सीता माता गुरुद्वारे में कीर्तन करती संगत
मेरठ। गुरुद्वारा माता सीता भैंसाली मैदान, मेरठ में रविवार को माता सुंदर कौर जी एवं महान सिख योद्धा सरदार जस्सा सिंह रामगढ़िया के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में विशेष धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगत ने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ नाम-सिमरन, गुरुबाणी पाठ एवं शब्द-कीर्तन में भाग लिया। पूरे गुरुद्वारा परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और संगत गुरुवाणी के रस में सराबोर होती रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुद्वारे के प्रमुख सेवादार सरदार अभरजीत सिंह एडवोकेट द्वारा गुरुबाणी पाठ एवं पावन शब्दों के उच्चारण से किया गया। इसके बाद विभिन्न रागी जत्थों और कीर्तनियों ने गुरु महिमा का गुणगान करते हुए संगत को गुरुवाणी से जोड़ने का प्रयास किया।
बाल कीर्तनी जत्थे ने “सुखमनी सुख अमृत प्रभु नाम, भगत जना के मन बिसराम” तथा “निक्काम सेवक जाए के महा आनंद, हरि सुनिया” जैसे पावन शब्दों का गायन कर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से विभोर कर दिया। वहीं स्त्री सत्संग जत्थे ने “सिमरओ सिमर सिमर सुख पावहु, कलि कलेश तन माहि मिटावहु” का मधुर कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को नाम सिमरन के महत्व से अवगत कराया।
इस दौरान भाई सुखविंद्र सिंह ने “कोटि अपराध खंडन के दाते, तुझ बिन कौन उधारे” तथा “छोड़ि सिआनप बहु चतुराई, जो कर जोड़ि सच मार्ग चल” सहित कई गुरुबाणी शब्दों का भावपूर्ण कीर्तन किया। उनके मधुर स्वर और आध्यात्मिक प्रस्तुति ने उपस्थित संगत को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए सरदार रणजीत सिंह जस्सल ने माता सुंदर कौर जी एवं महान योद्धा सरदार जस्सा सिंह रामगढ़िया के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब केवल सिख धर्म का ही नहीं बल्कि संपूर्ण मानवता का मार्गदर्शक ग्रंथ है। इसमें गुरु साहिबानों के साथ-साथ विभिन्न धर्मों, जातियों और सामाजिक पृष्ठभूमियों से जुड़े संतों और भक्तों की वाणी भी संकलित है, जो मानव मात्र को प्रेम, भाईचारे और समानता का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि गुरु साहिबानों की शिक्षाएं “अव्वल अल्लाह नूर उपाया, कुदरत के सब बंदे” तथा “कोई बोले राम-राम, कोई खुदाय” जैसे सार्वभौमिक संदेशों के माध्यम से सर्वधर्म समभाव, मानव एकता और सामाजिक सद्भाव की प्रेरणा देती हैं। वर्तमान समय में इन शिक्षाओं की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है, जब समाज को आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित संगत ने गुरु घर की महिमा का गुणगान करते हुए समाज में प्रेम, सेवा और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने कीर्तन एवं सिमरन के माध्यम से गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
इस अवसर पर सरदार नरेन्द्रपाल सिंह, बीबी रविन्द्र कौर, सरदार अगम सिंह सहित अनेक सेवादारों एवं संगत के सदस्यों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
गुरुद्वारा प्रबंधन समिति की ओर से बताया गया कि आगामी 9 एवं 10 जून को भी विशेष धार्मिक एवं गुरमत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में संगत के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम के अंत में अरदास के उपरांत संगत को गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया।