संस्कृत शोध पर व्याख्यान दिया गया
मेरठ। रघुनाथ गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, मेरठ में बुधवार को संस्कृत विषय में शोध की पारंपरिक एवं आधुनिक प्रविधियों पर केंद्रित एक विशिष्ट अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज की प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी के कुशल मार्गदर्शन में संस्कृत विभाग, भारतीय भाषा, संस्कृति एवं कला प्रकोष्ठ तथा रिसर्च डेवलपमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। व्याख्यान में छात्राओं को संस्कृत शोध की नवीन तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग तथा शोध में नैतिकता के महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई।
“संस्कृत में शोध प्रविधियों का स्वरूप एवं महत्त्व” विषय पर हुआ व्याख्यान
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री प्रभात कुमार, सहायकाचार्य, संस्कृत विभाग, डी.ए.वी. कॉलेज, बुलंदशहर रहे। उन्होंने “संस्कृत में शोध प्रविधियों का स्वरूप एवं महत्त्व” विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए छात्राओं को शोध कार्य की बारीकियों से अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा ही नहीं, बल्कि ज्ञान और शोध की समृद्ध परंपरा का आधार भी है। शोध कार्य में पारंपरिक विधियों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
AI से संस्कृत शोध को मिलेगी नई दिशा
अपने व्याख्यान में प्रभात कुमार ने छात्राओं को बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकें संस्कृत शोध को अधिक प्रभावी, व्यवस्थित और नवीन बना सकती हैं। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि डिजिटल संसाधनों, भाषा विश्लेषण उपकरणों और AI आधारित तकनीकों का उपयोग कर शोध कार्य को सरल और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सकता है।
उन्होंने शोधार्थियों को यह भी सलाह दी कि तकनीक का उपयोग करते समय शोध की मौलिकता और अकादमिक ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
शोध में साहित्यिक चोरी से बचने पर दिया विशेष बल
मुख्य वक्ता ने शोध के दौरान साहित्यिक चोरी (Plagiarism) के विभिन्न स्वरूपों की जानकारी देते हुए छात्राओं को इसके दुष्परिणामों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि किसी भी शोध की विश्वसनीयता उसकी मौलिकता पर आधारित होती है, इसलिए शोधकर्ताओं को हमेशा अपने कार्य में ईमानदारी और नैतिक मानकों का पालन करना चाहिए।
शोध संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल
कार्यक्रम का संयोजन संस्कृत विभाग एवं भारतीय भाषा, संस्कृति एवं कला प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. उपासना सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान छात्राओं में शोध के प्रति रुचि विकसित करने और उन्हें आधुनिक शोध पद्धतियों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में रिसर्च डेवलपमेंट सेल की प्रभारी प्रो. अनुराधा मलिक एवं समिति के सदस्यों का विशेष योगदान रहा। वहीं संस्कृत विभाग की शिक्षिकाओं मिस दिव्या, मिस स्वीटी और मिस अंजलि ने भी कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
छात्राओं ने उत्साहपूर्वक किया सहभाग
व्याख्यान में तनीषा तोमर, पलक राज, शीतल, आंचल, सुवेदा, प्राची रस्तोगी, रीना, शगुन, वंशिका मित्तल, रूबी, तनु, ललिता सहित बड़ी संख्या में छात्राओं ने भाग लिया। छात्राओं ने शोध की नई तकनीकों, AI के उपयोग और शोध नैतिकता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं तथा विशेषज्ञ से अपने प्रश्न भी पूछे।
कॉलेज प्रशासन ने कहा कि भविष्य में भी छात्राओं के शैक्षणिक एवं शोध कौशल को विकसित करने के लिए ऐसे व्याख्यान, कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।