आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री सभा को संबोधित करते हुए
मेरठ। आर्य समाज थापर नगर में आयोजित रविवारीय साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम में आर्य जगत के प्रसिद्ध वैदिक विद्वान एवं आगरा से पधारे आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि परमात्मा की सच्ची भक्ति और उपासना से ही मनुष्य को आत्मिक, मानसिक एवं शारीरिक बल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा ही समस्त जीवात्माओं को जीवन, ज्ञान, शक्ति और कर्म करने की क्षमता प्रदान करता है तथा उसकी कृपा से ही मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझ पाता है।
सत्संग के दौरान अपने ओजस्वी उद्बोधन में आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री ने कहा कि परमात्मा ने जीवात्मा को अमूल्य मानव शरीर प्रदान किया है, जो संसार में श्रेष्ठ कर्म करने और आत्मोन्नति का माध्यम है। यदि मनुष्य नियमित रूप से ईश्वर की उपासना करता है, उसके गुणों का चिंतन करता है तथा उन्हें अपने जीवन में धारण करने का प्रयास करता है, तो उसका आत्मबल निरंतर बढ़ता जाता है।
उन्होंने कहा कि आत्मबल ही वह शक्ति है, जिसके सहारे मनुष्य जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकता है। जिन लोगों का आत्मबल मजबूत होता है, वे विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होते और संघर्षों के बावजूद सफलता प्राप्त करते हैं। परमात्मा के प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण मनुष्य को मानसिक दृढ़ता प्रदान करते हैं, जिससे वह बड़े से बड़े संकट पर विजय प्राप्त कर सकता है।
आचार्य अग्निहोत्री ने कहा कि जितना अधिक हम परमात्मा के गुणों का चिंतन करते हैं और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करते हैं, उतनी ही हमारी कार्यक्षमता और जीवन शक्ति बढ़ती जाती है। उन्होंने कहा कि ईश्वर से शक्ति प्राप्त करने के लिए केवल प्रार्थना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुरुषार्थ और सत्कर्म भी आवश्यक हैं। ईश्वर उन्हीं की सहायता करता है जो स्वयं भी प्रयासरत रहते हैं।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे शुद्ध आत्मा और निर्मल अंतःकरण से परमात्मा की भक्ति करें, जिससे आत्मकल्याण के साथ-साथ समाज कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त हो सके। उन्होंने कहा कि ईश्वर भक्ति का अंतिम उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सुख नहीं, बल्कि समस्त समाज के प्रति सेवा, सद्भाव और कर्तव्य भावना का विकास भी है।
कार्यक्रम में आर्य समाज थापर नगर के प्रधान राजेश सेठी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आत्मा अनादि और अविनाशी है, उसकी उत्पत्ति नहीं होती, लेकिन आत्मा को अपने वास्तविक स्वरूप और अस्तित्व का बोध परमात्मा की कृपा से ही प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान, शक्ति और जीवन के सभी साधन परमात्मा की व्यवस्था से ही उपलब्ध होते हैं।
राजेश सेठी ने कहा कि ईश्वर की उपासना मनुष्य को दुःखों से मुक्ति दिलाने का सर्वोत्तम साधन है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण मनोयोग और श्रद्धा के साथ ईश्वर की आज्ञाओं का पालन करते हुए धर्ममय जीवन व्यतीत करना चाहिए।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं यज्ञ के साथ हुआ। धर्माचार्य आचार्य सत्यप्रकाश जी ने वैदिक रीति से देवयज्ञ संपन्न कराया। यज्ञ के यजमान के रूप में श्रेय बत्रा ने भाग लिया। जन्मदिवस के उपलक्ष्य में यजमान परिवार द्वारा विशेष आहुति अर्पित कर परिवार एवं समाज की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
सत्संग के दौरान भक्ति संगीत का भी आयोजन किया गया। धर्मवीर, मुकेश कन्नौजिया एवं अपर्णा ने ईश्वर भक्ति से ओत-प्रोत भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भजनों का आनंद लेते हुए वैदिक विचारधारा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
कार्यक्रम में विजय बंसल, भानु बत्रा, कमलेश चांदना, सुभाष मल्होत्रा, प्रीति सेठी, धर्मवीर, आनंद वर्धन झा, विक्रम सोंधी सहित अनेक आर्य समाजी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अंत में आर्य समाज थापर नगर के प्रधान राजेश सेठी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन मनीष शर्मा ने किया।