सिविल लाइन क्षेत्र की वह दुकाने जिन पर हाई कोर्ट द्वारा स्टेट दिया गया
मेरठ। सर्किट हाउस के सामने वर्षों से चाय एवं अन्य छोटे व्यवसाय संचालित कर रहे व्यापारियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। नगर निगम मेरठ द्वारा जारी किए गए दुकानें हटाने के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक व्यापारियों के विरुद्ध कोई प्रतिकूल कार्रवाई न की जाए। न्यायालय के इस अंतरिम आदेश से प्रभावित व्यापारियों ने राहत की सांस ली है।
सात दिन में दुकानें हटाने का दिया गया था नोटिस
नगर निगम मेरठ ने हाल ही में सर्किट हाउस के सामने संचालित चाय एवं अन्य दुकानों को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर दुकानें हटाने और स्थान खाली करने के निर्देश दिए थे। नोटिस मिलने के बाद व्यापारियों में चिंता का माहौल बन गया, क्योंकि अधिकांश परिवार वर्षों से इसी व्यवसाय पर निर्भर हैं।
हाईकोर्ट में दी गई चुनौती
नगर निगम की इस कार्रवाई के खिलाफ प्रभावित व्यापारियों की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी एवं अधिवक्ता विपुल सिंघल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अंतरिम राहत की मांग की। याचिका में कहा गया कि व्यापारियों को पर्याप्त समय दिए बिना अचानक हटाने की कार्रवाई उनके आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है।
याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने नगर निगम को निर्देशित किया कि अगली सुनवाई तक किसी भी व्यापारी के खिलाफ बेदखली या अन्य प्रतिकूल कार्रवाई न की जाए। न्यायालय ने नगर निगम से इस संबंध में अपना पक्ष प्रस्तुत करने को भी कहा है।
वर्षों से निगम के अधीन कर रहे हैं व्यवसाय
अधिवक्ता विपुल सिंघल ने बताया कि संबंधित व्यापारी लंबे समय से इसी स्थान पर अपना व्यवसाय कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह स्थान पूर्व में नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराया गया था और व्यापारी नियमित रूप से निर्धारित किराया भी जमा करते रहे हैं। ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए मात्र एक सप्ताह के नोटिस पर उन्हें हटाना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
वेंडिंग जोन बनाने का दिया सुझाव
याचिका में केंद्र और राज्य सरकार की स्ट्रीट वेंडर नीति का भी उल्लेख किया गया है। अधिवक्ता का कहना है कि नीति के अनुसार विभिन्न मार्गों पर वेंडिंग जोन विकसित किए जाने का प्रावधान है। सर्किट हाउस मार्ग पर भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध है, जहां इन दुकानों को व्यवस्थित रूप से वेंडिंग जोन के रूप में संचालित किया जा सकता है। इससे व्यापारियों की आजीविका सुरक्षित रहेगी और नगर निगम की व्यवस्थाओं पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
व्यापारियों में खुशी, अगली सुनवाई पर नजर
उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत मिलने के बाद क्षेत्र के व्यापारियों में संतोष का माहौल है। फिलहाल सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें नगर निगम मेरठ अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखेगा। इस सुनवाई के बाद मामले में आगे की दिशा और व्यापारियों के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है।
व्यापारियों का कहना है कि वे प्रशासन के साथ सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन उनकी आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए उचित और न्यायसंगत समाधान निकाला जाना चाहिए।