गन्ना किसान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को रोजगारोन्मुखी शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में गन्ना विकास विभाग की सहकारी गन्ना समितियों के सहयोग से संचालित इंटर कॉलेजों एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापकों के लिए तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक कौशल विकास, रोजगारोन्मुखी शिक्षा और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करना है, ताकि वे अपने संस्थानों में विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर ढंग से तैयार कर सकें।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 13 जुलाई से 15 जुलाई, 2026 तक लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान, लखनऊ में आयोजित होगा। कार्यक्रम का आयोजन वाधवानी फाउंडेशन की अनुषंगी संस्था स्किल्स डेवलपमेंट नेटवर्क (एसडीएन) द्वारा किया जा रहा है।
40 प्राध्यापक होंगे प्रशिक्षित
आयुक्त, गन्ना एवं चीनी, उत्तर प्रदेश के अनुसार इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के आठ प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों—बरेली, पीलीभीत, शाहजहाँपुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, बलरामपुर और बस्ती—से चयनित कुल 40 प्राध्यापक प्रतिभाग करेंगे। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आधुनिक शिक्षण तकनीकों, कौशल विकास, रोजगार आधारित शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, उद्यमिता तथा उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।
विद्यार्थियों को मिलेगा रोजगारोन्मुखी मार्गदर्शन
प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सभी प्राध्यापक अपने-अपने शिक्षण संस्थानों में लौटकर विद्यार्थियों को कौशल विकास आधारित शिक्षा उपलब्ध कराएंगे। इसके माध्यम से छात्रों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों के लिए तैयार किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य है कि सहकारी गन्ना समितियों के सहयोग से संचालित विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर बदलती रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बन सकें तथा प्रतिस्पर्धी माहौल में सफलतापूर्वक अपनी पहचान स्थापित कर सकें।
ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
आयुक्त, गन्ना एवं चीनी ने बताया कि यह कार्यक्रम विशेष रूप से ग्रामीण एवं गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रशिक्षित शिक्षक अपने विद्यार्थियों को नई तकनीकों, रोजगार के अवसरों, उद्योगों की अपेक्षाओं और व्यावसायिक कौशल से जोड़ेंगे, जिससे युवाओं की रोजगार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल शैक्षणिक डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोजगार प्राप्त करने के लिए व्यावहारिक कौशल भी आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है।
शिक्षा और उद्योग के बीच बनेगा बेहतर समन्वय
इस पहल के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान प्राध्यापकों को ऐसे विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा, जिनकी मांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार में लगातार बढ़ रही है। इससे विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार के लिए आवश्यक व्यावहारिक दक्षताओं को भी विकसित कर सकेंगे।
युवाओं के भविष्य को मिलेगी नई दिशा
उत्तर प्रदेश सरकार का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षक आधुनिक कौशल विकास के अनुरूप प्रशिक्षित होंगे, तो वे विद्यार्थियों को भी बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार कर सकेंगे। इससे न केवल युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि प्रदेश में आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी।
यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में सहकारी गन्ना समितियों से जुड़े शिक्षण संस्थानों में कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है।