गन्ना सर्वेक्षण को हाई टैक बनाने को लेकर समीक्षा बैठक करते गन्ना अधिकारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना सर्वेक्षण और सट्टा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, त्रुटिरहित और किसान हितैषी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा और शासन के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने स्मार्ट गन्ना किसान (एसजीके) पोर्टल पर दर्ज गन्ना क्षेत्रफल का भू-राजस्व अभिलेखों से एपीआई (API) के माध्यम से मिलान कराने का निर्णय लिया है। इस नई तकनीकी व्यवस्था से गन्ना क्षेत्रफल के आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित होगी, फर्जी प्रविष्टियों पर रोक लगेगी और वास्तविक किसानों को ही योजना का लाभ मिलेगा।
अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर और देवरिया मंडल के अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण
गन्ना आयुक्त के निर्देश पर शनिवार को लखनऊ स्थित न्यू स्कॉलर हॉस्टल सभागार में अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर एवं देवरिया परिक्षेत्र के अधिकारियों और फील्ड कार्मिकों के लिए वर्चुअल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में उप गन्ना आयुक्त, जिला गन्ना अधिकारी, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, गन्ना विकास निरीक्षक, सचिव तथा गन्ना पर्यवेक्षकों को स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों की राजस्व अभिलेखों से मैपिंग की पूरी प्रक्रिया समझाई गई।
अधिकारियों को यह भी बताया गया कि डाटा सत्यापन किस प्रकार निर्धारित समय सीमा के भीतर पारदर्शी और तकनीकी रूप से किया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर त्रुटि या अनियमितता की संभावना न रहे।
पहले चरण में एक हेक्टेयर से अधिक गन्ना क्षेत्र वाले किसानों का होगा सत्यापन
विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के प्रथम चरण में एक हेक्टेयर से अधिक गन्ना क्षेत्रफल वाले किसानों के आंकड़ों का सत्यापन किया जाएगा। विभाग का मानना है कि बड़े क्षेत्रफल के नाम पर की जाने वाली फर्जी प्रविष्टियों की पहचान कर उन्हें समाप्त किया जा सकेगा। इससे तथाकथित गन्ना माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा और केवल वास्तविक एवं पात्र किसानों का ही गन्ना क्षेत्र पोर्टल पर दर्ज रहेगा।
आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता
स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल और भू-राजस्व अभिलेखों के तकनीकी समन्वय से गन्ना क्षेत्रफल का वास्तविक मिलान संभव होगा। इससे गन्ना सर्वेक्षण, सट्टा निर्धारण, गन्ना आपूर्ति और भुगतान प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी। विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था से गन्ना विभाग के प्रति किसानों का विश्वास भी मजबूत होगा और भुगतान प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आएगी।
फर्जी और त्रुटिपूर्ण डाटा का होगा पूरी तरह उन्मूलन
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाना है। विभाग के अनुसार आधुनिक तकनीक की मदद से फर्जी और त्रुटिपूर्ण डाटा की पहचान कर उसे समाप्त किया जाएगा। इससे गन्ना सर्वेक्षण एवं सट्टा निर्धारण की प्रक्रिया अधिक सटीक, विश्वसनीय और तकनीकी रूप से सक्षम बनेगी।
किसानों को मिलेगी 63 महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी
अभियान के दौरान किसानों को उनके गन्ना सर्वे एवं सट्टा से जुड़े 63 महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी किसान को सर्वेक्षण या सट्टा से संबंधित कोई आपत्ति या शिकायत होगी तो उसका मौके पर ही निस्तारण किया जाएगा। इससे किसानों को विभागीय कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित होगा।
जनप्रतिनिधियों और समितियों का भी लिया जाएगा सहयोग
गन्ना आयुक्त ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए सहकारी गन्ना विकास समितियों के अध्यक्षों तथा जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाएगा। व्यापक जनसहभागिता के माध्यम से अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक किसानों को इस व्यवस्था का लाभ मिल सके।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
विभाग का विश्वास है कि भू-राजस्व अभिलेखों और स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल के आंकड़ों के तकनीकी समन्वय से प्रदेश की गन्ना सर्वेक्षण प्रणाली अधिक मजबूत, पारदर्शी और किसान हितैषी बनेगी। इससे वास्तविक गन्ना किसानों के हितों की सुरक्षा होगी, फर्जीवाड़े पर प्रभावी रोक लगेगी और उत्तर प्रदेश में गन्ना विकास की प्रक्रिया को नई गति मिलेगी। साथ ही गन्ना आपूर्ति और भुगतान व्यवस्था भी अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बन सकेगी।