसोसिएशन कार्यालय में प्रस्तुत करें।
नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत न किए जाने की स्थिति में सदस्यता के संबंध में संगठन द्वारा नियमानुसार निर्णय लिया जा सकता है।
अधिवक्ता समाज में चर्चा का विषय बना मामला
यह मामला अधिवक्ता समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है। बार एसोसिएशन के इस कदम को संगठनात्मक अनुशासन और संस्थागत गरिमा से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं संबंधित अधिवक्ता का पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।