बड़ौत में श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के 8 दिवसीय कार्यक्रम में जुटेंगे श्रावक श्राविकाएं।
बड़ौत। श्री अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर कमेटी के तत्वावधान और आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज के सानिध्य में 8 से 15 अक्टूबर 2026 तक श्री अजितनाथ सभागार, बड़ौत में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर मंदिर कमेटी की ओर से तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। विधान के प्रतिष्ठाचार्य प्रसिद्ध विद्वान पंडित सनत कुमार और पंडित विनोद कुमार रजवास रहेंगे।
मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि विधान के दौरान होने वाले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के मुख्य पात्रों का चयन पूरा हो चुका है। इनमें श्रावक श्रेष्ठी राजकुमार जैन, सौधर्म इंद्र हिमांशु जैन गुरुग्राम, चक्रवर्ती इंद्र लोकेश जैन दिल्ली, कुबेर इंद्र सतेंद्र जैन इंजीनियर बड़ौत, महायज्ञनायक सुभाष जैन दिल्ली, ईशान इंद्र अनिल जैन, सानत इंद्र गौरव जैन और महेंद्र इंद्र प्रवीण जैन शामिल हैं। ध्वजारोहणकर्ता के रूप में जितेंद्र कुमार और सौरभ जैन एडवोकेट का चयन किया गया है। इसके अलावा प्रतिदिन अलग-अलग श्रीपाल-मैनासुंदरी के पात्र विधान में शामिल होंगे।
आठ दिवसीय आयोजन के दौरान श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान से जुड़े विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न किए जाएंगे। आयोजन में देश के विभिन्न प्रदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
इन लोगों को मिली आयोजन की जिम्मेदारी
श्री अजितनाथ मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मुकेश जैन ने आयोजन की व्यवस्थाओं के लिए वरदान जैन, संजय जैन, अनिल जैन लोहे वाले और अनिल जैन बामनौली वाले को विधान संयोजक बनाया है। संयोजकों की देखरेख में आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
आचार्य ने बताई सिद्धचक्र विधान की महिमा
आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र विधान की धार्मिक महिमा बताते हुए श्रीपाल और मैना सुंदरी से जुड़ी कथा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जैन परंपरा के अनुसार प्राचीन काल में चंपापुरी के राजा श्रीपाल कुष्ठ रोग से पीड़ित थे। उनका विवाह उज्जैन के राजा की पुत्री मैना सुंदरी से हुआ था। मैना सुंदरी धार्मिक और जैन धर्म के प्रति श्रद्धावान थीं।
आचार्य के अनुसार, मैना सुंदरी ने दिगंबर संत की प्रेरणा से राजा श्रीपाल और उनके साथ के 700 कुष्ठ रोगियों के साथ सिद्धचक्र महामंडल विधान की आराधना की। अष्टानिका पर्व के दौरान विधि-विधान और श्रद्धा के साथ अनुष्ठान किया गया। जैन धार्मिक मान्यता के अनुसार विधान के प्रभाव से श्रीपाल और अन्य रोगियों को रोग से मुक्ति मिली।
इसी कथा से जुड़ी एक प्रसिद्ध लोक उक्ति का भी जैन समाज में उल्लेख किया जाता है। आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं से आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में शामिल होकर धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, नवीन जैन, संजय जैन, अनिल जैन, संजीव जैन, विकास जैन, अनुज जैन, ऋषभ जैन, वकील चंद जैन, सुरेश जैन, विमल जैन और राकेश जैन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।