डॉ. सुमित उपाध्याय
मेरठ। भारत में पिछले कुछ समय से कुछ विरोध प्रदर्शनों और उनसे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। इन घटनाओं के बाद यह धारणा बनाने की कोशिश की गई कि यही देश की पूरी Generation Z (Gen Z) की सोच और पहचान है। लेकिन क्या कुछ लोगों के व्यवहार के आधार पर पूरी युवा पीढ़ी का आकलन किया जा सकता है?
वास्तविकता इससे कहीं अलग और अधिक प्रेरणादायक है। भारत की नई पीढ़ी का बड़ा वर्ग खेल, विज्ञान, शिक्षा, तकनीक, स्टार्टअप, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन कर रहा है। यही युवा भारत के भविष्य की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।
विरोध प्रदर्शन और सोशल मीडिया की तस्वीर
हाल के दिनों में कुछ प्रदर्शनकारियों के वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए। इनमें प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अराजकता फैलाने जैसे आरोपों की चर्चा हुई। इसके बाद कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन्हें पूरी Gen Z की आवाज़ के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।
हालांकि, किसी भी लोकतंत्र में कुछ व्यक्तियों या समूहों के व्यवहार को पूरी पीढ़ी की मानसिकता मान लेना उचित नहीं माना जा सकता। भारत की करोड़ों युवा आबादी विविध विचारों, संस्कृतियों और कार्यक्षेत्रों में देश के विकास में योगदान दे रही है।
खेल जगत में भारत की युवा शक्ति
इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की। कई युवा खिलाड़ियों ने स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं—
- शर्मिला ढांकर – स्वर्ण पदक
- दिलीप महादू गावित – स्वर्ण पदक
- ज्ञानेश्वरी यादव – रजत पदक
- मुथुपांडी राजा – रजत पदक
- सर्वेश कुशारे – रजत पदक
- गुलवीर सिंह – रजत पदक
- मुरली श्रीशंकर – रजत पदक
- मोहम्मद बासिल – रजत पदक
- वल्लुरी अजय बाबू – रजत पदक
- बिंद्यारानी देवी – कांस्य पदक
- शिल्पा के. शायला – कांस्य पदक
इन खिलाड़ियों ने किसी विवाद से नहीं बल्कि अपने प्रदर्शन, अनुशासन और मेहनत से भारत का तिरंगा विश्व मंच पर लहराया।
गणित ओलंपियाड में भारतीय प्रतिभा
अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड में भी भारतीय छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया।
- एबेल जॉर्ज – स्वर्ण पदक
- आरव गुप्ता – स्वर्ण पदक
- कनव तलवार – रजत पदक
- संजना चाको – रजत पदक
- बैरव मुरुगन – रजत पदक
- श्रेया शांतनु – रजत पदक
इन छात्रों ने कठिन परिश्रम और बौद्धिक क्षमता के दम पर विश्व स्तर पर भारत का सम्मान बढ़ाया।
शतरंज से लेकर ओलंपिक तक भारतीय युवाओं की पहचान
भारत की नई पीढ़ी विश्व शतरंज में भी अपनी अलग पहचान बना रही है।
- डी. गुकेश
- आर. प्रज्ञानानंदा
- आर. वैशाली
- दिव्या देशमुख
इसी तरह अन्य खेलों में भी युवा खिलाड़ी लगातार देश का गौरव बढ़ा रहे हैं—
- नीरज चोपड़ा
- लक्ष्य सेन
- अंतिम पंघाल
- पलक गुलिया
सूर्यवंशी सहित अनेक युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
खेल से आगे विज्ञान और तकनीक में भी अग्रणी
आज भारत के हजारों युवा केवल खेल तक सीमित नहीं हैं। वे अंतरिक्ष तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, रक्षा तकनीक, सेमीकंडक्टर निर्माण, स्टार्टअप और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
भारतीय युवा उपग्रह विकसित कर रहे हैं, नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाली कंपनियां स्थापित कर रहे हैं। यही भारत के भविष्य की वास्तविक तस्वीर है।
क्या कुछ लोग पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं?
किसी भी समाज में कुछ व्यक्तियों के अनुचित व्यवहार को पूरी पीढ़ी का चरित्र नहीं माना जा सकता। भारत की करोड़ों युवा आबादी शिक्षा, रोजगार, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में सकारात्मक भूमिका निभा रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले कुछ वीडियो या घटनाएं पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं।
भारत की वास्तविक Gen Z वह है जो मेहनत, अनुशासन, नवाचार और उपलब्धियों के माध्यम से देश का भविष्य मजबूत कर रही है। खेल के मैदान से लेकर विज्ञान प्रयोगशालाओं तक, स्टार्टअप से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक भारतीय युवा अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।
देश के भविष्य का आकलन कुछ विवादित घटनाओं से नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के कार्यों से होना चाहिए जो प्रतिदिन अपने प्रयासों से भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में जुटे हैं।
लेखक प्रसिद्ध
डॉ. सुमित उपाध्याय
(विशेषज्ञ नाक कान गला)